उत्तर प्रदेश के चुनावी संग्राम में मतदान का दौर थम चुका है। अब बारी परिणाम की है, आने वाली 11 मार्च सभी दावेदारों के लिए खास होने वाली है। नजदीक आती चुनाव परिणाम की तारीख के साथ इन प्रत्याशियों की दिल की धड़कने भी तेज होती जा रही हैं। जाने क्यों हैं ये दावेदार खास...
शिवपाल सिंह
यूपी विधानसभा में सपा कुनबे की रार के बाद शिवपाल सिंह के पास कुछ बचा है तो खुद की व्यक्तिगत राजनीतिक करियर की साख को बचाना। धड़कने तेज हो रही हैं, और कुछ ही वक्त बात परिणाम सामने होंगे। ऐसे में शिवपाल को खुद की सीट को बचाना सबसे बड़ी चुनौती है। शिवपाल सिंह जसवंतनगर विधानसभा सीट से सपा के टिकट पर पांचवी बार चुनाव लड़ रहे हैं।
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यूपी के 20 बड़े चेहरे, जिनके सामने है बड़ी राजनीतिक चुनौती
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rita bahuguna joshi
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रीता बहुगुणा जोशी
कांग्रेस को अलविदा कह भाजपा का दामन थामने वाली दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में हैं। वो इस सीट पर वर्तमान विधायक भी हैं। ऐसे में इस सीट को बचाना उनकी प्रतिष्ठा की वजह बन गया है। हालांकि इस सीट का इतिहास हमेशा बीजेपी के पक्ष में ही रहा है। 2012 के चुनाव में तत्काली कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस सीट पर बीजेपी प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की थी। ऐसे में खुद के राजनीतिक तिलिस्म को बचाना रीता बहुगुणा जोशी के लिए सबसे अहम है।
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अपर्णा यादव (लखनऊ कैन्टोमैन्ट)
हाईप्रोफाइल चेहरों में समाजवादी पार्टी का सबसे ज्यादा चर्चित चेहरा हैं अपर्णा यादव। 26 साल की अपर्णा मुलायम सिंह यादव की बहू हैं और पार्टी की प्रतिष्ठित सीट लखनऊ कैंट से चुनाव मैदान में हैं। अपर्णा यादव बीजेपी की दिग्गज नेता रीता बहुगुणा जोशी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं। अपर्णा ने अन्तरराष्ट्रीय संबंध और राजनीति में परास्नातक की डिग्री ली है। वो उस वक्त चर्चा में आईं जब उन्होंने पीएम मोदी के साथ सेल्फी खींची थी।
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स्वाति सिंह (सरोजनी नगर, लखनऊ)
स्वाति सिंह बीजेपी के पूर्व उत्तर प्रदेश उपाध्यक्ष दयाशंकर सिंह की पत्नी हैं। जिन्हें बसपा सुप्रीमों मायावती के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में बीजेपी ने पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया। स्वाति राज्य में पार्टी की महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष हैं।
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रानी पक्षालिका सिंह (बाह, आगरा)
रानी पक्षालिका सिंह अपने पति अरिदमन सिंह की जगह बीजेपी के टिकट पर बाह सीट से चुनाव लड़ रही हैं। वो अखिलेश कैबिनेट में भी रहे हैं। लेकिन इस बार वो चुनाव मैदान में नहीं हैं।
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मुख्तार अंसारी
यूं तो मऊ जिले की चारों विधानसभा सीटों पर भाजपा-भासपा, सपा-कांग्रेस गठबंधन और बसपा के बीच कांटे की टक्कर है, पर मुख्तार फैक्टर मुकाबले को थोड़ा दिलचस्प बना रहा है। मऊ जिले की सदर सीट पर मुख्य लड़ाई बसपा के प्रत्याशी और माफिया डॉन मुख्तार अंसारी, सपा के अल्ताफ अंसारी और भाजपा और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (भासपा) गठबंधन के महेंद्र राजभर के बीच है। मुख्तार 1996 से यहां से लगातार चार बार विधायक चुने जा चुके हैं।
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अमनमणि त्रिपाठी
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अमनमणि त्रिपाठी
नेपाल सीमा से सटे महराजगंज जिले की नौतनवां विधानसभा सीट सजायाफ्ता पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के बेटे और पत्नी की हत्या के आरोपी अमनमणि त्रिपाठी के मैदान में होने से सुर्खियों में है। पूर्वांचल की यह सीट इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यहां अमनमणि और सपा प्रत्याशी कुंवर कौशल किशोर सिंह उर्फ मुन्ना के बीच की सियासी जंग दोनों प्रतिद्वंदी परिवारों का भविष्य तय करने वाली साबित होगी।
