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विकास दुबे ने ताजा करा दी देश के इन कुख्यात अपराधियों की याद, जानिए इनका इतिहास

Tue, 07 Jul 2020 08:29 PM IST
Tanuja Yadav न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कुख्यातों का इतिहास - फोटो : AMAR UJALA
उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिस्ट्रीशीटर और कुख्यात अपराधी विकास दुबे पर आठ पुलिसकर्मियों को मारे जाने का आरोप है। एक जुलाई 2020 को पुलिस की टीम विकास दुबे को पकड़ने के लिए उसके घर बिकरू गांव में गई, लेकिन उसे इस बात की जानकारी पहले ही मिल गई थी। 

विकास दुबे को पकड़ने के दौरान पुलिस और बदमाशों के बीच हुई मुठभेड़ में आठ पुलिसकर्मी शहीद हो गए और सात घायल हुए। विकास दुबे के मामले को देखते हुए एक बार फिर पुलिस और राजनेताओं के गठजोड़ पर सवाल खड़े हो रहे हैं।  

यह कोई पहला मामला नहीं है कि जब किसी कुख्यात अपराधी को पुलिस या राजनेताओं का संरक्षण मिला हो। विकास दुबे पर 60 से ज्यादा आपराधिक मामले दर्ज हैं लेकिन इतनी बड़ी कार्रवाई कभी नहीं हुई। विकास दुबे कांड के बाद देश के इतिहास में डॉन, अपराधी, हिस्ट्रीशीटर या आतंकवादी के तौर पर कुख्यात रहे कई लोगों से जुड़े वाकये ताजा हो गए हैं। जानिए कौन थे वो लोग जो डॉन और अपराधी के तौर पर कुख्यात हुए। 
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दाऊद इब्राहिम

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Dawood Ibrahim
दाऊद इब्राहिम का जन्म महाराष्ट्र के रत्नागिरी में हुआ था। उसके पिता शेख इब्राहिम अली कास्कर मुंबई पुलिस में हवलदार थे। स्कूल में पढ़ाई के दौरान बुरी संगत में पड़े दाऊद ने चोरी, डकैती और तस्करी शुरू कर दी थी और वह जुर्म की दुनिया में आगे बढ़ता रहा। 

मुंबई में उन दिनों अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला गैंग का राज हुआ करता था। दाऊद भी इस गैंग के लिए काम करने लगा। सन 80 के दशक में चोरी और तस्करी करने वाला दाऊद जरायम की दुनिया का बड़ा नाम बन गया। वह फिल्म फाइनेंसिंग और सट्टेबाजी का भी काम करने लगा। इसी दौरान उसकी मुलाकात छोटा राजन से हुई और दोनों ने मिलकर भारत के बाहर काम करना शुरू कर दिया। 

जुलाई 2005 में भारतीय खुफिया एजेंसियों ने दाऊद इब्राहिम को उसके ठिकाने पर घुसकर मारने की योजना बनाई। एजेंसियों को ये पक्की जानकारी थी कि रिसेप्शन में दाऊद जरूर आएगा, इसके लिए छोटा राजन गैंग के दो शॉर्प शूटर्स को ट्रेनिंग दी गई। लेकिन दाऊद को मारने का प्लान लीक हो गया और मुंबई पुलिस में मौजूद दाऊद के कुछ लोगों ने दोनों शॉर्प शूटर्स को गिरफ्तार कर लिया। 

हालांकि अभी कुछ दिन पहले दाऊद इब्राहिम के कोरोना से मौत की खबर आई थी लेकिन बाद में इसकी पुष्टि नहीं हुई। 
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करीम लाला

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करीम लाला - फोटो : Social Media
करीम लाला का पूरा नाम अब्दुल करीम शेर खान था। 1911 में अफगानिस्तान में करीम लाला का जन्म हुआ था, जिंदगी में बड़ा काम करने की चाहत में करीम लाला मुंबई आया और यहां आकर छोटे मोटे काम करने शुरू किए। करीम लाला ने सबसे पहले मुंबई के ग्रांट रोड पर एक किराए का घर लिया और वहां सोशल क्लब के नाम से जुए का अड्डा खोला।

