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President Election: शरद पवार के बाद फारूक अब्दुल्ला भी पीछे हटे, तो क्या विपक्ष से ये होंगे राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार?

Sun, 19 Jun 2022 09:56 AM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

देश के सबसे सर्वोच्च पद यानी राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होना है। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। भाजपा की नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए गठबंधन में हलचल बढ़ गई है। इस बीच विपक्ष के दो संभावित उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के तौर पर अपना नाम अलग कर लिया है। 
 
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राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे सर्वोच्च पद यानी राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को चुनाव होना है। इसके लिए नोटिफिकेशन जारी हो चुका है। भाजपा की नेतृत्व वाले एनडीए और कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए गठबंधन में हलचल बढ़ गई है। इस बीच  विपक्ष के दो संभावित उम्मीदवारों ने राष्ट्रपति पद के प्रत्याशी के तौर पर अपना नाम अलग कर लिया है। 

पहले एनसीपी के प्रमुख शरद पवार और अब नेशनल कॉन्फ्रेंस के मुखिया फारूक अब्दुल्ला ने उम्मीदवार बनने से इंकार कर दिया। ऐसे में सियासी गलियारे में अन्य नामों की चर्चा तेज हो गई है। माना जा रहा है कि इन्हीं में से कोई एक नाम फाइनल हो जाएगा। 
 
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प्रेस वार्ता को संबोधित करतीं ममता बनर्जी - फोटो : अमर उजाला
विपक्ष ने अब तक क्या-क्या किया?
विपक्ष को एकजुट करने के लिए पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी काफी कोशिशें कर रहीं हैं। 15 जून को ही उन्होंने 22 विपक्षी दलों की एक बैठक बुलाई थी। इसमें 17 दलों के नेता शामिल हुए। दिल्ली और पंजाब की सत्ता संभाल रही आम आदमी पार्टी, तेलंगाना की टीआरएस, ओडिशा की बीजेडी, आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस जैसी पार्टियों ने खुद को इस बैठक से अलग रखा। 




इसी बैठक के बाद ममता बनर्जी, शरद पवार और विपक्ष के कई नेताओं ने प्रेस को संबोधित किया था। इसमें शरद पवार ने खुद की उम्मीदवारी को नकारते हुए कहा था कि जल्द ही विपक्ष की तरफ से प्रत्याशी का एलान कर दिया जाएगा। वहीं, ममता बनर्जी ने कहा था कि अगर शरद पवार तैयार हों तो पूरा विपक्ष उन्हें समर्थन देने के लिए तैयार है। उनके मना करने की स्थिति में अन्य नामों पर विचार किया जाएगा। 
 
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जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला - फोटो : ANI
फिर फारूक अब्दुल्ला का नाम सामने आया
शरद पवार के मना करने पर फारूक अब्दुल्ला का नाम चर्चा में आ गया। कहा जाने लगा कि अब्दुल्ला को उम्मीदवार बनाकर मुस्लिम कार्ड के साथ-साथ जम्मू कश्मीर को लेकर भावनात्मक दांव भी खेला जाएगा। लेकिन शनिवार (18 जून) को फारूक अब्दुल्ला ने भी खुद को राष्ट्रपति पद की उम्मीदवारी से अलग कर लिया। 
 
फारूक अब्दुल्ला ने बयान जारी कर कहा, 'मैं भारत के राष्ट्रपति पद के लिए संभावित संयुक्त विपक्षी उम्मीदवार के रूप में अपने नाम के विचार को वापस लेता हूं। मेरा मानना है कि जम्मू-कश्मीर एक महत्वपूर्ण मोड़ से गुजर रहा है और इन अनिश्चित समय में नेविगेट करने में मदद के लिए मेरे प्रयासों की आवश्यकता है।'

आगे उन्होंने कहा, 'मेरे आगे बहुत अधिक सक्रिय राजनीति है। मैं जम्मू-कश्मीर और देश की सेवा में सकारात्मक योगदान देने के लिए तत्पर हूं। मेरा नाम प्रस्तावित करने के लिए मैं ममता दीदी का आभारी हूं। मैं उन सभी वरिष्ठ नेताओं का आभारी हूं जिन्होंने मुझे अपना समर्थन दिया।'
 

