रंगभरनी एकादशी पर धर्मनगरी में होली का उल्लास छा गया। अपराह्न राधावल्लभ घेरा से बग्गी में सवार होकर भगवान प्रिया-प्रियतम के प्रतीकात्मक स्वरूपों ने भक्तों के साथ गुलाल से होली खेली।
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विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में आकर समाप्त हुई सवारी
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सवारी
प्रिया-प्रियतम गुलाल उड़ा रहे थे और सवारी के आगे आगे श्रद्धालु रसिक महानुभाव होली के रसिया गाते, ढोल-नगाड़े की थाप पर नृत्य करते चल रहे थे। सवारी ठाकुर राधावल्लभ मंदिर से प्रारंभ होकर विभिन्न मार्गों से होते हुए मंदिर परिसर में आकर समाप्त हुई।
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इस सवारी की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है
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वृंदावन में प्रिया-प्रियतम
राधाबल्लभ घेरा से निकलने वाली इस पारंपरिक सवारी के साथ ही नगर में होली की शुरुआत हो गई। राधावल्लभीय वैष्णव महासभा के पदाधिकारी यादवेंद्र वल्लभ गोस्वामी और योगेंद्र वल्लभ गोस्वामी ने बताया कि प्रतिवर्ष निकलने वाली इस सवारी की परंपरा सैकड़ों वर्ष पुरानी है।
भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ होली खेलते थे
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मंदिर मेें खेला गया रंग
सांझ ढलते ही वृंदावन की कुंज गलियों में भगवान श्रीकृष्ण गोपियों के साथ होली खेलते थे। उसी के प्रतीकात्मक रूप में यह सवारी निकाली जाती है।
राधावल्लभ मंदिर में शाम को राधाबल्लभ लाल का ब्याहुला उत्सव मनाया गया। इसी के साथ नगर के बांकेबिहारी, राधाबल्लभ, राधारमण, भट्ट जी, यशोदानंदन, राधादामोदर और श्याम सुंदर आदि मंदिरों में होली का शुभारंभ हो गया।