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नीरव मोदी: तीन साल पहले आज ही के दिन हीरा कारोबारी से बना था भगोड़ा, ट्रंप से कराया था जूलरी स्टोर का उद्घाटन

Sat, 27 Feb 2021 10:46 AM IST
स्नेहा बलूनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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नीरव मोदी (फाइल फोटो) - फोटो : File
तीन साल पहले इसी समय पंजाब नेशनल बैंक को हजारों करोड़ रुपये का चूना लगाने वाला नीरव मोदी भारतीय मीडिया के साथ-साथ वैश्विक मीडिया में छाया हुआ था। उसे आखिरी बार सार्वजनिक रूप से जनवरी 2018 के आखिरी हफ्ते में स्विट्जरलैंड के दावोस में हुई विश्व आर्थिक मंच की बैठक में देखा गया था। 29 फरवरी को भारत में नीरव और उसके सहयोगियों के खिलाफ पीएनबी ने एफआईआर दर्ज करवाई थी लेकिन नीरव गायब हो गया। इसके बाद उसका परिवार भी भारत से गायब हो गया। नीरव को पहले ही शिकायत और एफआईआर की भनक लग गई थी। पीएनबी के 14 हजार 500 करोड़ रुपए की भारत की सबसे बड़ी बैंक धोखाधड़ी करने वाला नीरव रातों-रात हीरा ब्रांड से भगोड़ा बन गया। भारत की जांच एजेंसियों समेत कनाडा की जांच एजेंसी, इंटरपोल और अमेरिका की एफबीआई भी विभिन्न मामलों में नीरव पर मुकदमा चलाना चाहती हैं। अब तीन साल बाद ब्रिटिश कोर्ट के आदेश के बाद नीरव को भारत लाए जाने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। पढ़िए कैसे एक हीरा कारोबारी ब्रांड से घोटालेबाज बन गया।

क्या है पीएनबी घोटाला
पीएनबी घोटाले को भारत के बैंकिंग इतिहास में सबसे बड़ी धोखाधड़ी करार दिया गया है। इस घोटाले में मुंबई के फोर्ट में स्थित पीएनबी की ब्रैडी हाउस शाखा में बैंकरों ने फर्जी लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग्स (एलओयू) का इस्तेमाल किया। एक वर्ष की अवधि के लिए मोती के आयात के लिए भारतीय बैंकों की शाखाओं में इन एलओयू का उपयोग किया गया, जबकि इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देश शिपमेंट की तारीख से 90 दिनों की कुल समयावधि निर्धारित करते हैं। रिजर्व बैंक के इस दिशानिर्देश को भारतीय बैंकों की विदेशी शाखाओं ने नजरअंदाज कर दिया। उन्होंने पीएनबी के साथ किसी भी दस्तावेज या जानकारी को साझा नहीं किया, जो कंपनियों को बैंक से क्रेडिट प्राप्त करते समय उपलब्ध करवाना चाहिए था। नीरव मोदी ने 10 मार्च, 2011 को पीएनबी से अपनी पहली धोखाधड़ी की गारंटी ली और अगले 74 महीनों में 1,212 से अधिक की गारंटी प्राप्त की।

पिता-दादा सब हीरा कारोबारी, मामा चोकसी के साथ कारोबार शुरू किया
नीरव की परवरिश बेल्जियम में हुई। दादा केशवलाल सूरत में हीरों का कारोबार करते थे। पिता दीपक भी कुछ समय सूरत में रहे, फिर 1960 में बेल्जियम चले गए। बेल्जियम के एंटवर्प से दीपक अनकट हीरे लाकर भारत में बेचते। नीरव ने 1989 में व्हार्टन स्कूल में प्रवेश लिया, लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति के कारण पढ़ाई छोड़नी पड़ी। 1990 में 19 साल की उम्र में मुंबई में मामा मेहुल चोकसी के साथ हीरे का काम शुरू किया। एक इंटरव्यू में नीरव ने बताया था कि उसे यहां 12 घंटे के काम के एवज में महज 3500 रुपये मिलते थे।

