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साल 2018 के वो चर्चित चेहरे जिन्होंने दुनिया को कहा अलविदा

Sat, 22 Dec 2018 07:23 PM IST
Avdhesh Kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अटल बिहारी वाजपेयी अंतिम यात्रा
अटल बिहारी वाजपेयी

देश के पूर्व प्रधानमंत्री, प्रखर वक्ता, कवि, पत्रकार और करोड़ों लोगों के दिल पर राज करने वाले राजनेता अटल बिहारी वाजपेयी ने 16 अगस्त 2018 को 93 वर्ष की आयु में  इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके बारे में कहा जाता है कि उन्होने खुद को कभी किसी खास विचारधारा के पहरेदार के रूप में स्थापित नहीं होने दिया। अटल बिहारी लंबे समय तक राष्ट्रधर्म, पाञ्चजन्य और वीर अर्जुन आदि पत्र-पत्रिकाओं के सम्पादन में भी लगे रहे।

भारतीय जनसंघ की स्थापना में भी अटल बिहारी वाजपेयी की अहम भूमिका थी। वे 1968 से 1973 तक जनसंघ के अध्यक्ष भी रहे। लेकिन वे आज भी लोगों और अपने प्रशंसकों के जेहन में अमर हैं। अटल बिहारी की जितनी बड़ी शख्सियत है उतना ही साधारण स्वभाव था। यही कारण है कि उनकी अंतिम यात्रा में देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ कई दिग्गज नेता पैदल चल कर गए थे। उन्होंने समावेशी राजनीति को आगे बढ़ाते हुए बखूबी गठबंधन सरकार चलाई थी।
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जमाल खशोगी

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Jamal Khashoggi
जमाल खशोगी सऊदी अरब के चर्चित पत्रकारों में से एक थे। जिनकी मृत्यु इस्तांबुल में स्थित सऊदी अरब के वाणिज्य दूतावास में हुई थी। इनका जन्म 13 अक्टूबर 1958 को सऊदी अरब के धार्मिक शहर मदीना में हुआ था। उन्होंने 1983 में अमेरिका की इंडिआना विश्वविद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी की, जिसके बाद वे पत्रकारिता के क्षेत्र में आ गए।

जमाल खशोगी को 2003 में सऊदी अरब के सबसे चर्चित अखबार अल-वतन का संपादक चुना गया। लेकिन अपने क्रांतिकारी विचारों के चलते वे ज्यादा दिन तक पद पर नहीं टिक सके थे। शायद इसी क्रांतिकारी विचारों ने उनकी मौत को रहस्य बना दिया। लेकिन उनके क्रांतिकारी विचार को सम्मान देते हुए टाइम मैगजीन ने 2018 के पर्सन ऑफ द ईयर के लिए चुना है। 
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जॉर्ज एच डब्लू बुश

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george h w bush
अमेरिका के 41वें राष्ट्रपति जॉर्ज एच डब्लू बुश की मृत्यु 30 नवंबर 2018 को टेक्सस में हो गई थी, उनकी उम्र 94 वर्ष थी। अमेरिका के राष्ट्रपति बनने से पहले उन्होंने चीन में अमेरिकी राजदूत के तौर पर काम किया था। वह 1989 से 1993 तक अमेरिका के राष्ट्रपति रहे।

उससे पहले वह 1981 से 1989 तक अमेरिका के उपराष्ट्रपति भी रहे। बुश के शासन में 1991 में अमेरिका ने गल्फ युद्ध जीता था। इसी वर्ष 17 अप्रैल को उनकी पत्नी बारबरा बुश का भी 92 साल की उम्र में निधन हुआ था। बुश अमेरिका के दूसरे ऐसे जीवित राष्ट्रपति रह चुके थे जिन्होंने अपने बेटे को भी देश का राष्ट्रपति बनते देखा है।

एम करुणानिधि

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M Karunanidhi
एम. करुणानिधि भारत के वरिष्ठतम नेताओं में से एक थे, जिन्होने 7 अगस्त 2018 को शाम 6:10 पर आखरी सांसे लीं। राज्य की डीएमके के संस्थापक सीएन अन्नादुराई की मौत के बाद पार्टी प्रमुख बने। राजनीतिक जीवन में करुणानिधि ने कभी भी हार का मुंह नहीं देखा।

 मात्र 14 वर्ष की आयु में करुणानिधि ने राजनीति में प्रवेश किया और और 5 बार तमिलनाडु के मुख्यमंत्री भी रहे। करुणानिधि तमिल सिनेमा के नाटककार और पटकथा लेखक भी रहे थे। 1957 में हुए चुनाव में वो पहली बार विधायक बने, जिसके बाद करुणानिधि ने राजनीति के क्षेत्र में जमकर पसीना बहाया और 1967 के चुनावों में पार्टी ने बहुमत हासिल किया
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त्रान दाई क्वांग

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tran dai kong
वियतनाम के राष्ट्रपति त्रान दाई क्वांग का 61 वर्ष की उम्र में निधन हो गया था। जब क्वांग के निधन की खबर आई तो पूरा वियतनाम गमगीन हो गया था। वह काफी समय से बीमार चल रहे थे। गौरतलब है कि क्वांग अप्रैल 2016 में राष्ट्रपति के पद पर नियुक्त हुए थे। इससे पहले वो पब्लिक सिक्योरिटी मंत्री थे। 11 सितंबर को इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो के दौरे के वक्त वह आखिरी बार दिखे थे।  उस वक्त देखा जा सकता था कि वो उस समय बीमार दिख रहे थे।
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स्टीफन हॉकिंग

