केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की राज्यसभा सदस्यता सात जुलाई को खत्म हो रही है। नियम के मुताबिक किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी मुख्तार अब्बास अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। अगर छह महीने के अंदर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं बनते तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी की राज्यसभा सदस्यता सात जुलाई को खत्म हो रही है। नियम के मुताबिक किसी भी सदन का सदस्य नहीं होने के बाद भी मुख्तार अब्बास अगले छह महीने तक मंत्री बने रह सकते हैं। अगर छह महीने के अंदर लोकसभा या राज्यसभा का सदस्य नहीं बनते तो उन्हें इस्तीफा देना पड़ेगा।
भाजपा ने मुख्तार अब्बास को राज्यसभा के लिए टिकट नहीं दिया। शनिवार को रामपुर और आजमगढ़ लोकसभा उपचुनाव के लिए भी प्रत्याशी का भी एलान कर दिया। पहले चर्चा थी कि मुख्तार को रामपुर से लोकसभा का उपचुनाव लड़ाया जाएगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। भाजपा ने मुख्तार अब्बास नकवी को रामपुर उपचुनाव के लिए भी टिकट नहीं दिया।
ऐसे में अब सियासी गलियारे में काफी चर्चा शुरू हो गई हैं। सियासी जानकारों का मानना है कि मुख्तार अब्बास को बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है। आइए जानते हैं मुख्तार अब्बास के लिए क्या-क्या रास्ते हैं?
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केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
पहले मुख्तार को जान लीजिए
मुख्तार अब्बास नकवी का जन्म 15 अक्टूबर 1957 को प्रयागराज (तब इलाहाबाद) में हुआ था। नकवी के पिता का नाम एएच नकवी और मां शकीना बेगम हैं। मुख्तार ने पत्रकारिता की पढ़ाई की है। उन्होंने आठ जून 1983 को सीमा से शादी की। अब दोनों का एक बेटा भी है।
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मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
कब शुरू हुआ राजनीतिक सफर
मुख्तार अब्बास नकवी के राजनीतिक सफर की शुरुआत 1975 से हुई थी। तब उन्होंने देश में लागू किए गए आपातकाल का विरोध किया था और इसके लिए जेल भी गए थे। छात्रनेता रहते हुए वह जनता पार्टी के कार्यक्रमों और आंदोलनों में शामिल होते थे। 1980 में उन्होंने जनता पार्टी (सेक्यूलर) के टिकट पर विधानसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन हार गए थे। इसके बाद अयोध्या से 1980 में उन्होंने लोकसभा का चुनाव निर्दलीय लड़ा, लेकिन हार गए।
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मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
जब पहली बार चुनाव जीते
1998 में रामपुर से भारतीय जनता पार्टी ने मुख्तार अब्बास नकवी को टिकट दिया और वह चुनाव जीत गए। तब उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया था। 2014 में जब मोदी सरकार सत्ता में आई तो मुख्तार अब्बास नकवी को अल्पसंख्यक राज्यमंत्री बनाया गया था, 2016 में कैबिनेट का दर्जा मिल गया। 2019 में फिर से जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सत्ता संभाली तो मुख्तार अब्बास नकवी को फिर से केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
मुख्तार का अब आगे क्या होगा?
भाजपा में चार बड़े मुस्लिम नेता हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, सैय्यद शहनवाज हुसैन, एमजे अकबर, जफर इस्लाम शामिल हैं। शहनवाज इस वक्त बिहार सरकार में मंत्री हैं। मुख्तार अब्बास नकवी केंद्रीय मंत्री हैं और एमजे अकबर और जफर इस्लाम राज्यसभा के सांसद। मुख्तार अब्बास नकवी के साथ-साथ एमजे अकबर और जफर इस्लाम का राज्यसभा कार्यकाल पूरा हो रहा है। तीनों को भाजपा ने दोबारा प्रत्याशी नहीं बनाया है। ऐसे में मुख्तार अब्बास को लेकर तीन तरह के कयास लग रहे हैं…
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मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
1. मनोनीत सांसद बनने का विकल्प
राज्यसभा में 12 मनोनीत सांसद भी होते हैं। इन्हें राष्ट्रपति द्वारा नामित किया जाता है। इस वक्त पांच मनोनीत सदस्य हैं, जबकि सात सीटें खाली हैं। ऐसे में यह संभव है कि भाजपा मुख्तार को राष्ट्रपति की ओर से नामित कराकर फिर से राज्यसभा भेज दे और मौजूदा जिम्मेदारी को कायम रखा जाए।
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संगठल के नेताओं के साथ मुख्तार अब्बास नकवी
- फोटो : अमर उजाला
2. संगठन में मिल सकती है जिम्मेदारी
इस साल गुजरात और हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव होने हैं। 2024 में लोकसभा चुनाव भी है। ऐसे में मुख्तार अब्बास नकवी को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इससे पहले भी कई वरिष्ठ मंत्रियों को मोदी कैबिनेट से हटाकर संगठन में जिम्मेदारियां दी गई हैं। संगठन में मुख्तार को बड़ी भूमिका में लाया जा सकता है।
3. संवैधानिक पद मिलने की भी अटकलें
जुलाई में राष्ट्रपति और उप-राष्ट्रपति का चुनाव होना है। सियासी गलियारे में यह भी चर्चा है कि मुख्तार अब्बास नकवी को भाजपा उपराष्ट्रपति चुनाव में उतार सकती है। आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों के राज्यपालों का कार्यकाल खत्म हो रहा है। ऐसे में इस बात की भी संभावना जताई जा रही है कि मुख्तार अब्बास नकवी को किसी राज्य का राज्यपाल बनाया जा सकता है।