ट्रंप से कराया उद्घाटन, ऑस्कर समारोह में केट ने इनकी जूलरी पहनीं थी
कई मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2015 में न्यूयॉर्क के मेडिसन एवेन्यू पर जूलरी स्टोर के उद्घाटन के मौके पर ट्रंप समेत कई हॉलीवुड सेलिब्रिटी मौजूदी थीं। नीरव के बारे में कहा जाता है कि सेलिब्रिटी की चकाचौंध के कारण लोग उसके झांसे में आ जाते थे। फरवरी 2016 में ऑस्कर समारोह में नीरव मोदी ब्रैंड के 100 कैरेट के सफेद हीरे पहने हुए केट विंसलेट रेड कारपेट पर चली थीं। नीरव ने गोलकुंडा की खान से निकले 12 कैरेट के हीरे से लोटस हार बनाया था। हांगकांग में नीलामी के दौरान यह हीरा 16 करोड़ रुपये में बिका था।

मंदी में व्यापार बढ़ाया, हीरे की कटिंग से डिजाइनिंग पर ध्यान दिया
नीरव ने फायर स्टार कंपनी के जरिए तराशे गए हीरों को विदेश में बेचना शुरू किया। लेकिन उसने देखा कि तराशे गए हीरों से बाद में आभूषण बनवाने में हीरों का नुकसान होता है। इसलिए उसने आभूषण की मांग और जरूरत के हिसाब से हीरे सप्लाई करना शुरू कर दिया। 2008 की मंदी में नीरव की किस्मत पलटी, जब उसने मंदी का फायदा उठाकर बेशकीमती हीरे खरीदे। इसी साल अपनी एक मित्र की मांग पर नीरव ने रूस से हीरा तलाशकर खुद ही ईयर रिंग डिजाइन की। इसके बाद नीरव ने जूलरी डिजाइन की दिशा में बिजनेस शुरू कर दिया।
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20 साल में ब्रांड से बना भगोड़ा

  • 1999 में फायर स्टार नाम से हीरा कारोबार शुरू किया।
  • 2010 में ‘नीरव मोदी ब्रैंड’ नाम से डायमंड जूलरी का कारोबार शुरू किया।
  • 2014 में दिल्ली, 2015 में मुंबई में फ्लैगशिप स्टोर खोला, न्यूयार्क, हांगकांग में बुटिक खोले।
  • 2018 जनवरी में दुबई, वहां से स्विट्जरलैंड चला गया।
  • 2018 जनवरी 29 को नीरव, मेहुल चौकसी और सहयोगियों पर पीएनबी ने धोखाधड़ी की एफआईआर दर्ज कराई।
  • 2018 फरवरी 16 को ईडी ने नीरव के घर, दफ्तर से 5600 करोड़ रुपए की जूलरी जब्त की।
  • 2019 मार्च 9 को अखबार द टेलीग्राफ ने लंदन में नीरव की मौजूदगी की पुष्टि की।

