Noida Twin Towers Demolished What Next: ट्विन टावर गिराए जाने के बाद दो दिन तक सफाई का काम होगा, लेकिन मलबा हटने में करीब तीन महीने का वक्त लग सकता है।
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अभी दो दिन तक आस-पास की सफाई होगी।
- फोटो : अमर उजाला
नोएडा में सुपरटेक कंपनी की ओर से बनाए गए ट्विन टावर को गिरा दिया गया। भ्रष्टाचार की दोनों इमारतों को जमींदोज होने में महज आठ सेकेंड लगे। टावर में जैसे ही ब्लास्ट शुरू हुए, धूल का गुबार उठना शुरू हो गया। कई किलोमीटर दूर तक लोगों ने इस धूल के गुबार को देखा। आसपास की 50 से ज्यादा इमारतें पूरी तरह से धूल से पट गईं। पास की दो सोसायटी में चाहरदीवारी क्षतिग्रस्त हुई है। धमाका इतना तेज था कि फरीदाबाद फ्लाईओवर तक कांप उठा।
मौके पर करीब 60 से 80 हजार टन मलबा इकट्ठा हो गया है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस मलबे का क्या होगा? ट्विन टावर के गिराए जाने के बाद खाली हुई जमीन का क्या होगा? कब तक आसपास में धूल की समस्या बनी रहेगी? जानिए ऐसे ही छह सवालों के जवाब...
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कुछ यूं गिराया गया ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
1. ट्विन टावर के आसपास स्थिति कब तक सामान्य होगी?
नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी ने इसकी जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'अभी तक सबकुछ प्लानिंग के हिसाब से हुआ है। साफ-सफाई का काम शुरू हो गया है। एक्यूआई डेटा भी ठीक है। बिजली की सप्लाई फिर से शुरू कर दी गई है। गैस सप्लाई शुरू की जा रही है। सात बजे के आसपास सोसायटी वाले लोग अपने घर आ सकेंगे।'
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ट्विन टावर गिरने के बाद कुछ यूं रहा माहौल
- फोटो : अमर उजाला
2. धूल और धुएं का गुबार कब तक दूर होगा?
नोएडा अथॉरिटी के मुताबिक, अभी इसपर लगातार काम जारी है। पानी का छिड़काव हो रहा है। स्मॉग मशीन के जरिए भी धुएं और धूल को हटाने का काम हो रहा है। ये काम लगातार दो दिन तक जारी होगा।
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ट्विन टावर का मलबा साफ किया जा रहा है।
- फोटो : अमर उजाला
3. मलबे का क्या होगा?
ट्विन टावर गिरने से करीब 60 से 80 टन मलबा इकट्ठा हो गया है। नोएडा अथॉरिटी की सीईओ ऋतु महेश्वरी ने बताया कि इन मलबे के हटाने में तीन महीने लगेंगे। मलबे का ज्यादा हिस्सा यहीं पर यूज हो जाएगा, जबकि कुछ यहां से हटा दिया जाएगा।
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ट्विन टावर कुछ यूं गिराया गया।
- फोटो : अमर उजाला
3. आसपास की इमारतों को बचाने के लिए क्या किया गया था?
एक इमारत 32 तो दूसरी 29 मंजिला थी। ऋतु महेश्वरी ने बताया कि इन दोनों में विस्फोटक रखे गए थे। हालांकि, ऊपर की तीन मंजिलों में कोई विस्फोट नहीं किया गया। इसी के चलते आसपास की इमारतों को कुछ खास नुकसान नहीं हुआ। अगर ऊपर की मंजिलों में भी विस्फोट होता तो स्थिति खराब हो सकती थी।
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ट्विन टावर
- फोटो : अमर उजाला
4. खाली जमीन का क्या होगा?
ट्विन टावर गिर चुका है। अब सब यही सोच रहे हैं कि आखिर इस जमीन का क्या होगा? जिस जमीन पर ट्विन टावर बनाया गया था उसे किस इस्तेमाल में लिया जाएगा?
ये समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'ये मामला साल 2009 में शुरू हुआ, जब सुपरटेक ने नोएडा प्राधिकरण के साथ मिलीभगत कर ट्विन टावर का निर्माण शुरू किया। इसे एपेक्स और केन टावर नाम दिया गया था। जिसके बाद यहां के रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) ने विरोध करना शुरू कर दिया। RWA का मानना था ये दो बड़े टावर ठीक उनकी सोसाइटी के सामने खड़े किए जा रहे थे। इसे नोएडा प्राधिकरण ने ग्रीन बेल्ट बताया था। ऐसे में यहां किसी तरह का निर्माण नहीं हो सकता है।'
याचिकाकर्ता RWA के जनरल सेक्रेट्री पंकज वर्मा का भी मीडिया में एक बयान आया है। इसमें उन्होंने बताया था कि, 'यहां के प्रोजेक्ट के शुरुआती प्लान में ये बिल्डिंग कभी थी ही नहीं, ये ग्रीन एरिया था। जिस पर टावर खड़े कर दिए गए। अब चूंकि ट्विन टावर गिर चुके हैं, ऐसे में यहां फिर से ग्रीन बेल्ट स्थापित किया जाएगा।'
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धूल को हटाने के लिए पानी का छिड़काव हो रहा
- फोटो : अमर उजाला
5. क्या लोगों के स्वास्थ्य पर असर पड़ेगा?
यूपी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने ट्विन टावर के आसपास छह से अधिक अस्थायी मशीनों को लगाया है। इनकी मदद से टीम 31 अगस्त तक वायु प्रदूषण पर निगरानी रखेगी। रोजाना दस बजे वायु प्रदूषण के आंकड़े जारी किए जाएंगे। साथ ही, अन्य मशीनों से भी वायु गुणवत्ता सूचकांक देखा जाएगा।
इसके अलावा डॉक्टर्स की टीम यहां के स्थानीय लोगों के सेहत की जांच भी करेगी। शनिवार को डॉक्टर्स ने ट्विन टावर के बगल की दो सोसायटी के 50 लोगों का पल्मोनरी फंक्शन टेस्ट (पीएफटी) कराया है। अब बुधवार को फिर से इनकी जांच होगी। इससे मालूम चलेगा कि टावर गिरने के बाद हुए प्रदूषण का लोगों के शरीर पर क्या असर पड़ा है?
डॉक्टर्स ने कहा है कि आसपास के लोग अनिवार्य रूप से मास्क पहनें।
- फोटो : अमर उजाला
6. प्रदूषण से कैसे करें बचाव?
डॉ. रश्मि गुप्ता कहती हैं कि ट्विन टावर गिरने के बाद धूल का गुबार उठा है। आस-पास अभी काफी प्रदूषण बढ़ गया है। ऐसे में लोगों को अपनी सेहत का ख्याल रखना चाहिए। अगले कुछ दिन अनिवार्य रूप से आस-पास रहने वाले लोग एन-95 मास्क पहनें। इसके अलावा अस्पताल में आपात स्थिति के लिए बेड भी आरक्षित कर दिए गए हैं।