पश्चिम बंगाल में बात हमेशा मां, माटी और मानुष की होती थी, लेकिन इस बार 'खेला होबे' का जोर है। दरअसल, मुख्य राजनीतिक दल टीएमसी ने मुस्लिमों के टिकट काट दिए हैं तो पार्टी प्रमुख चंडी पाठ और शिव मंदिर के चक्कर लगाती नजर आ रही हैं। ऐसे में सवाल उठने लगे हैं कि जय श्रीराम और देवी दुर्गा के बीच उलझे पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में क्या ममता बनर्जी भी हिंदुत्व की राह पर निकल गई हैं? क्या अब्बास सिद्दीकी और असदुद्दीन ओवैसी की एंट्री से उन्हें अपना मुस्लिम वोट बैंक खिसकता नजर आ रहा है? या भाजपा को जवाब देने के लिए दीदी ने सियासत का नया सिरा पकड़ लिया है?