वीरप्पन
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दक्षिण भारत के कुख्यात 'वीरप्पन' के नाम से प्रसिद्ध कूज मुनिस्वामी वीरप्पन का जन्म गोपीनाथम नामक गांव में 1952 में एक चरवाहा परिवार में हुआ था। कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के जंगलों में वीरप्पन का राज था। तीनों ही राज्यों की पुलिस उसको पकड़ने के लिए अभियान चला रही थी।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों और वन अधिकारियों समेत 184 लोगों की हत्या, 200 हाथियों के शिकार, 26 लाख डॉलर के हाथीदांत की तस्करी और दो करोड़ 20 लाख डॉलर कीमत की दस हजार टन चंदन की लकड़ी की तस्करी से जुड़े मामलों में पुलिस को वीरप्पन की तलाश थी।
उसका 40 लोगों का गिरोह था, जो वीरप्पन के कहने पर शिकार, अपहरण, हत्या आदि की वारदात को अंजाम देता था। बड़ी मुश्किलों के बाद 1986 में वीरप्पन को एक बार पकड़ लिया गया था लेकिन वह भाग निकलने में सफल रहा।
1990 में कर्नाटक सरकार ने उसे पकड़ने के लिए एक विशेष पुलिस दस्ते का गठन किया। जल्द ही पुलिस वालों ने उसके कई आदमियों को पकड़ लिया। फरवरी 1992 में पुलिस ने उसके प्रमुख सैन्य सहयोगी गुरुनाथन को पकड़ लिया। 18 अक्टूबर 2004 को उसे मार गिराया गया।