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राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
फारूक और शरद पवार ने क्यों इंकार किया?
यूं तो इसके कई कारण हैं, लेकिन सबसे बड़ा कारण ये है कि विपक्ष अभी भी एकजुट नहीं है। बगैर एकजुट हुए विपक्ष राष्ट्रपति का ये चुनाव नहीं जीत सकता है। ऐसे में शरद पवार और फारूक अब्दुल्ला कोई रिस्क नहीं लेना चाहते हैं। भले ही दोनों सत्ताधारी भाजपा के धुर राजनीतिक विरोधी हैं, लेकिन दोनों के रिश्ते भाजपा में काफी अच्छे हैं। खासतौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों का सम्मान करते हैं।  
 
खबर ये भी सामने आ रही है कि विपक्ष के कुछ दलों ने फारूक अब्दुल्ला के नाम पर असहमति भी जताई है। इन दलों का मानना है कि अगर वह फारूक अब्दुल्ला का समर्थन करते हैं तो 2024 लोकसभा चुनाव में भाजपा इसका फायदा उठा सकती है। ऐसा इसलिए क्योंकि फारूक अब्दुल्ला कई बार विवादित बयान दे चुके हैं। आगे जानिए अब किन नामों पर विचार कर रहा विपक्ष? 

 
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गोपाल कृष्ण गांधी - फोटो : अमर उजाला
गोपाल कृष्ण गांधी : शरद पवार और फारूक अब्दुल्ला के मना करने के बाद विपक्ष की तरफ से राष्ट्रपति पद के उम्मीदवार के लिए गोपाल कृष्ण गांधी का नाम सबसे आगे चल रहा है। गोपाल कृष्ण राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के पोते हैं। वे पश्चिम बंगाल के गवर्नर और आईएएस अधिकारी रह चुके हैं। एक न्यूज चैनल से बात करते हुए, गोपालकृष्ण गांधी ने कहा, 'मुझसे पूछा गया है कि अगर मेरे नाम पर आम सहमति बनती है तो क्या मैं ऐसे उम्मीदवार होने पर विचार करूंगा। मैंने कहा है कि मुझे इस महत्वपूर्ण सुझाव के बारे में सोचने के लिए कुछ समय चाहिए।' 
 
गांधी 2019 में भी विपक्ष की तरफ से संयुक्त तौर पर उपराष्ट्रपति के उम्मीदवार थे। हालांकि, वह एनडीए के वैंकैया नायडू से चुनाव हार गए थे। 
 
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मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव - फोटो : अमर उजाला
मुलायम सिंह यादव : गोपाल कृष्ण गांधी के अलावा मुलायम सिंह यादव के नाम की भी काफी चर्चा है। कहा जा रहा है कि ममता बनर्जी ने मुलायम के नाम का भी सुझाव दिया है। कई पार्टियां इसके लिए सहमत भी हैं। हालांकि, मुलायम की तबियत इन दिनों खराब रहती है। ऐसे में विपक्ष के कई नेता मुलायम से संपर्क करने के बाद ही आगे कोई चर्चा करना चाहते हैं। 
 
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यशवंत सिन्हा - फोटो : अमर उजाला
यशवंत सिन्हा : एक समय भाजपा के दिग्गज नेताओं में शुमार रहे यशवंत सिन्हा आजकल तृणमूल कांग्रेस के लिए राजनीतिक बैटिंग कर रहे हैं। यशवंत सिन्हा के नाम पर भी विपक्ष विचार कर रहा है। 
 

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एनके रामचंद्रन - फोटो : अमर उजाला
एनके प्रेमचंद्रन : केरल से सांसद एनके प्रेमचंद्रन के नाम पर भी पिछली बैठक में चर्चा हुई थी। प्रेमचंद्रन केरल सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं। प्रेमचंद्रन का नाम आगे करने की वजह दक्षिण भारत के राजनीतिक दलों का सपोर्ट हासिल करना है। ऐसा इसलिए क्योंकि ममता की बुलाई बैठक से आंध्र प्रदेश की वाईएसआर कांग्रेस, तेलंगाना की टीआरएस और ओडिशा की बीजेडी ने खुद को अलग कर लिया है। इनमें से कोई भी एक दल अगर एनडीए उम्मीदवार को सपोर्ट करता है तो विपक्ष की राह बहुत मुश्किल हो जाएगी। उत्तर भारत के ज्यादातर विपक्षी दल ममता के साथ हैं। ऐसे में एनके प्रेमचंद्रन का नाम आगे कर ममता दक्षिण के राजनीतिक दलों का समर्थन चाहती हैं। 
 

