Jharkhand- नक्सलियों से बरामद हथियार
- फोटो : Amar Ujala
ऑपरेशन 'डबल बुल व ऑक्टोपस' ने तोड़ी नक्सलियों की कमर
साल के शुरू में लातेहार-लोहरदगा सीमा पर बुलबुल जंगल में ऑपरेशन डबल बुल को अंजाम दिया गया था। इसके बाद बूढ़ा पहाड़ पर ऑपरेशन ऑक्टोपस शुरू किया गया। सीआरपीएफ कोबरा ने लोहरदगा जिले के 'बुलबुल' गांव के घने जंगलों के भीतरी हिस्से में छिपे नक्सलियों को बाहर आने पर मजबूर कर दिया था। उस इलाके में टॉप नक्सली छिपे थे। उनमें कई जोनल और सब जोनल कमांडर भी शामिल थे। 18 दिन चले 'ऑपरेशन' में 14 एनकाउंटर हुए थे। मुठभेड़ वाले इलाके से 16 'आईईडी' बरामद हुई। 196 डेटोनेटर एवं 28 घातक हथियारों से लैस 14 हार्डकोर नक्सली धरे गए। ऑपरेशन ऑक्टोपस में चीनी ग्रेनेड सहित सौ से अधिक आईईडी बरामद की गईं।
1200 जवानों को नुकसान पहुंचाने की ताक में थे नक्सली
गया और औरंगाबाद स्थित घने जंगलों में 'कोबरा' दस्ते ने नक्सलियों को अपना ठिकाना छोड़कर भागने के लिए मजबूर कर दिया। इस इलाके में कई दिनों से नक्सली, सुरक्षा बलों पर बड़े हमले की फिराक में थे। फरवरी में सीआरपीएफ ने यहां पर एफओबी 'फारवर्ड ऑपरेटिंग बेस' स्थापित किया था। नक्सली जानते थे कि कोबरा दस्ता, यहां पर बड़ा ऑपरेशन कर रहा है। जब नक्सलियों को लगा कि वे अब तीन तरफ से घिर चुके हैं तो उन्होंने गोला बारूद, 500 डेटोनेटर, एक हजार आईईडी (इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस), प्रेशर बम, केन आईईडी और एक एके-47 राइफल को मौके पर छोड़ कर, भागना ठीक समझा। नक्सलियों के पास से जितना गोला बारूद व आईईडी बरामद हुई हैं, उसके जरिए 1200 से ज्यादा जवानों को नुकसान पहुंचाया जा सकता था। 19 फरवरी के ऑपरेशन के दौरान अमेरिका निर्मित राइफल बरामद हुई। पांच लाख रुपये का इनामी नक्सली बालक गंझू उर्फ बाला गंझू मारा गया। 10 लाख रुपये के इनामी भाकपा (माओवादी) जोनल कमांडर बलराम उरांव सहित 9 नक्सलियों को गिरफ्तार कर लिया गया।