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stifen hokins
स्टीफन हॉकिंग का 14 मार्च 2018 को 76 साल की उम्र में निधन हो गया। उनकी मौत के बाद स्टीफन हॉकिंग के बच्चों लुसी, रॉबर्ट और टिम ने बयान जारी कर कहा था, 'हमें बेहद दुख है कि हमारे प्यारे पिता हमें छोड़कर चले गए। महज 21 वर्ष की उम्र में डॉक्टरों ने उन्हे बता दिया था कि उन्हे  मोटर न्यूरोन नामक लाइलाज बीमारी थी, उन्हे इतनी खतरनाक बीमारी थी लेकिन वो फिर भी एल्बर्ट आइंस्टीन के बाद दुनिया के सबसे महान सैद्धांतिक भौतिकीविद बने।

हैरान कर देने वाली बात यह भी है कि गैलीलियो की मृत्यु के ठीक 300 साल बाद स्टीफन हॉकिंग का जन्म हुआ था। 1988 में उन्हें सबसे ज्यादा चर्चा मिली थी, क्योकि उनकी पहली पुस्तक 'ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम: फ्रॉम द बिग बैंग टु ब्लैक होल्स' मार्केट में आई। घुड़सवारी और नौका चलाने के शौकीन स्टीफन के शरीर का ज्यादातर हिस्सा लकवाग्रस्त हो गया था। वह बोल-सुन नहीं पाते थे और मशीनों की मदद से उन्होंने इतने साल तक विज्ञान को लेकर रिसर्च की।
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माइक्रोसॉफ्ट के सह-संस्थापक पॉल एलन

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paul allen
पॉल एलन अब इस दुनिया में नहीं रहे, उनकी मृत्यु 15 अक्टूबर 2018 को कैंसर के कारण हो गई थी। लेकिन ये वही शख्स थे जिन्होंने बिल गेट्स के साथ मिलकर माइक्रोसॉफ्ट की नींव वर्ष 1975 में रखी थी। माइक्रोसॉफ्ट के लिए 1980 का साल मील का पत्थर साबित हुआ, जब आईबीएम कॉर्प ने पर्सनल कंप्यूटर (पीसी) के क्षेत्र में प्रवेश करने का फैसला लिया। एलन ने समुद्री हेल्थ, बेघर लोगों और अडवांस साइंटिफिक रिसर्च जैसे क्षेत्र में पिछले कुछ दशक के दौरान 2 अरब डॉलर से ज्यादा की सहायता राशि दी है।

माइक्रोसॉफ्ट से अलग होने के बाद वो नई-नई चीजों से जुड़े और कल्याणकारी कामों के साथ तकनीक और उद्यमिता में कदम बढ़ाते रहे। आज हम जिस माइक्रोसॉफ्ट को जानते हैं, उसके बारे में पॉल एलन के बगैर सोचा भी नहीं जा सकता है। दरअसल दुनिया के इस महान ब्रांड को गेट्स और एलन की महान दोस्ती की मिसाल कहा जाना चाहिए। जब ये दोस्ती टूटी तो कभी जुड़ नहीं सकी।

मदन लाल खुराना

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madan lal khurana
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदन लाल खुराना का 27 अक्टूबर 2018 को लंबी बीमारी के चलते निधन हो गया। उन्हे दिल्ली का शेर भी कहा जाता था, यह शेर काफी लंबे समय से सीने में संक्रमण और बुखार से जूझ रहा था। खुराना राजस्थान के राज्यपाल और अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में केंद्र में संसदीय कार्य मंत्री भी रहे थे।

मदनलाल खुराना का जन्म मौजूदा पाकिस्तान के फैसलाबाद में हुआ था और बंटवारे के बाद उनका परिवार दिल्ली के कीर्ति नगर की एक रिफ्यूजी कॉलोनी में आकर बस गया था, उस समय दिल्ली बाहरी इलाको से आकर बसे पंजाबियों और व्यापारियों के प्रभुत्व वाला शहर माना जाता था और यह एक बड़ी वजह रही कि दिल्ली भाजपा में लंबे समय तक मदनलाल खुराना का एकछत्र राज रहा।

कोफी अन्नान

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Kofi Annan
संयुक्त राष्ट्र (यूएन) के पूर्व महासचिव कोफी अन्नान की मृत्यु 18 अगस्त 2018  को हुई। अन्नान का जन्म घाना के कुमासी में आठ अप्रैल 1938 को हुआ था। वह यूएन के स्टाफ से महासचिव बनने वाले पहले व्यक्ति थे, अन्नान जनवरी 1997 में संयुक्त राष्ट्र के 17वें महासचिव बने थे और दिसंबर 2006 तक इस पद पर रहे। कोफी संयुक्त राष्ट्र महासचिव बनने वाले पहले अश्वेत थे। 2001 में उन्हें शांति के नोबेल पुरस्कार से भी सम्मानित किया गया था।
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स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद

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swami sanand
प्रो. जीडी अग्रवाल (स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद) ने गंगा की अविरलता के लिए अपने प्राण त्यागने वाले स्वामी सानंद केवल एक संत ही नहीं थे, प्रो. अग्रवाल का जन्म 1932 में मुजफ्फरनगर के गांव कांधला में हुआ था। उन्होंने आईआईटी रुडक़ी, कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय, बर्कले से सिविल इंजीनियरिंग और पर्यावरण के क्षेत्र में शिक्षा ग्रहण किया था और 17 साल तक आईआईटी कानपुर को अपनी सेवाएं दी थी।

मातृ सदन में आमरण अनशन पर बैठे स्वामी को 10 अक्टूबर को प्रशासन ने जबरन अनशन से उठवाकर ऋषिकेश के एम्स में भर्ती करा दिया था। स्वामी ने मंगलवार को जल भी त्याग दिया था। वह गंगा अधिनियम को लागू कराने की मांग को लेकर 111 दिन से अनशन पर बैठे थे। 
 
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