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CP Radhakrishnan: उपराष्ट्रपति पद के लिए BJP ने सीपी राधाकृष्णन को क्यों चुना; क्या विपक्ष में आ सकती है दरार?

Mon, 18 Aug 2025 08:16 AM IST
अभिषेक दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और वर्तमान में महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को एनडीए ने उपराष्ट्रपति पद का उम्मीदवार घोषित किया है। पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने इसकी औपचारिक घोषणा की। इसके साथ ही जीतन राम माझी ने भी एक्स पर पोस्ट करके इस बात जानकारी दी। राधाकृष्णन चार दशक से अधिक समय से राजनीति और सामाजिक जीवन में सक्रिय रहे हैं और उन्हें तमिलनाडु की राजनीति का सम्मानित चेहरा माना जाता है।
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सीपी राधाकृष्णन - फोटो : Amar Ujala
महाराष्ट्र के राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए उम्मीदवार घोषित किया जाना भाजपा की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इसमें जटिल चुनावी गणित और गहरी क्षेत्रीय रणनीति समाहित है। सीपी राधाकृष्णन के नाम का एलान सिर्फ व्यक्तिगत रूप से उनकी वफादारी का इनाम नहीं है, बल्कि यह तमिलनाडु और दक्षिणी राज्यों में अपनी पैठ बढ़ाने के लिए भाजपा के नए प्रयास का संकेत है। यहां भाजपा को अपनी पकड़ बनाने के लिए संघर्ष करना पड़ा है।

यह भी पढ़ें- CP Radhakrishnan: पहले सांसद, फिर राज्यपाल और अब उपराष्ट्रपति की रेस में... ऐसा है सीपी राधाकृष्णन का सफरनामा
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सीपी राधाकृष्णन, एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार - फोटो : अमर उजाला
ऐसे में सवाल यह उठता है कि तमिलनाडु की द्रमुक का सीपी राधाकृष्णन को लेकर रुख क्या होगा? इतिहास में ऐसे कई उदाहरण हैं, जब राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवारों के नामों को लेकर विपक्ष में दरार पड़ चुकी है। द्रमुक के प्रवक्ता टीकेएस एलंगोवन ने भी एनडीए की ओर से उपराष्ट्रपति पद के लिए चुने गए उम्मीदवार को एक अच्छा फैसला बताया। हालांकि, उन्होंने कहा कि द्रमुक विपक्षी गठबंधन का हिस्सा है और वह गठबंधन के फैसले का पालन करेगी।

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सीपी राधाकृष्णन, एनडीए के उपराष्ट्रपति पद के उम्मीदवार - फोटो : X @CPRGuv
फिलहाल द्रमुक का रुख स्पष्ट नहीं
एलंगोवन ने एक सवाल पर कि क्या द्रमुक राधाकृष्णन का समर्थन करेगी? उन्होंने कहा कि यह एक स्वागत योग्य कदम है। वह एक तमिल हैं। लंबे समय के बाद कोई तमिल भारत का उपराष्ट्रपति बन सकता है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की अपनी पसंद है। डीएमके गठबंधन के फैसले के अनुसार काम करेगी।

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प्रतिभा पाटिल, प्रणब मुखर्जी - फोटो : Amar Ujala
पहले भी विपक्ष के खेमे में लग चुकी सेंध
पहले भी जब यूपीए ने राष्ट्रपति पद के लिए प्रतिभा पाटिल को अपना उम्मीदवार बनाया था, तब शिवसेना ने एनडीए का हिस्सा होने के बावजूद उनका समर्थन किया था, क्योंकि वह महाराष्ट्र से थीं। इसी तरह जब यूपीए ने प्रणब मुखर्जी को नामित किया, तो एनडीए में होने के बावजूद शिवसेना और जदयू दोनों ने अपना समर्थन दिया। ऐसे ही जब एनडीए ने रामनाथ कोविंद का नाम प्रस्तावित किया तो जदयू ने विपक्ष में होने के बावजूद उनका समर्थन किया, क्योंकि वे बिहार के राज्यपाल थे।
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जगदीप धनखड़ - फोटो : पीटीआई
धनखड़ के मामले में तृणमूल कांग्रेस ने मतदान से परहेज किया था
उपराष्ट्रपति पद के लिए पिछले चुनाव में जब एनडीए ने जगदीप धनखड़ को चुना था, तो तृणमूल कांग्रेस ने मतदान से परहेज किया था। इसकी वजह थी कि धनखड़ और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बीच अक्सर कई मुद्दों पर तीखी बहस होती थी। चुनाव में धनखड़ सबसे ज्यादा वोट पाकर उपराष्ट्रपति बने। इस बार एनडीए के पास 422 वोट हैं, जबकि पिछले चुनाव में धनखड़ को 528 वोट मिले थे। एक बार फिर बीजेडी, वाईएसआरसीपी और बीआरएस जैसी पार्टियां एनडीए का समर्थन कर सकती हैं, जिनके कुल मिलाकर 22 सांसद हैं।
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सीपी राधाकृष्णन - फोटो : Amar Ujala
द्रमुक के सामने धर्मसंकट जैसी स्थिति
तमिलनाडु में 32 सांसदों वाली और सबसे बड़ी पार्टी द्रमुक के सामने सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि क्या उसे अपने राज्य से आने वाले उम्मीदवार का समर्थन करना चाहिए या नहीं? खासकर ऐसे वक्त पर, जब अगले साल तमिलनाडु में चुनाव होने वाले हैं। अगर राधाकृष्णन निर्वाचित होते हैं, तो वे उपराष्ट्रपति बनने वाले तमिलनाडु के तीसरे नेता बन जाएंगे।

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