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लोकसभा चुनाव 2019: इन सीटों पर होगी कांटे की टक्कर, हर बाजी पर रहेगी पूरे देश की नजर

Thu, 28 Mar 2019 09:29 AM IST
Prabudhh Jain चुनाव डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लोकसभा चुनाव 2019 के महासंग्राम में दिलचस्प मुकाबले - फोटो : Amar Ujala
भाजपा की पहली लिस्ट की घोषणा के साथ ही 2019 के चुनावी दंगल में खुद ब खुद कुछ सुपरहिट मुकाबलों की तस्वीर बनने लगी है। ऐसे ही कुछ मुकाबलों पर नजर डालिए, जो आने वाले दिनों में मौसमी गर्मी के साथ चुनावी गर्मी भी बेहद बढ़ाने वाले हैं:
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स्मृति ईरानी-राहुल गांधी - फोटो : Amar Ujala

अमेठी

कांग्रेस का गढ़ माने जाने वाली अमेठी में राहुल गांधी के सामने एक बार फिर भाजपा की राज्यसभा सांसद और मंत्री स्मृति ईरानी होंगी। इससे पहले साल 2014 में भी दोनों एक दूसरे को टक्कर दे चुके हैं। हालांकि, तब जीत राहुल के हाथ ही लगी थी, लेकिन मुकाबला बेहद कड़ा रहा था। राहुल को जहां 4 लाख 8 हजार वोट मिले थे वहीं स्मृति को 3 लाख वोट। वहीं 2009 में राहुल साढ़े तीन लाख वोट जीते थे।
शायद, यही वजह है कि पार्टी ने स्मृति पर ही दांव लगाना बेहतर समझा। यूं तो अमेठी सीट, गांधी परिवार की परंपरागत सीटों में शुमार है लेकिन 2019 का रण, 2014 से काफी अलग रहने वाला है। स्मृति भी पांच साल का अनुभव बटोर चुकी हैं। ऐसे में ये मुकाबला सुपरहिट से कम नहीं रहने वाला।
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जया प्रदा-आजम खान - फोटो : Amar Ujala

रामपुर

मंगलवार को बॉलीवुड अभिनेत्री और समाजवादी पार्टी से सांसद रह चुकीं जया प्रदा ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण कर ली। जया प्रदा रामपुर से भाजपा की प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतरेंगी। रामपुर में उनका मुकाबला सपा-बसपा गठबंधन के उम्मीदवार आजम खान से होगा। आजम और जया की सियासी दुश्मनी भी जग जाहिर है, इसलिए इनके बीच यह चुनावी रण भी बेहद दिलचस्प होने वाला है। 
इधर भाजपा की तरफ से उम्मीदवार घोषित होने के बाद जया ने जहां खुशी जताई, वहीं, आजम खान ने दो टूक कहा कि चुनावी मैदान में कोई भी आए, लेकिन जीत सपा-बसपा गठबंधन की ही होगी।

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गिरिराज सिंह-कन्हैया कुमार - फोटो : Amar Ujala

बेगूसराय

गिरिराज सिंह की तमाम नाराजगी को दरकिनार कर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने साफ किया कि वो बेगूसराय से ही लड़ेंगे। एक तरफ जहां गिरिराज हैं तो दूसरी तरफ हैं जेएनयू छात्र संघ के अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार। कन्हैया इस सीट से सीपीआई की टिकट पर लोकसभा चुनाव लड़ रहे हैं। हमेशा से ही भाजपा पर हमलावर रहने वाले सीपीआई नेता कन्हैया कुमार और गिरिराज सिंह के बीच चुनावी रण में सुपरहिट मुकाबला देखना दिलचस्प होगा। कन्हैया को जहां सभी वाम दलों ने समर्थन देने का एलान किया है तो गिरिराज के सामने नवादा से दूर बेगूसराय के लोगों को अपना बनाने की चुनौती होगी।
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संजीव बाल्यान-अजित सिंह - फोटो : Amar Ujala

