डरो हमसे, हम इंसान नहीं ‘मर्द’ हैं
41 बेसहारा बच्चियों में 34 के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई, तो पता चला कि संचालक ही बना था बच्चियों का दुश्मन।
बेसहारा बच्चियों को सहारा देने के नाम पर आश्रय गृह खोलकर किस तरह का घिनौना खेल खेला जाता है, इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, बिहार के मुजफ्फरपुर का बालिका गृह कांड। इस कांड का खुलासा होने पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा।
पुलिस के मुताबिक, मुजफ्फरपुर के बालिका गृह में 41 लड़कियां थीं और मेडिकल रिपोर्ट में 34 लड़कियों के साथ दुष्कर्म की पुष्टि हुई। इस मामले में बिहार की पूर्व मंत्री मंजू वर्मा और उनके पति चंद्रशेखर वर्मा को भी आरोपित किया गया। सुप्रीम कोर्ट ने शेल्टर होम में लड़कियों से कथित यौन हिंसा और दुष्कर्म के आरोपों की जांच कर रहे सीबीआई की रिपोर्ट को ‘भयानक' और ‘डरावना' बताया था।
इसके अलावा यूपी के देवरिया जिले में भी ऐसा ही मामला सामने आया। मामले का खुलासा उस समय हुआ जब एक लड़की किसी तरह भागकर महिला थाने पहुंची और आपबीती सुनाई। इसके बाद पुलिस ने देर रात छापा मारकर वहां से 24 लड़कियों को मुक्त कराया। वहीं, इस वर्ष दुष्कर्म की कुछ ऐसी घटनाएं सामने आईं, जिससे लोगों का खून खौल उठा।
साल की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ गैंगरेप के बाद उसकी हत्या कर दी गई। घटना के 7 दिन बाद बच्ची का शव जंगल से बरामद हुआ। इस घटना ने पूरे देश को हिला दिया। एक और दिल दहला देने वाली घटना जून में घटी। मध्यप्रदेश के मंदसौर में सात साल की बच्ची के साथ निर्भया जैसी दरिंदगी की गई। इस घटना को लेकर लोगों में काफी रोष देखा गया। लोग न्याय के लिए सड़कों पर उतर गए। इस मामले में 55 दिन बाद दो आरोपियों को कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई।
वहीं, गुजरात के साबरकंठा जिले में 28 सितंबर को 14 माह की एक बच्ची के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में एक प्रवासी युवक की गिरफ्तारी के बाद आक्रोशित स्थानीय लोगों ने गैर गुजरातियों को निशाना बनाया। यहां सबसे ज्यादा भयावह बात यह है कि ऐसे मामलों की संख्या बढ़ रही है, जिसमें छोटी बच्चियों को निशाना बनाया जा रहा है।