जुए के धंधे के बाद करीम लाला ने सोने, कीमती गहनों, हीरे की तस्करी करना शुरू किया और आजादी के पहले से इस धंधे से खूब पैसा कमाया। बाद में करीम लाला तस्करी के धंधे के किंग के नाम से मशहूर हो गया और इसके बाद उसने मुंबई में कई जगहों पर दारू के के ठेके भी खोल लिए।

मुंबई अंडरवर्ल्ड में 1981 से 1985 के बीच करीम लाला गैंग और दाऊद इब्राहिम के बीच गैंगवार हुआ। नतीजतन दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी ने धीरे धीरे करीम लाला के पठान गैंग का सफाया कर दिया इस गैंगवार में दोनों गुटों के दर्जनों लोग मारे गए और 90 साल की उम्र में 19 फरवरी 2002 को मुंबई में करीम लाला की मौत हो गई।

छोटा राजन

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छोटा राजन
छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम एक समय में साथ थे लेकिन मुंबई ब्लास्ट के बाद इन दोनों के रास्ते अलग हो गए थे। छोटा राजन को दाऊद का राइट हैंड भी कहा जाता था लेकिन साल 2000 में छोटा राजन पर दाऊद इब्राहिम के गुर्गों ने हमला करवाया लेकिन उस वक्त गोलियां लगने के बाद भी राजन जिंदा था।

फिरौती, जालसाजी, धोखाधड़ी, तस्करी आदि के मामले में छोटा राजन को पकड़ने के लिए जब मुंबई पुलिस ने अभियान चालाया तो वह सिंगापुर भाग गया। कई बार राजन की मौत की खबरें सामने आईं लेकिन एक भी सच साबित नहीं हुई। 

दाऊद और छोटा राजन की दुश्मनी तब पुख्ता हुई, जब राजन ने दाऊद को जानकारी दिए बिना ही शिवसेना के नगर सेवक खीम बहादुर थापा को मार गिराया था। ऐसा कहा जाता है कि थापा के दाऊद से अच्छे संबंध थे। राजन को उसके दोस्त अबू सलेम ने चेताया कि वह दाऊद से सावधान रहे तभी से राजन अलग हो गया।
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रवि पुजारी

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ravi pujari - फोटो : Social Media
जब मुंबई में अंडरवर्ल्ड डॉन पैर पसार रहा था तब रवि पुजारी छोटा राजन का शॉर्प शूटर के तौर पर काम करता था। साल 1993 में छोटा राजन और दाऊद इब्राहिम अलग हुए तो रवि पुजारी भी छोटा राजन से अलग होकर बैंकॉक चला गया और वहां जाकर अपना अलग गैंग बना लिया। 

बैंकॉक में रहने के दौरान रवि पुजारी रंगदारी के धंधे का बड़ा खिलाड़ी बन गया और बॉलीवुड के बड़े-बड़े सितारों को धमकाने में रवि पुजारी का नाम सामने आने लगा। रवि पुजारी पर हत्या और फिरौती के 200 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। रवि पुजारी 15 साल से फरार था लेकिन फरवरी 2020 में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने रवि पुजारी को गिरफ्तार कर लिया था। 

1995 का चर्चित मामला प्रकाश कुकरेजा हत्याकांड सुर्खियों में आया, इस हत्या में ये गैंग शामिल था। 2003 में नवी मुंबई में बिल्डर सुरेश वाधवा की हत्या की कोशिश की लेकिन कामयाब नहीं हो पाया, बाद में 2005 में पुजारी के कहने पर ही वकील माजिद मेनन की हत्या कर दी गई।
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छोटा शकील