मुजफ्फरनगर

मुजफ्फरनगर उत्तर प्रदेश की बेहद संवेदनशील लोकसभा सीटों में आता है। यहां से भाजपा के संजीव बाल्यान एक बार फिर मैदान में हैं। लेकिन उन्हें चुनौती देने उतर रहे हैं, राष्ट्रीय लोक दल के अध्यक्ष और दिग्गज अजित सिंह। 2014 में संजीव बाल्यान इस सीट पर करीब 59 फीसदी वोटों के साथ 4 लाख वोट के बड़े अंतर से जीते थे। उन्होंने बसपा के कादिर राणा को मात दी थी। लेकिन, इस बार मुकाबला आसान नहीं होगा। पश्चिमी उत्तर प्रदेश को रालोद का गढ़ माना जाता है। इस इलाके में उनकी अच्छी पैठ है। अजित सिंह खुद कद्दावर और तजुर्बेकार नेता हैं। तो इस सीट पर भी मुकाबला कड़ा रहेगा।
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जयंत चौधरी-सत्यपाल सिंह - फोटो : Amar Ujala

बागपत

मुजफ्फरनगर में पिता अजित सिंह, संजीव बाल्यान को संभालेंगे तो सत्यपाल सिंह से लड़ने की जिम्मेदारी रहेगी उनके बेटे जयंत चौधरी पर। मुंबई पुलिस कमिशनर रहे सत्यपाल सिंह ने पहली बार 2014 में चुनाव लड़ा और पहली ही बार में दो लाख वोटों से जीतकर लोकसभा पहुंचे। दिलचस्प बात ये है कि 2014 में इस सीट से लड़ने वाले अजित सिंह तीसरे स्थान पर रहे थे। लेकिन इस बार मामला सपा-बसपा-रालोद गठबंधन का है। आंकड़ों की बाजीगरी में जाएं और 2014 के सपा, बसपा और रालोद के वोटों को मिला दिया जाए तो वो भाजपा से कहीं आगे ठहरता है। 
शायद, यही वजह है कि जाट समुदाय के बीच ठीकठाक पकड़ रखने वाले जयंत चौधरी 2014 के उलट, सत्यपाल सिंह के लिए चुनौती खड़ी कर सकते हैं।
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धर्मेंद्र यादव-संघमित्रा मौर्य - फोटो : Amar Ujala

बदायूं

बसपा से भाजपा में आई संघमित्रा मौर्य को बदायूं से टिकट दिया गया है। उनके सामने चुनावी महासंग्राम में होंगे- समाजवादी पार्टी के धर्मेंद्र यादव। ये मुकाबला कई वजहों से बेहद दिलचस्प बन गया है। संघमित्रा, बसपा के कद्दावर नेता रहे स्वामी प्रसाद मौर्य की बेटी हैं और पिछले कई साल से सक्रिय राजनीति का हिस्सा हैं। 2014 में उन्होंने मैनपुरी से चुनाव लड़ा और तीसरे स्थान पर रहीं। 
2014 की मोदी लहर में भी बदायूं वो सीट थी जो सपा बचाने में कामयाब रही। और इसे बचाने वाले थे धर्मेंद्र यादव जिन्होंने भाजपा के वागीश पाठक को करीब डेढ़ लाख वोट से मात दी। धर्मेंद्र यादव, मुलायम सिंह के भतीजे हैं। क्या 2019 के चुनाव में संघमित्रा कोई कमाल कर पाएंगी या 2014 की तरह धर्मेंद्र अपनी सीट बचा लेंगे, ये देखना खासा दिलचस्प होगा।
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प्रिया दत्त-पूनम महाजन - फोटो : Amar Ujala

उत्तर-मध्य मुंबई 

मुंबई उत्तर-मध्य लोकसभा सीट से भाजपा ने एक बार फिर पूनम महाजन को अपना उम्मीदवार बनाया है। कांग्रेस की तरफ से इस सीट पर सुनील दत्त की बेटी प्रिया दत्त को उतारा गया है। पूनम महाजन भाजपा के बड़े नेता रहे प्रमोद महाजन की बेटी हैं। हालांकि प्रिया दत्त ने पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को पत्र लिख कर लोकसभा चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। मगर राहुल के हस्तक्षेप के बाद वो चुनाव लड़ने के लिए राजी हो गईं। बता दें कि प्रिया 2009 के लोकसभा चुनाव में दूसरी बार उत्तर-मध्य मुंबई सीट से विजयी हुई थीं, लेकिन 2014 के चुनाव में पूनम महाजन ने उन्हें हरा कर इस सीट पर जीत हासिल की थी। 
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