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स्वामी प्रसाद मौर्य
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स्वामी प्रसाद मौर्य
बसपा छोड़कर भाजपा में शामिल हुए दिग्गज नेता स्वामी प्रसाद मौर्य को भाजपा ने पडरौना सीट से प्रत्याशी बनाया है। पडरौना से भाजपा से बागी परशुराम मिश्र मौर्य के सामने निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं। वहीं बसपा से जावेद इकवाल और कांग्रेस शिव कुमार देवी चुनावी मैदान में है।
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अंबिका चौधरी
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अंबिका चौधरी
बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट से अंबिका चौधरी इस बार बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। वह इस सीट पर पिछले दो दशक से अधिक समय से चुनाव लड़ रहे हैं, जिसमें लगातार चार बार विधायक भी रहे हैं। सपा-कांग्रेस गठबंधन में फेफना विस सीट से प्रत्याशी संग्राम सिंह यादव ताल ठोंक रहे हैं, जो चिलकहर विधानसभा सीट से विधायक रहे हैं। वह भी पिछले दो दशक से अधिक समय से राजनीति कर रहे हैं।
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गरिमा सिंह
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अमिता सिंह और गरिमा सिंह
अमेठी विधानसभा सीट पर सबकी निगाहें टिकी हुई है, क्योंकि यहां दो रानियों की लड़ाई हो रही है। भाजपा ने राज्यसभा सदस्य डॉ. संजय सिंह की पहली पत्नी गरिमा सिंह को प्रत्याशी बनाया है, तो उनकी मौजूदा पत्नी अमीता सिंह कांग्रेस से मैदान में हैं।
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गायत्री प्रजापति
अमेठी सीट से ही सूबे के चर्चित मंत्रियों में शुमार यहां के मौजूदा विधायक गायत्री प्रसाद प्रजापति फिर सपा से प्रत्याशी हैं। सपा-कांग्रेस में गठबंधन के बावजूद यहां दोनों पार्टियों के बीच दोस्ताना मुकाबला हो रहा है।
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आजम खान
तमाम सियासी गठजोड़ के बीच समाजवादी पार्टी में एक शख्स ऐसा रहा जिसका जलवा कभी कम नहीं हुआ। पार्टी के लिए आजम ट्रंप कार्ड हैं औ उन्होंने इस बात को हमेशा सिद्ध भी किया है। रामपुर की सीट पर वो लगातार चुनाव जीतते आए हैं। वो सात बार विधानसभा चुनाव जीत चुके हैं। अब अपने जलवे को अपनी सीट पर फिर से कायम रखना आजम के लिए बेहद जरूरी है।
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मानिकपुर : गुलाबी गैंग की कमांडर मैदान में
महिलाओं की आवाज बनने वाली गुलाबी गैंग की कमांडर संपत पाल तीसरी बार विधानसभा मैदान में हैं । 2006 में संपत पाल ने महिलाओं की समस्याओं पर आंदोलन शुरू किया और गुलाबी गैंग बनाया था। एक बार फिर से कांग्रेस ने संपत पाल को उम्मीदवार बनाया है। इससे पहले वे 2012 में मानिकपुर सीट से कांग्रेस के टिकट से चुनाव लड़ीं, लेकिन हार गईं।
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आराधना मिश्रा
रामपुर खास से एक ही पार्टी से लगातार नौ बार विधायक के रूप में रिकॉर्ड बनाने वाले दिग्गज कांग्रेसी नेता प्रमोद तिवारी की विरासत अब उनकी बेटी आराधना मिश्रा मोना संभाल रही हैं। वह 2014 में हुए उपचुनाव में पहली बार मैदान में उतरी थीं। इस बार वह कांग्रेस-सपा गठबंधन की उम्मीदवार हैं। भाजपा ने नागेश प्रताप सिंह तो बसपा ने अशोक सिंह को मैदान में उतारा है।
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कुंडा: राजाभैया पर निगाहें
सुखियों में रहने वाले कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह ऊर्फ राजा भैया फिर निर्दल चुनाव लड़ रहे हैं। सन 1993 से ही लगातार विधायकी जीतते आए राजा भैया के गढ़ में उन्हें चुनौती देना भाजपा और बसपा के लिए आसान नहीं है। लगभग हर सरकार में मंत्री रहे राजा भैया के सामने भाजपा से जानकी प्रसाद पांडेय और बसपा से परवेज अख्तर अंसारी ताल ठोक रहे हैं।
