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तिंरगे में लिपटे शहीद पिता के ताबूत पर बैठ गई पांच महीने की मासूम, कलेक्टर ने लिखा भावुक खत

Tue, 17 Jul 2018 12:42 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, झालावाड़
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बीते शनिवार को जम्मू और कश्मीर के श्रीनगर के कुपवाड़ा के जंगलों में छिपे आतंकियों की तलाश में सुरक्षाबलों की ओर से शुरू किए गए सर्च ऑपरेशन में आतंकियों के साथ मुठभेड़ के दौरान भारतीय सेना के पैराट्रूपर मुकुट बिहारी मीणा शहीद हो गए थे। जब उनका पार्थिव शरीर राजस्थान के उनके पैतृक गांव झालावाड़ के खानपुर पहुंचा तो वहां एक भावुक कर देने वाला दृश्य देखकर सभी लोगों का दिल पसीज गया।
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तिरंगे में लिपटे शहीद के शरीर को जब उनकी पांच महीने की बेटी आरू के हाथों से छुआने की कोशिश की गई तो वह ताबूत के ऊपर ही बैठ गई और कुछ समय बाद उसके ऊपर लेट गई। इसे देखकर वहां मौजूद लोग काफी गमगीन हो गए और कुछ लोगों के बच्ची की इस मासूमियत पर आंसू छलक आए। शहीद का पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया।
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इस मार्मिक दृश्य को देखकर जिले के कलेक्टर जितेंद्र सोनी ने शहीद की बेटी के लिए भावुक कर देने वाला खत लिखते हुए कहा है कि देश के लिए कुर्बान होने का मौका हर किसी को नहीं मिलता। साथ ही उसे अपने पिता की शहादत को बड़े होकर अपना नूर और गुरूर बनाने की हिदायत दी है।

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कलेक्टर
कलेक्टर ने कहा- प्रिय आरू जब तुम बड़ी हो जाओगी, समझोगी और खुदज को अभिव्यक्त कर पाओगी तो जानोगी कि तुम्हारे जन्मदाता झालावाड़ की खानपुर की तहसील के लगभग सौ घरों की आबादी वाले छोटे से गांव लडानिया के सपूत पैराट्रूपर शहीद स्वर्गीय मुकुट बिहारी मीणा थे। जिन्होंने कश्मीर में एक सर्च ऑपरेशन में देश के लिए अपनी जान न्योछावर की थी।
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शहीद
अपने खत में कलेक्टर ने आगे लिखा- बिटिया आरू, जब तुम बड़ी होकर देश के शहीदों के बारे में सुनोगी तो तुम्हें गर्व होगा. तुम अपने शहीद पिता की अंगुली पकड़कर बड़ी नहीं होगी मगर उनकी शहादत के किस्से तुम्हें रोज सुनने को मिलेंगे। जब भी उनकी याद आए तो याद रखना कि कुछ अभाव चुभते हैं, मगर तुम्हारे पिता की तरह देश के लिए कुर्बान होने का गौरव सबको नसीब नहीं होता।
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कलेक्टर ने आगे कहा, 'न केवल इस क्षेत्र के लोगों की बल्कि देश के हर जिम्मेदार और समझदार नागरिक की दुआएं और आशीर्वाद तुम्हारे साथ हैं। तुम खूब पढ़ना और अपने पिता की गौरवमयी शहादत को अपना नूर और गुरूर बनाना। तुम बिना रोये शहीद के ताबूत पर बैठ गईं और उस पर लेट गईं। उसके कुछ क्षण पहले तुमने अपने पिता का चेहरा देखा था। यह बहुत भावुकतापूर्ण दृश्य था। मैं और सेना के सभी अधिकारी तुम्हें देख रहे थे, सभी अलग अलग तरीके से सोझ रहे होंगे मगर सोच का केंद्र तुम्हारी मासूमियत और तुम्हारे शहीद पिता थे।'
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जिस तिरंगे में शहीद को लपेटकर लाए थे, मुखाग्नि के समय जब उसे खोला गया तो शहीद की बेटी एकटक उसे देखते रही। शहीद के पिता जगन्नाथ मीना ने कहा कि उन्हें बेटे की इस शहादत पर फख्र है। बस अब देश और सेना से आशा है कि वह परिवार का साथ दें।
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