पंजाब पुलिस के डीजीपी रहते हुए आतंकवाद की कमर तोड़ने वाले केपीएस गिल की मौत हो गई। गिल को पंजाब में पाकिस्तान प्रायोजित आतंकवाद पर लगाम लगाने में सफलता मिली थी। पंजाब में वो 'सुपरकॉप' की पहचान रखते थे। जिस समय पंजाब में हिंसा चरम पर थी, उस समय गिल ने आतंकियों का सफाया किया। इस दौरान गिल पर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे। वो पुलिस सेवा के बाद हॉकी में प्रशासनिकल विवादों को लेकर भी चर्चा में रहे। वो अपनी पुलिसिया सेवा के लिए पद्मश्री से भी सम्मानित किए गए थे। आगे पढ़ें 'सुपरकॉप' की जिंदगी के 'सुपर' किस्से...
विज्ञापन
केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया
2 of 9
केपीएस गिल दो बार बनें पंजाब पुलिस के मुखिया
- फोटो : Getty Images
केपीएस गिल पंजाब में दो बाद पुलिसिया महकमे के मुखिया बने। पहली बार उन्हें 1984 में पंजाब की पुलिस का जिम्मा दिया गया। साल 1988 से 1990 तक वो पंजाब पुलिस के डीजीपी रहे। इसके बाद 1991 से 1995(रिटायरमेंट तक) फिर से उन्हें डीजीपी बनाया गया। दोनों ही टर्म में वो काफी विवादित रहे। हालांकि पंजाब पुलिस को पाक प्रायोजित आतंकवाद से निजात दिलाने में उनकी अगुवाई का हर कोई कायल रहा।
विज्ञापन
गिल ने स्वर्ण मंदिर में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' चलाया
3 of 9
गिल ने स्वर्ण मंदिर में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' चलाया
- फोटो : Getty Images
केपीएस गिल ने बोल्ड फैसले लेने में कभी देरी नहीं की। उनकी अगुवाई में साल 1988 पंजाब पुलिस ने 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' के तहत स्वर्ण मंदिर में घुसकर 43 खालिस्तानी आतंकियों को मार गिराया, तो 67 लोगों ने आत्मसमर्पण किया। इस बड़े ऑपरेशन के बाद गिल ने कहा था कि वो सेना जैसी भूल दूसरी बार नहीं करना चाहते थे। इस ऑपरेशन में गुरुद्वारे ज्यादा नुकसान नहीं पहुंचा। वहीं, इसके उलट जब सेना ने ऑपरेशन ब्लू स्टार के तहत स्वर्ण मंदिर पर हमला बोला था, तब काफी नुकसान हुआ था।
केपीएस गिल ने आतंकियों के सफाए नहीं बरती नर्मी
4 of 9
केपीएस गिल ने आतंकियों के सफाए नहीं बरती नर्मी
- फोटो : Getty Images
साल 1991 में जब गिल को दोबारा पंजाब पुलिस का मुखिया बनाया गया, तो सरकार ने आतंकवाद के पूरी तरह से सफाए की जिम्मेदारी उन्हें दी। केपीएस गिल के पंजाब पुलिस के मुखिया के पद पर वापस आने के समय 1991 में करीब 5000 लोगों की मौतें आतंकियों के हमलों हुई, पर 1993 तक ये आंकड़ा महज 500 का रह गया। दरअसल, इसके पीछे गिल की रणनीति थी कि सभी आतंकियों का सिर्फ सफाया हो, उन्हें गिरफ्तार कर जेल में न रखा जाए। उनकी इन्हीं नीतियों की वजह से उनपर मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप लगे, क्योंकि काफी लोग अपने घरों से गायब हो गए थे, तो कई खालिस्तानी आतंकी घरों से उठाए जाने के बाद आसपास मृत अवस्था में मिले थे।
विज्ञापन
गिल ने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए
5 of 9
गिल ने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए
- फोटो : Getty Images
केपीएस गिल ने 24 साल की उम्र में पुलिस सेवा ज्वॉइन की थी। उन्होंने अपने करियर के शुरुआती 28 साल नॉर्थ-ईस्ट में बिताए। उन्होंने असम-मेघालय काडर को चुना था, ताकि वो स्वतंत्रता पूर्वक काम कर सकें। उन्होंने पंजाब इसलिए नहीं चुना, क्योंकि राजनीतिक दबावों के चलते काम करने की आजादी नहीं थी।
विज्ञापन
6 of 9
केपीएस गिल ने असम में रहते हुए एक भी एनकॉउंटर नहीं किए
- फोटो : Getty Images
पंजाब में सैकड़ों खालिस्तानी आतंकियों का सफाया करने वाले केपीएस गिल ने असम में रहते हुए एक भी एनकॉउंटर नहीं किए थे। वहीं, असम के कामरूप जिले में हनक के साथ कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए केपीएस गिल को लोकर 'कामरुप पुलिस सुप्रीटेंडेंट गिल' तक कहा करते थे।
विज्ञापन
नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार भी रहे
7 of 9
नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार भी रहे
- फोटो : PTI
केपीएस गिल को आतंकवाद रोधी अभियान का बेहद जानकार माना जाता रहा। वो भारत सरकार के आतंकवाद निरोधी मामलों के सलाहकार भी रहे। उन्होंने इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट मैनेजमेंट की शुरुआत भी की, और पहले मुखिया भी रहे। केपीएस गिल साल 2002 के गुजरात दंगों के बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के सुरक्षा सलाहकार बने थे।
8 of 9
पंजाब पुलिस की तर्ज पर लिट्टे आतंकियों का सफाया
- फोटो : Getty Images
केपीएस गिल साल 2000 से 2004 तक आतंकवाद के मोर्चे पर श्रीलंकाई सरकार के भी सलाहकार रहे। उनकी सलाह के मुताबिक लिट्टे से निपटने के लिए श्रीलंकाई सुरक्षा बलों ने योजनाएं बनाई। श्रीलंकाई सैनिक उनके रहते पंजाब पुलिस की तर्ज पर लिट्टे आतंकियों का सफाया करते थे।
केपीएस गिल पर हुए कई जानलेवा हमले
- फोटो : Getty Images
केपीएस गिल पर कई जानलेवा हमले हुए हैं। साल 1999 में दिल्ली में रिचपाल सिंह नाम के आतंकी को गिरफ्तार किया गया। वो अफगानी पासपोर्ट पर पाकिस्तान के रास्ते दिल्ली पहुंचा था। उसके पास से 2 किलो आरडीएक्स, 4 डेटोनेटर और लाइव वायर भी मिले थे। गिल को धमाके में उड़ाने की योजना था। बाद में गिल ने कहा कि वो ऐसी चीजों से नहीं डरते। उन्हें मारने की कोशिशें पहले भी हो चुकी हैं।