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पंकज सिंह
वेस्ट यूपी की नोएडा सीट सबसे ज्यादा हॉट बनी हुई है। उसकी वजह है केंद्रीय गृहमंत्री और मोदी सरकार में नंबर दो माने जाने वाले राजनाथ सिंह के बेटे पंकज सिंह इस सीट से चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा ने मौजूदा विधायक विमला बाथम का टिकट काटकर प्रदेश महामंत्री पंकज सिंह को यहां से टिकट दिया है। उनका मुकाबला सपा के सुनील चौधरी से है जो पंकज को कड़ी टक्कर दे रहे हैं। इस सीट को लेकर भाजपा की बेचनी इसी बात से समझी जा सकती है कि केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा सहित कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों ने पंकज को जीत दिलाने के लिए यहां डेरा डाल रखा है।
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लक्ष्मीकांत बाजपेयी
वेस्ट यूपी के प्रमुख शहर मेरठ सीट पर भाजपा के दिग्गज और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी लगातार आठवीं बार चुनावी मैदान में हैं। यहां से चार बार विधायक रह चुके वाजपेयी इस बार कड़े मुकाबले में हैं। सपा के रफीक अंसारी और बसपा के पंकज जौली उन्हें कड़ी टक्कर दे रहे हैं। पिछले चुनावों में भी ख्य मुकाबला रफीक अंसारी और वाजपेयी के बीच हुआ था, जिसमें वाजपेयी को जीत मिली थी। 2007 के चुनावों में वाजपेयी यहां नजदीकी मुकाबले में हाजी याकूब कुरैशी से हार गए थे ऐसे में इस सीट पर भाजपा खासतौर से नजरे गड़ाए हुए है।
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संगीत सोम
मेरठ जिले की ही सरधना विधानसभा सीट इन चुनावों में हॉट सीट के तौर पर सामने आई है। उसकी वजह है भाजपा के फायर ब्रांड नेता और मौजूदा विधायक संगीत सोम और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के नजदीकी अतुल प्रधान के बीच यहां कड़ी टक्कर चल रही है। मुजफ्फरनगर दंगों में भड़काऊ बयान देकर चर्चा में आए संगीत सोम ने इसके बाद से खुद को लगातार भाजपा के फायर ब्रांड नेता के तौर पर स्थापित किया है तो उनके सामने लड़ रहे अतुल प्रधान की छवि जन नेता की मानी जाती है। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का भी उन्हें वरदहस्त प्राप्त है।
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मथुरा (भाजपा राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत सिंह)
मथुरा जिले को यूं तो रालोद का गढ़ माना जाता है लेकिन बीते लोकसभा चुनावों में मोदी लहर में भाजपा की हेमा मालिनी ने यहां से बड़ी जीत दर्ज की थी। इसके बाद से ही भाजपा इस जिले में अपनी बढ़त बनाने में जुटी है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि मथुरा सदर सीट से भाजपा ने राष्ट्रीय प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा को टिकट दिया है। उनका मुकाबला कांग्रेस के दिग्गज नेता और विधायक दल के प्रमुख प्रदीप माथुर से है। मथुरा का महत्व इसी से समझा जा सकता है कि भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने एक चुनावी रैली के दौरान इस बात की घोषणा कर दी थी कि यहां से ही पार्टी के कई मंत्री और मुख्यमंत्री बनेंगे।
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मृगांका सिंह
शामली जिले की कैराना सीट पर भी इस बार सबकी निगाहें टिकी हैं। कैराना से हिंदुओं के पलायन का मुद्दा उठाकर भाजपा सांसद हुकुम सिंह ने इस सीट को खास बना दिया है। भाजपा ने हुकुम सिंह की बेटी मृगांका सिंह को इस सीट से टिकट देकर इस मुद्दे को और हवा देने का ही काम किया है। यहां से सात बार के विधायक रहे हुकुम सिंह ने बेटी को टिकट दिलाकर अपने साथ साथ इस सीट को भाजपा की प्रतिष्ठा का सवाल बना दिया है। खास बात ये है कि बेटी के सामने उनके ही परिवार के अनिल चौहान मजबूती से ताल ठोक रहे हैं। अनिल ने पिछला चुनाव भाजपा के टिकट पर लड़ा था। सपा ने यहां से मौजूद विधायक नावेद हसन पर ही दूसरी बार विश्वास जताया है।