सवाल उठता है कि क्या इस केस में आरोपियों को फांसी की सजा मिल सकती है? अगर हां तो कैसे? कानून क्या कहता है? जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है, उसके अनुसार आरोपियों को कितनी सजा मिल सकती है? आइए समझते हैं...
दिल्ली के सुल्तानपुरी में नए साल की पूर्व संध्या पर कार से युवती को 13 किलोमीटर तक घसीटने के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया है। घटना को अंजाम देने वाले पांचों आरोपियों को पुलिस ने पकड़ लिया है। दिल्ली पुलिस ने मामले में सख्त से सख्त कार्रवाई का भरोसा दिलाया है तो वहीं, दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या इस केस में आरोपियों को फांसी की सजा मिल सकती है? अगर हां तो कैसे? कानून क्या कहता है? जिन धाराओं में केस दर्ज हुआ है, उसके अनुसार आरोपियों को कितनी सजा मिल सकती है? आइए समझते हैं...
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Delhi case
- फोटो : अमर उजाला
पहले घटना के बारे में जान लीजिए
बाहरी दिल्ली के सुल्तानपुरी इलाके में 31 दिसंबर की रात एक युवती अपनी दोस्त के साथ स्कूटी से जा रही थी। इसी दौरान एक कार ने स्कूटी में टक्कर मार दी। इसमें दोनों घायल हो गईं। कार में पांच लोग बैठे थे और पांचों नशे में धुत थे। आरोपियों ने बगैर रुके कार की स्पीड तेज कर दी। स्कूटी सवार एक युवती का पैर कार के एक्सल में फंस गया। 13 किलोमीटर तक कार के साथ ही उसे घसीटा गया। उसके सारे कपड़े फट गए। युवती की मौके पर ही मौत हो गई। इसके बाद जब पांचों आरोपियों ने कंझावला रोड पर जोंटी गांव के पास कार रोकी तो उन्होंने युवती को कार में फंसा देखा। आरोपियों ने युवती को कार के नीचे से निकाला और उसे खुले आसमान के नीचे वहीं फेंककर चले गए। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं था। वहीं, दूसरी युवती घटनास्थल से ही अपने घर चली गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर कार चालक और अंदर बैठे सभी आरोपियों को पकड़ लिया है।
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सीएम अरविंद केजरीवाल
- फोटो : सोशल मीडिया
मुख्यमंत्री ने की फांसी की सजा
कंझावला मामले को सीएम केजरीवाल ने बेहद शर्मनाक घटना बताया। उन्होंने कहा, 'हमारा समाज किस तरफ जा रहा है? कुछ लड़कों ने कई किलोमीटर तक एक लड़की को घसीटा, ये बेहद दर्दनाक है। चाहे आरोपी कितने भी रसूख वाले क्यों ना हों उनको सख्त से सख्त सजा मिलनी चाहिए।'
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Delhi case
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने किन-किन धाराओं में केस दर्ज किया?
पांचों आरोपियों को गिरफ्तार करने के बाद दिल्ली पुलिस ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। इसमें बताया कि आरोपियों के खिलाफ धारा 279, 304, 304ए, 120बी के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस ने बताया है कि प्रारंभिक जांच के बाद अगर कुछ और तथ्य सामने आते हैं तो उसके अनुसार एफआईआर में धाराएं जोड़ दी जाएंगी।
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Delhi case
- फोटो : अमर उजाला
इन धाराओं में कितनी सजा मिल सकती है?
आईपीसी की धारा 279 : सार्वजनिक जगह पर जानकर या असावधानी से असुरक्षित वाहन चलाकर दूसरों का जीवन खतरे में डालना या घायल करने के कृत्य इस धारा में आते है। अपराध साबित होने पर अधिकतम तीन महीने की सजा और एक हजार रुपए तक जुर्माना या दोनों सजा एक साथ का प्रावधान है।
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Delhi case
- फोटो : अमर उजाला
आईपीसी की धारा 304 : आईपीसी की धारा 304 के तहत गैर इरादतन हत्या का मुकदमा चलता है। इस मामले में अगर कोई दोषी पाया जाता है तो अपराध की गंभीरता के आधार पर आजीवन कारावास और जुर्माना या कठोर कारावास की सजा हो सकती है। हत्या के सभी अपराध गैर इरादतन हत्या की श्रेणी में आते हैं। गैर इरादतन हत्या का दायरा व्यापक होता है और सभी गैर इरादतन हत्याएं, हत्या नहीं होती हैं। गैर इरादतन हत्या वह कार्य है जिसमें किसी व्यक्ति द्वारा किया गया कार्य मृत्यु या शारीरिक चोट का कारण बनता है, जो बिना सोचे- समझे, अनियोजित (अनप्लेंड) संघर्ष में, या किसी के उकसावे के परिणामस्वरूप अनियोजित क्रोध में मृत्यु का कारण बनते है।
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Delhi case
- फोटो : अमर उजाला
आईपीसी की धारा 304 ए : कोई उतावलेपन में या उपेक्षापूर्ण तरीके से किए किसी ऐसे कार्य से किसी व्यक्ति की हत्या करना, जो आपराधिक मानववध की कोटि में नहीं आता। ऐसे मामलों में दो साल तक की जेल, या जुर्माना, या दोनों से दण्डित किया जा सकता है। ये जमानती धाराएं हैं और मजिस्ट्रेट इस मामले की सुनवाई कर सकते हैं।
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मृतका की मां का बयान आया सामने
- फोटो : ANI
आईपीसी की धारा 120 बी: सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आईपीसी की धारा 120बी के तहत आपराधिक साजिश के साथ अपराध करने के लिए समझौते की किसी प्रकार की भौतिक अभिव्यक्ति होनी चाहिए। आम तौर पर, इसमें मामूली आपराधिक घटनाओं को शामिल किया जाता है। दूसरे शब्दों में, हम कह सकते हैं कि यह उन अपराधों की साजिश को कवर करता है जिसमें दो साल से कम कारावास की सजा है। इस प्रकार, धारा नाममात्र की सजा यानि 6 महीने से अधिक की अवधि के लिए कारावास नहीं लगाती है।
तो क्या फांसी की सजा हो सकती है?
इसे समझने के लिए हमने सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता चंद्र प्रकाश पांडेय से बात की। उन्होंने कहा, 'ये घटना बेहद चिंताजनक है। देश की राजधानी में एक युवती के साथ इतनी दर्दनाक घटना होना हर किसी को डराने वाली है। अभी इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट आना बाकी है। इसके बाद काफी हद तक स्थिति साफ हो जाएगी। अभी तक जो मालूम चल रहा है वो ये है कि मामला ड्रंक एंड ड्राइव का है। शराब के नशे में आरोपी गाड़ी चला रहे थे और इसी दौरान ये घटना हुई है। पुलिस ने जो धाराएं लगाईं हैं, उनके अनुसार अगर दोष साबित होता है तो आरोपियों को अधिकतम आजीवन कारावास, कठोर कारावास की सजा मिल सकती है। मतलब फांसी की सजा मिलने की गुंजाइश नहीं है।'