प्रत्यर्पण के ये बड़े मामले भी फिलहाल पेंडिंग
मेहुल चौकसीः एंटीगुआ की नागरिकता ले ली
नीरव मोदी का रिश्तेदार और पीएनबी घोटाले में सहआरोपी मेहुल चौकसी भी देश छोड़कर जा चुका है। उसने एंटीगुआ की नागरिकता ले ली है। भारत सरकार ने एंटीगुआ से चोकसी के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया तेज करने की अपील की है।
ललित मोदीः प्रत्यर्पण की अर्जी ब्रिटेन में पेंडिंग
आईपीएल के पूर्व कमिश्नर और मनी लॉंड्रिंग में आरोपी ललित मोदी भी ब्रिटेन में है। आईपीएल की शुरुआत करने वाले मोदी पर आईपीएल 2010 में भ्रष्टाचार के आरोप हैं। तब से वह ब्रिटेन में है। सरकार उसके प्रत्यर्पण की कोशिश में है।
नदीम सैफीः प्रत्यर्पण के लिए ब्रिटेन राजी नहीं हुआ
गुलशन कुमार हत्याकांड में आरोपी संगीतकार नदीम सैफी 1997 से ब्रिटेन में है। भारत सरकार की कई कोशिशों के बावजूद ब्रिटेन ने प्रत्यर्पण की मंजूरी नहीं दी। हालांकि 2002 में कोर्ट ने उसे बरी कर दिया।
जाकिर नाइकः पहले मलेशिया, अब यूएई में
इस्लामी उपदेशक जाकिर नाइक पर मनी लॉन्ड्रिंग और धार्मिक भावनाएं भड़काने के आरोप हैं। वह पहले मलेशिया फिर यूएई चला गया। ढाका में आतंकी हमले के संदिग्धों ने नाइक से प्रभावित होने की बात कही थी।
विजय माल्याः प्रत्यर्पण रुकवाने के लिए ब्रिटेन की अदालतों में 3 बार अर्जी दी, हर बार खारिज
भारत ने 9 फरवरी 2017 को ब्रिटेन से माल्या के प्रत्यर्पण की अर्जी दी थी। माल्या ने भारत में जेलों की खराब स्थिति, जान को खतरा होने का हवाला देते हुए स्थानीय कोर्ट में प्रत्यर्पण रोकने की अर्जी दी। कोर्ट ने इसे खारिज करते हुए विदेश सचिव को भेज दिया, तो उन्होंने प्रत्यर्पण की मंजूरी दे दी। माल्या ने इसे हाईकोर्ट में चुनौती दी, लेकिन 20 अप्रैल 2020 को अर्जी खारिज हो गई। इसके बाद 14 मई 2020 को सुप्रीम कोर्ट ने भी माल्या की अर्जी खारिज कर दी। अब सिर्फ यूरोपीय मानवाधिकार कोर्ट ही विशेषज्ञ स्थिति में प्रत्यर्पण रोक सकती है।
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ब्रिटेन से संधि के बाद पहले प्रत्यर्पण में 24 साल लगे

ब्रिटेन और भारत के बीच 1992 में प्रत्यर्पण संधि हुई थी, लेकिन पहले आरोपी को भारत लाने में 24 साल लग गए। मर्डर के आरोपी समीरभाई वीनूभाई पटेल को 19 अक्टूबर 2016 को प्रत्यर्पण कर लाया गया था। वहीं दूसरे आरोपी संजीव कुमार चावला को साल भर पहले फरवरी 2020 में ब्रिटेन से भारत लाया गया। बुकी संजीव को मैच फिक्सिंग मामले में गिरफ्तार किया गया था। यानी ब्रिटेन से 28 साल में सिर्फ दो आरोपियों को लाने में ही कामयाबी मिली है।

इन प्रमुख देशों के साथ है प्रत्यर्पण संधि
अफगानिस्तान, ऑस्ट्रेलिया, अजरबैजान, बहरीन, बांग्लादेश, बेलारूस, बेल्जियम, भूटान, ब्राजील, बुल्गारिया, कनाडा, चिली, मिस्र, फ्रांस, जर्मनी, हांगकांग, इंडोनेशिया, ईरान, इस्रायल, कुवैत, लिथुआनिया, मलयेशिया, मॉरीशस, मैक्सिको, मंगोलिया, नेपाल, नीदरलैंड्स, ओमान, फिलीपींस, पोलैंड, पुर्तगाल, रूस, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया, स्पेन, स्विट्जरलैंड, ताजिकिस्तान, थाइलैंड, ट्यूनीशिया, तुर्की, यूएई, ब्रिटेन, यूक्रेन, अमेरिका, उज्बेकिस्तान और वियतनाम।
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