इलाहाबाद विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार व्याप्त होने तथा तानाशाही रवैया का आरोप लगाते हुए छात्रों ने बुधवार को कुलपति का घेराव किया। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू को 40-50 छात्रों ने दृश्य कला विभाग के बाहर घेर लिया। उनके खिलाफ नारेबाजी की और धक्कामुक्की भी।
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इलाहाबाद विश्वविद्यालय के वीसी पर जानलेवा हमला
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
इस मामले में 16 छात्रों को विश्वविद्यालय से निलंबित कर दिया गया है। कुलपति की शिकायत पर चीफ प्रॉक्टर की ओर से 19 प्रदर्शनकारियों के खिलाफ जानलेवा हमला, बदसलूकी का मुकदमा लिखा गया है। निलंबित होने वालों में एक छात्रसंघ पदाधिकारी भी बताया जा रहा है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वह विरोध प्रदर्शन के दौरान मौजूद नहीं था।
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प्रवेश प्रकोष्ठ के निदेशक पद पर प्रोफेसर बीएन सिंह की नियुक्ति तथा कई अन्य विवादित निर्णयों के विरोध में एबीवीपी के छात्रनेता सनत मिश्रा की अगुवाई में छात्रों ने कुलपति का घेराव किया। कुलपति प्रोफेसर रतनलाल हांगलू वहां एक कार्यक्रम के सिलसिले में पहुंचे थे। कार्यक्रम के बाद उनके निकलने पर छात्रों ने विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया।
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कुलपति ने निकलने की कोशिश की तो उस दौरान छात्रों के साथ उनकी बहस भी हुई। छात्रों ने उन्हें घेर लिया और नारेबाजी की। पुलिस कर्मियों ने छात्रों को बलपूर्वक हटाया और कुलपति को उनकी गाड़ी के पास ले गए, लेकिन छात्र वहां भी उनकी कार के आगे लेट गए। इस घटना को गंभीरता से लेते हुए कुलपति ने इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए।
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चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर एनके शुक्ला ने बताया कि 40-50 लोगों ने कुलपति को घेरकर नारेबाजी, अपशब्दों का प्रयोग एवं जानलेवा हमला किया। सुरक्षा अधिकारी और पुलिस के सहयोग से कुलपति को गाड़ी तक पहुंचाया गया, लेकिन आंदोलनकारियों ने गाड़ी के सामने लेटकर बाधा पहुंचाने की कोशिश की। इस आरोप में अग्रिम जांच तक सूर्य प्रकाश मिश्र, सनत कुमार मिश्र, सौरभ पांडेय, अभिषेक पांडेय, राजन पाल, दुर्गेश शुक्ल, हिमांशु द्विवेदी, श्रीकांत पांडेय, अविनाश सिंह, जितेंद्र शुक्ल, अवतंश मिश्र, दीपू जादव, रजनीश कुमार तिवारी, हिमांशु तिवारी, ज्ञानवेंद्र सिंह, कमलेश कुमार शर्मा को निलंबित कर दिया गया है।
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इन 16 लोगों के साथ तीन अन्य बाहरी युवक अविनाश दुबे, आनंद कुमार सिंह और राहुल चौरसिया के खिलाफ इन आरोपों में मुकदमा लिखाया गया है। ये तीनों युवक विश्वविद्यालय छात्रसंघ का चुनाव भी लड़ चुके हैं। सीओ कर्नलगंज दुर्गा प्रसाद तिवारी ने बताया कि इस घटना में कुलपति पर जानलेवा हमला, मारपीट, अपशब्द कहने और बलवा का केस दर्ज किया गया है।
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इस मामले में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से की गई निलंबन की कार्रवाई से छात्रों का गुस्सा और बढ़ गया है तथा उन्होंने तेज आंदोलन की घोषणा की है। प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप था कि विश्वविद्यालय में भ्रष्टाचार चरम पर है। उनका कहना था कि प्रोफेसर बीएन सिंह पर वित्तीय अनियमितता का आरोप है। इसके बावजूद उन्हें प्रवेश प्रकोष्ठ का निदेशक बना दिया गया।
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छात्रों का यह भी कहना था कि इस वित्तीय अनियमितता की जांच की जिम्मेदारी रिटायर आईएएस श्रीराम यादव को दी गई है। जबकि, उनका बेटा प्रोफेसर बीएन सिंह के निर्देशन में शोध कर रहा है। ऐसे में प्रोफेसर बीएन सिंह की नियुक्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला फैसला है जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। वे कुलपति के ओएसडी की नियुक्ति में भी गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे।
छात्रों का यह भी कहना था कि इस वित्तीय अनियमितता की जांच की जिम्मेदारी रिटायर आईएएस श्रीराम यादव को दी गई है। जबकि, उनका बेटा प्रोफेसर बीएन सिंह के निर्देशन में शोध कर रहा है। ऐसे में प्रोफेसर बीएन सिंह की नियुक्ति भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला फैसला है जिसे तत्काल वापस लिया जाना चाहिए। वे कुलपति के ओएसडी की नियुक्ति में भी गड़बड़ी का आरोप लगा रहे थे।