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ममता बनर्जी और शरद पवार - फोटो : अमर उजाला
ऐसा भी हो सकता है : इन नामों के अलावा विपक्ष के नेताओं ने देश के बड़े अर्थशास्त्रियों, शिक्षाविदों, वैज्ञानिकों, पूर्व राजनयिकों की एक सूची भी तैयार की है। कहा जा रहा है कि 21 जून को होने वाली विपक्ष की अगली बैठक में इन नामों पर भी चर्चा होगी।  
 

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राष्ट्रपति चुनाव का पूरा गणित। - फोटो : Amar Ujala
चुनाव का ये है पूरा कार्यक्रम
राष्ट्रपति पद के लिए होने वाले चुनाव के लिए अधिसूचना 15 जून को जारी हो चुकी है। नामांकन की आखिरी तारीख 29 जून है। नामांकन पत्रों की जांच 30 जून तक होगी। उम्मीदवार अपना नामांकन दो जुलाई तक वापस ले सकेंगे। राष्ट्रपति का चुनाव 18 जुलाई को होगा, जिसके नतीजे 21 जुलाई को आएंगे। 25 जुलाई को नए राष्ट्रपति का पदभार ग्रहण समारोह होगा। 
 

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जेपी नड्डा, गृह मंत्री अमित शाह और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी - फोटो : ट्विटर
क्या कहते हैं एनडीए के आंकड़े?
लोकसभा, राज्यसभा और विधानसभा की संख्या के मुताबिक, सत्तारूढ़ भाजपा की अगुआई वाले एनडीए के पास मौजूदा समय में करीब पांच लाख 26 हजार वोट हैं। इनमें दो लाख 17 हजार अलग-अलग विधानसभा और तीन लाख नौ हजार सांसदों के वोट हैं। एनडीए में भाजपा के साथ जेडीयू, एआईएडीएमके, अपना दल (सोनेलाल), एलजेपी, एनपीपी, निषाद पार्टी, एनपीएफ, एमएनएफ, एआईएनआर कांग्रेस जैसे 20 छोटे दल शामिल हैं।
 
मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से एनडीए को अपने राष्ट्रपति उम्मीदवार को जीत दिलाने के लिए और 13 हजार वोटों की जरूरत पड़ेगी। 2017 में जब एनडीए ने रामनाथ कोविंद को उम्मीदवार बनाया था, तब आंध्र प्रदेश के वाईएसआर कांग्रेस और ओडिशा की बीजद ने भी समर्थन दिया था। इसके अलावा एनडीए में न होते हुए भी जदयू ने समर्थन दिया था। वहीं, पिछली बार एनडीए का हिस्सा रही शिवसेना और अकाली दल अब अलग हो चुके हैं। 

बीजद के पास 31 हजार से ज्यादा वैल्यू वाले वोट हैं और वाईएसआरसीपी के पास 43,000 से ज्यादा वैल्यू वाले वोट हैं। इनमें से किसी एक के समर्थन से भी एनडीए आसानी से जीत हासिल कर सकती है।
 

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राष्ट्रपति चुनाव - फोटो : अमर उजाला
राष्ट्रपति चुनाव में कुल कितने मतदाता? 
राष्ट्रपति चुनाव में लोकसभा, राज्यसभा और राज्यों के विधानसभा के सदस्य वोट डालते हैं। 245 सदस्यों वाली राज्यसभा में से 233 सांसद ही वोट डाल सकते हैं, लेकिन कश्मीर में विधानसभा भंग है। यहां चार राज्यसभा सीटें खाली हैं। ऐसे में 229 राज्यसभा सांसद ही राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाल सकेंगे। 
 
राष्ट्रपति की ओर से मानित 12 सांसदों को भी इस चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है। दूसरी ओर, लोकसभा के सभी 543 सदस्य वोटिंग में हिस्सा लेंगे। इनमें आजमगढ़, रामपुर और संगरूर में हो रहे उपचुनाव में जीतने वाले सांसद भी शामिल होंगे। इसके अलावा सभी राज्यों के कुल 4033 विधायक भी राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोट डालेंगे। इस तरह से राष्ट्रपति चुनाव में कुल मतदाताओं की संख्या 4809 होगी। हालांकि, इनके वोटों की वैल्यू अलग-अलग होगी। इन मतदाताओं के वोटों की कुल कीमत 10 लाख 79 हजार 206 होगी।
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