ये मासूम हैं, अबोध हैं, इन्हें ये भी नहीं पता कि किस जोखिम में हैं, और इनकी खातिर कहीं ज्यादा जोखिम में इनके पिता हैं।
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'सूमो' हो रहे बच्चों के लिए पिता किडनी बेचने को मजबूर, कहानी दिल छू लेगी
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गुजरात के इन बच्चों को 'सूमो किड्स' कहा जा रहा है। नाजुक उम्र में इन मासूमों की कद-काठी ही ऐसी है। बच्चों के पिता पेशे से मजदूर हैं, कुआं-तालाब खोदते हैं, दिनभर खून-पसीना एक करके जो कमाते हैं, बच्चों की खुराक में कम पड़ जाता है, परवरिश की तो बात ही छोड़िए। मजबूरन बच्चों के पिता को कहना पड़ रहा है कि अपनी किडनी बेचकर उनका इलाज कराएंगे।
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तस्वीर योगिता, अनीशा और हर्ष की है। अनीशा अभी चार वर्ष की है और उसका वजन करीब 56 किलो है। उसके भाई-बहन क्रमश: 37 और 20 किलो वजनी हैं। बच्चों के 35 वर्षीय पिता रमेशभाई नंदवाना कहते हैं 'करीब साल भर पहले मीडिया में खबरे आने के कारण गुजरात सरकार पर कुछ दबाव बना और सरकार ने बच्चों का वजन कम करने वाला ऑपरेशन कराया। शुरु में तो वजन कुछ घटा, लेकिन धीर-धीरे बहुत तेजी से बच्चों का वजन बढ़ने लगा। रफ्तार यही रही तो आने वाले वक्त में बच्चे एक इंच भी चल नहीं सकेंगे।'
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नंदवाना के मुताबिक उन्हें हमेशा लगता है कि बच्चों का पेट भरता नहीं है, वे भूखे रहते हैं। उन्हें दिन में पांच दफा खाना चाहिए होता है। घर का हाल ये है रसोईघर में ही पूरा टाइम कटता है। चौकाने वाली बात ये भी है कि इन तीन बच्चों की सात वर्षीय एक बड़ी बहन भी है, जिसका नाम भाविका है, उसका वजन महज 17 किलो है।
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बीते साल गुजरात के मंडाविया चिल्ड्रन्स हॉस्पिटल के बाल चिकित्सक डॉक्टर अक्षय मंडाविया ने बताया था कि बच्चों को अंत: स्रावी रोग या प्रेडर विली सिंड्रोम की शिकायत है, जिससे उनकी ये हालत हुई।
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जानकारों की मानें तो प्रेडर विली सिंड्रोम बहुत दुर्लभ अनुवांशिक कारणों से होता है। इससे ग्रसित लोगों में बार-बार भूख लगना, हमेशा भूख का अहसास होना और तेजी से वजन बढ़ने की शिकायत होती है।