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समाजवादी पार्टी: 27 साल पहले शुरू हुआ साइकिल का सफर और मंजिलों की मुश्किल

Sun, 07 Apr 2019 04:16 PM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मुलायम सिंह यादव-चन्द्रशेखर - फोटो : Social Media
आज समाजवादी पार्टी टूट चुकी है, बंट चुकी है। मुलायम अलग हैं, शिवपाल अलग। मुलायम, अखिलेश से कुछ रूठे-रूठे रहते हैं। जानिए, कैसे शुरू हुआ यूपी की सियासत में अहम जगह रखने वाली पार्टी का सफर।
80 के दशक में उत्तर प्रदेश में पिछड़ों की राजनीति की जमीन तैयार होने लगी थी। इसी को देखते हुए राममनोहर लोहिया के करीब रहे मुलायम सिंह यादव ने 'समाजवादी जनता पार्टी' से अलग होकर 'समाजवादी पार्टी' का गठन किया। यह 4 अक्टूबर 1992 की बात है। उस वक्त समाजवादी जनता पार्टी के अध्यक्ष पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर हुआ करते थे। मुलायम आज भी चंद्रशेखर को अपना राजनीतिक गुरु मानते हैं।
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कांशी राम-मुलायम सिंह यादव - फोटो : Social Media
साल 1993 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी पार्टी और कांशीराम की पार्टी बहुजन समाज पार्टी के साथ मिलकर 67 सीटें जीतीं। तब देश मंदिर, मस्जिद के नाम पर उबल रहा था। बसपा-सपा के गठबंधन के बाद देश में एक नया नारा गूंज उठा था- 'मिले मुलायम, कांशीराम, हवा में उड़ गए जय श्री राम।'
 
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मुलायम सिंह यादव-मायावती - फोटो : Social Media
बसपा में मायावती कहने को उपाध्यक्ष थीं लेकिन उत्तर प्रदेश की राजनीति में उनका दबदबा बढ़ रहा था। राज्य के सीएम की कुर्सी पर बैठे मुलायम सिंह को ये रास नहीं आया और वह सीपीआई, सीपीएम और जनता दल के विधायकों को तोड़ कर बहुमत के लिए बसपा में भी तोड़- फोड़ की कोशिश करने लगे। कहा जाता है कि इसी के बाद मायावती को डराने के लिए गेस्ट हाउस कांड हुआ। सपा के नेता बसपा के 12 विधायकों को भी जबरदस्ती ले गए थे।

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मुलायम सिंह यादव - फोटो : Social Media
1996 के चुनाव में मुलायम सिंह ने पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर लाने की कोशिश की और वो पहली बार संसद पहुंचे। मुलायम सिंह का नाम संयुक्त मोर्चे वाली सरकार में प्रधानमंत्री के लिए तय होते- होते रह गया। बाद में वो देवगौड़ा की सरकार में रक्षा मंत्री बने।
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : Social Media
दिल्ली की राजनीति में समाजवादी पार्टी की जगह नहीं बनते देख मुलायम सिंह ने समाजवादी साइकिल को फिर से यूपी की सड़क पर दौड़ा दिया। अपने संगठनात्मक मजबूती के बल पर सपा यूपी में सत्ता में लौटी और 29 अगस्त 2003 को मुलायम सिंह यादव फिर मुख्यमंत्री बने। 2004 का लोकसभा चुनाव, समाजवादी पार्टी के लिए ऐतिहासिक रहा। सपा ने 35 लोकसभा सीटें जीती लेकिन दिल्ली की सत्ता में जगह नहीं बना पाई। दूसरी ओर मुलायम सिंह का कार्यकाल भी बतौर मुख्यमंत्री कुछ खास नहीं रहा। उसके बाद के पांच साल समाजवादी पार्टी के लिए बेहद ही उठापटक वाले रहे। 
 
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मुलायम सिंह यादव- शिवपाल यादव-अखिलेश यादव - फोटो : Social Media
2007 के विधानसभा चुनाव में सपा को जनता ने सत्ता से बेदखल कर दिया। 2009 के लोकसभा चुनाव में सपा 22 सीटें ही जीत पाई। जिसके बाद मुलायम सिंह ने एक बड़ा फैसला लेते हुए यूपी के नेता प्रतिपक्ष के पद से इस्तीफा देकर अपने छोटे भाई शिवपाल को कमान थमा दी। 2012 में यूपी विधानसभा चुनाव जीतकर सपा एकबार फिर सत्ता में नए चेहरे के साथ पहुंची। मुलायम सिंह के बेटे अखिलेश यादव यूपी के नए मुख्यमंत्री बने और यही से समाजवादी का कुनबा बिखरना शुरू हो गया।
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फाइल फोटो
2107 विधानसभा चुनाव में सपा बुरी तरह से हार गई। परिवार में भी फूट पड़ गई। मुलायम, अखिलेश से नाराज हो गए। फिर मामला सुलझा लेकिन छोटे भाई शिवपाल अब समाजवादी से इतर अलग राह बना चुके हैं। समाजवादी पार्टी ने मायावती की बसपा के साथ अखिलेश यादव के नेतृत्व में गठजोड़ कर लिया है। सपा-बसपा दोनों साथ में 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं।
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