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टैगोर और विक्टोरिया के प्रेम का वो अफसाना

Sat, 25 Feb 2017 03:00 AM IST
बीबीसी
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नोबेल पुरस्कार विजेता और मशहूर कवि रवींद्रनाथ टैगोर और अर्जेंटीना की प्रसिद्ध लेखिका विक्टोरिया ओकैंपो की 'करीबी' और 'आध्यात्मिक प्यार' की कहानी पर आधारित फिल्म 'थिंकिंग ऑफ हिम' तैयार है। ये फिल्म एक साथ चार भाषाओं अंग्रेजी, स्पैनिश, फ्रेंच और बांग्ला में रिलीज की जा रही है।

टैगोर की प्रेम कहानी एक ऐसा विषय है जिस पर भारत में और खास तौर से बंगाल के बुद्धिजीवियों में कम ही बात होती है। फिल्म के को प्रोड्यूसर और क्रिएटिव निर्देशक सूरज कुमार ने बीबीसी को बताया, "ये फिल्म दो अलग महाद्वीपों पर रहने वाली दो महान हस्तियों के 'आध्यात्मिक रिश्ते' की कहानी है।"

सूरज कुमार इसे कान फिल्म समारोह में शामिल किए जाने की उम्मीद रखते हैं इसी फिल्म के रिसर्च से जुड़े जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के रिटायर्ड प्रोफेसर एस पी गांगुली कहते हैं, "टैगोर के किसी महिला के साथ रिश्ते को पेश करने के लिए बहुत सावधानी की जरूरत है क्योंकि भारत में उन्हें एक ऐसे स्थान पर रखा गया है जहां थोड़ी भी चूक परेशानी का कारण हो सकती है।"
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'उनका रिश्ता 'पवित्र और आध्यात्मिक' था'

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उन्होंने कहा कि टैगोर के अपने जमाने में कई महिलाओं के साथ रिश्ते थे और इस बारे में दो तरह की बातें की जाती हैं। एक यह कि उनका रिश्ता 'पवित्र और आध्यात्मिक' था जबकि दूसरी तरह के लोग शारीरिक संबंधों के होने से इनकार नहीं करते, क्योंकि ऐसे लोग टैगोर को एक आम इंसान ही मानते हैं।

यह फिल्म दरअसल टैगोर के जन्म के डेढ़ सौ साल के जश्न के लिए तैयार होनी थी, लेकिन फंड और रिसर्च की कमी के कारण इसमें देरी हुई और अब यह पोस्ट प्रोडक्शन के दौर में है। सूरज कुमार ने बताया कि उन्हें जैसे ही इस फिल्म की पेशकश हुई उन्होंने प्रोफेसर गांगुली से इसकी स्क्रिप्ट को रिव्यू करने के लिए कहा और इस फिल्म में अपना सब कुछ लगा दिया।

उन्होंने इससे पहले दूरदर्शन पर कई लोकप्रिय कार्यक्रम पेश किए हैं जिनमें 'इक प्यार का नगमा' और 'फाइनल कट' आदि शामिल हैं।
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जब हुई टैगोर की विक्टोरिया से मुलाकात

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फिल्म की शूटिंग भारत और अर्जेंटीना में हुई है। फिल्म 'थिंकिंग ऑफ हिम' का डायरेक्शन अर्जेंटीना के मशहूर निर्देशक पाब्लो सीजर ने किया है। पाब्लो सीजर ने बीबीसी को बताया था कि उन्होंने इस फिल्म पर 2008 में काम करना शुरू किया था।

इसकी सलाह उन्हें अर्जेंटीना में भारतीय राजदूत ने दी थी। लेकिन यह फिल्म टैगोर के डेढ़ सौ साल के जश्न के मौके के हिसाब से तैयार नहीं हो सकी। सूरज कुमार ने बताया कि टैगोर और अर्जेंटीना की लेखिका विक्टोरिया ओकैंपो की मुलाकात साल 1924 के नवंबर में हुई थी।

मुलाकातों का ये सिलसिला दो-ढाई महीने जारी रहा था। उस समय टैगोर की उम्र 63 साल थी जबकि विक्टोरिया की उम्र 34 साल। लेकिन विक्टोरिया ने टैगोर की विश्व प्रसिद्ध किताब 'गीतांजलि' का फ्रेंच अनुवाद काफी पहले ही पढ़ रखा था।

