गांव में चक रोड नहीं है। घर के आगे से निकलने को रास्ता तक नहीं मिलता। मेरे घर के गेट के सामने जमीन पर कब्जा कर लिया गया। अधिकारी सुनते नहीं, पुलिस कार्रवाई नहीं करती। आखिर हमें हक नहीं मिलेगा तो क्या करेंगे।
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मथुराः जवाहर बाग के घायलों ने बयां किया दर्द, सरकार ने हक नहीं दिया, तो हम बागी बन गए
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बड़ों से लेकर बच्चों तक के पास काम नहीं है। गन्ना मिल में काम करने का दस साल बाद भी पैसा नहीं मिला। मेरे लिए तो यह आंदोलन ही एकमात्र विकल्प है। इसलिए सिस्टम से बगावत की।
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मथुराः जवाहर बाग के घायलों ने बयां किया दर्द, सरकार ने हक नहीं दिया, तो हम बागी बन गए
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यह दर्द है जवाहर बाग में घायल हुए कई लोगों में से एक कुशीनगर निवासी 68 वर्षीय दयाशंकर का है। मथुरा के जवाहर बाग में दयाशंकर भी गंभीर घायल हुआ है। उसे एसएन इमरजेंसी में भर्ती कराया गया है।
मथुराः जवाहर बाग के घायलों ने बयां किया दर्द, सरकार ने हक नहीं दिया, तो हम बागी बन गए
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बताया कि मेरे गांव में कई सारी समस्याएं हैं। उन्हें दूर करने की जिम्मेदारी अधिकारियों की होती है। मगर, कोई सुनता नहीं है। जब गांव में कुछ नहीं है तो आंदोलन ही एकमात्र सहारा है। अधिकारी जनता का काम करने के लिए हैं। वह सही काम करेंगे तो हमें आंदोलन की क्या जरूरत पड़ेगी। हमें न्याय दो।
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मथुराः जवाहर बाग के घायलों ने बयां किया दर्द, सरकार ने हक नहीं दिया, तो हम बागी बन गए
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mathura
- फोटो : amar ujala
मथुरा के जवाहर बाग में कब्जाधारियों ने पुलिस पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं थीं। इसमें एसपी सिटी और एसओ शहीद हुए। कई पुलिस कर्मी गोली लगने से घायल हो गए। आगजनी की घटना हुई। कई राउंड फायरिंग की गई।
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हमें नहीं पता, आखिर कहां से आए तमंचे और कारतूस
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मथुरा के जवाहर बाग में की घटना में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सत्याग्रहियों के पास बड़ी संख्या में तमंचे, रायफल और कारतूस कहां से आए? गोलियां चलाने वाले कौन लोग थे?
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हमें नहीं पता, आखिर कहां से आए तमंचे और कारतूस
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- फोटो : amar ujala
एसएन मेडिकल कालेज की इमरजेंसी में भर्ती घायल भी इसका जवाब नहीं दे पा रहे हैं। एक घायल ने बताया कि वह तो दीवार के सहारे खड़ा हुआ था। तभी गोलियां चलने लगीं। कुछ ही देर में भगदड़ मच गई। उन्हें समझ नहीं आया कि गोलियां कौन चला रहा है। चीखपुकार मचने लगी। आंदोलन में ज्यादातर लोग 60 से ज्यादा की उम्र के हैं। वह कोई हथियार नहीं चला सकते हैं।
घायल बुद्धीराम ने बताया कि गोली लगने से उसका भतीजा महेश गिर पड़ा। उसने उसे उठाने का प्रयास किया, लेकिन तब भगदड़ के बीच वह उसे उठा नहीं सका। उसकी आंखों के सामने महेश की मौत हो गई। अब उसकी लाश का भी पता नहीं है।