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chhota shakeel
दाऊद इब्राहिम की डी कंपनी में दूसरे नंबर का आदमी है छोटा शकील। इसे 1993 में मुंबई ब्लास्ट व 2001 में बैंकॉक में छोटा राजन पर हमले का आरोपी ठहराया गया है। हथियारों की तस्करी करना और फिरौती वसूलना इसका प्रमुख धंधा है। बॉलीवुड की फिल्मों में यही दाऊद इब्राहिम का पैसा लगाता था। कहा जाता है कि कुख्यात डॉन छोटा राजन ने छोटा शकील के डर से ही खुद को गिरफ्तार कराया था।

फिलहाल छोटा शकील कराची के डिफेंस एरिया में रहता है और मुंबई पुलिस और सीबीआई शिद्दत से उसकी तलाश कर रहे हैं। 80 के दशक में मुंबई राज करने वाला छोटी शकील मुंबई में एक ट्रैवल एजेंसी चलाता था लेकिन अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम से संपर्क में आने के बाद उसने फिर पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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वीरप्पन

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वीरप्पन - फोटो : self
दक्षिण भारत के कुख्यात 'वीरप्पन' के नाम से प्रसिद्ध कूज मुनिस्वामी वीरप्पन का जन्म गोपीनाथम नामक गांव में 1952 में एक चरवाहा परिवार में हुआ था। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के जंगलों में वीरप्पन का राज था। तीनों ही राज्यों की पुलिस उसको पकड़ने के लिए अभियान चला रही थी। 

वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और वन अधिकारियों समेत 184 लोगों की हत्या, 200 हाथियों के शिकार, 26 लाख डॉलर के हाथीदांत की तस्करी और दो करोड़ 20 लाख डॉलर कीमत की दस हजार टन चंदन की लकड़ी की तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस को वीरप्पन की तलाश थी। 

उसका 40 लोगों का गिरोह था, जो वीरप्पन के कहने पर शिकार, अपहरण, हत्या आदि की वारदात को अंजाम देता था। बड़ी मुश्किलों के बाद 1986 में वीरप्पन को एक बार पकड़ लिया गया था लेकिन वह भाग निकलने में सफल रहा। 

1990 में कर्नाटक सरकार ने उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस दस्ते का गठन किया। जल्द ही पुलिस वालों ने उसके कई आदमियों को पकड़ लिया। फरवरी 1992 में पुलिस ने उसके प्रमुख सैन्य सहयोगी गुरुनाथन को पकड़ लिया। 18 अक्टूबर 2004 को उसे मार गिराया गया। 
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रंगा-बिल्ला

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रंगा-बिल्ला कोर्ट से निकलते हुए - फोटो : अमर उजाला
रंगा और बिल्ला ने 1978 में दो बच्चों की नृशंस हत्या कर दी थी। इस कांड की चर्चा देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में खूब रही। यह एक ऐसा दौर था जब बच्चों की हत्या करने के मामले में कोई सोच भी नहीं सकता था।  

रंगा और बिल्ला ने जो किया वो उस समय का जघन्य अपराध था। रंगा और बिल्ला ने एक सैन्य अधिकारी के बच्चों को अगवा कर दुष्कर्म के बाद उनको मौत के घाट उतार दिया था। केस चलने के बाद दोनों को फांसी दे दी गई।

कुलजीत सिंह उर्फ रंगा और जसबीर सिंह उर्फ बिल्ला ने 29 अगस्त 1978 को संजय और गीता चोपड़ा का फिरौती के लिए अपहरण किया था। तीन दिन बाद दोनों भाई-बहनों के शव बरामद किए गए। रंगा-बिल्ला को एक ट्रेन से गिरफ्तार किया गया और चार साल तक चली सुनवाई के बाद 1982 में उन्हें फांसी दे दी गई। दोनों बच्चों के नाम पर बाद में वीरता पुरस्कार शुरू किया गया, जो हर साल दिया जाता है।
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