टैगोर की बिजया दरअसल विक्टोरिया ही हैं

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सूरज कुमार के अनुसार टैगोर की कविताओं में 'बिजया' नाम की महिला दरअसल विक्टोरिया ही हैं और उनकी दो दर्जन से अधिक कविताएं विक्टोरिया और उनके आपसी संबंधों पर आधारित हैं। प्रोफेसर गांगुली कहते हैं कि टैगोर और विक्टोरिया की मुलाकात महज एक इत्तेफाक थी। दरअसल टैगोर यूरोप और लातिन अमरीकी देश पेरु की यात्रा पर थे और उसी दौरान वे बीमार पड़ गए और उन्हें ब्यूनस आयर्स में अपनी यात्रा रोकनी पड़ी।

स्वास्थ्य लाभ के लिए उन्होंने ब्यूनस आयर्स के ग्रामीण इलाके सेन असीदरो में दो महीने का समय बिताया। वे प्लेट नामक नदी के किनारे एक बागों वाले बंगले में रहे जहां विक्टोरिया ने उनकी एक प्रशंसक की तरह तीमारदारी की। इस दौरान उन्होंने लगभग 30 कविताएं लिखीं जिनमें से एक 'अतिथि' भी है जिसमें उन्होंने शुरुआत में ही कहा है कि 'मेरे अस्थाई प्रवास को आपने अपनी मेहरबानियों के अमृत से सराबोर कर दिया।'
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जब हुई दूसरी और आखिरी मुलाकात मोहब्बत के शहर में

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सूरज कुमार ने बताया कि इसी दौरान विक्टोरिया ने टैगोर के स्केचेज को देखकर उन्हें चित्रकला की ओर प्रेरित किया और टैगोर की पेंटिंग की प्रेरणा दरअसल विक्टोरिया ओकैंपो ही थीं। इसके बाद दोनों की दूसरी और आखिरी मुलाकात 'मोहब्बत के शहर' पेरिस में हुई थी जहां विक्टोरिया ने टैगोर की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी का आयोजन किया था और वह उनके चित्रों की पहली प्रदर्शनी भी थी।

इसके बाद टैगोर की 1941 में मृत्यु तक दोनों के बीच खतों का सिलसिला जारी रहा। प्रोफेसर गांगुली ने कहा कि दोनों की चिट्ठियां अब प्रकाशित हो चुकी हैं जिनमें नजदीकियों की चाहत दिखती है। सूरज कुमार ने बताया कि विक्टोरिया के वैवाहिक जीवन में कड़वाहट आ गई थी और ऐसे में उन्हें 'गीतांजलि' की स्टडी ने सहारा दिया था और वे टैगोर से मिलने से पहले ही उनसे प्रभावित हो गई थीं।
 
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फिल्म के डायरेक्टर पाब्लो ने दिखाई थी उनकी कहानी

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फिल्म के डायरेक्टर पाब्लो ने शुरू में कहा था कि टैगोर का किरदार अमिताभ बच्चन निभाएंगे, लेकिन यह संभव नहीं हो सका और उनकी भूमिका अग्रणी अभिनेता विक्टर बनर्जी ने निभाई है जबकि विक्टोरिया का किरदार अर्जेंटीना की अभिनेत्री एलेन्योरा वेक्सलर ने निभाई है। इस फिल्म में दो कहानियां समानांतर चलती हैं।
  एक का संबंध मौजूदा दौर में भारत के अग्रणी शिक्षण संस्थान शांति निकेतन से है जिसमें शिक्षक फेलिक्स अपनी छात्रा कमली से मिलते और जुदा होते हैं। ये हिस्सा रंगीन फिल्म की तरह शूट किया गया है जबकि इसके समानांतर टैगोर और विक्टोरिया की कहानी पुरानी ब्लैक एंड व्हाइट रोल पर शूट की गई है। फेलिक्स की भूमिका अर्जेंटीना के थिएटर अभिनेता हेक्टेयर बरदोनी ने निभाई है जबकि कमली की भूमिका राइमा सेन ने निभाई है।
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