आज भारतीय सेना और देश पर गर्व करने का दिन है। 18 साल पहले आज के दिन 26 जुलाई 1999 को भारतीय सेना ने कारगिल में तिरंगा लहराया था। तब से हर साल इस दिन को कारगिल विजय दिवस के तौर पर मनाया जाता है। साल 1999 में भारत की जीत सुनिश्चित करने के लिए ऑपरेशन विजय के नाम से मिशन चलाया गया था। इस मिशन में सेना के 530 जवान शहीद और करीब 1363 जवान घायल हो गए थे। उस समय केंद्र में अटल बिहारी बाजपेई की सरकार थी। यह युद्ध 2 महीने तक चला था।
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LoC में घुसे बिना भारतीय सैनिकों ने दुश्मनों को मार भगाया था। इस लड़ाई में पाकिस्तान के करीब 3 हजार जवान मारे गए थे। लेकिन आधिकारिक तौर पर पाकिस्तान यही मानता है कि उसके करीब 357 जवान मारे गए। भारतीय वायु सेना के हमलों ने पाकिस्तानी सैनिकों के हौसले पस्त कर दिये थे।
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वायुसेना के लड़ाकू विमान मिराज,मिग 21 और 27 ने दुश्मनों को बैक फुट पर ला दिया है। युद्ध के दौरान एक दिलचस्प वाकया भी हुआ था। भारत के तत्कालीन पीएम अटल बिहारी बाजपेई ने पाक पीएम नवाज शरीफ को फोन किया था और उनकी बात भारत के अभिनेता दिलीप कुमार से करवाई थी।
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26 जुलाई 1999 को देश के जवानों ने कारगिल में घुसपैठ करने वाले पाकिस्तानी सैनिकों को मुंहतोड़ जवाब देते हुए सीमा पार खदेड़कर कारगिल की कई चोटियों पर तिरंगा फहरा दिया था। पाकिस्तान की नापाक मंशा को नाकाम करने के लिए करीब दो लाख सैनिकों ने देश की सीमा पर डेरा डाल दिया था।
कारगिल एक ऐसा दुर्गम युद्धक्षेत्र जहां भारतीय वीरों ने वर्ष 1999 में अपनी जान की बाजी लगाकर पाकिस्तानी घुसपैठियों को खदेड़ा था। शरीर गलाने वाली बर्फ के बीच रणबांकुरों के शौर्य के सामने पाकिस्तानी घुसपैठिये टिक नहीं पाए। कारगिल युद्ध की कई कहानियां हैं। जिन्हें कई बार पढ़ा या सुनाया जाता है, लेकिन कई कहानियां आज भी हैं, जिन्हें लोग नहीं जानते।