कोरोना वायरस: फैक्ट चेक विशेष
- फोटो : Amar Ujala
कोरोना वायरस से जुड़ी गलत जानकारियां इंटरनेट पर वायरल हो रही हैं। इसलिए, अमर उजाला झूठ और भ्रम फैलाने वाली जानकारियों से बचने की सलाह और जानकारी दे रहा है। ऐसे में आपके लिए भी यह जानना जरूरी है कि गलत जानकारियों को फैलने से रोकने के लिए आप क्या कर सकते हैं?
अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को फेक न्यूज को समझने में मदद कीजिए
कोरोना वायरस: फैक्ट चेक विशेष
- फोटो : ग्राफिक्स आर्टिस्ट ईशान जैन, अमर उजाला
1. ठहरकर सोचें
- किसी भी खबर को पढ़ने के बाद उसपर विचार कीजिए।
- रुककर उसके मकसद को समझिए।
- अपने दोस्तों और परिवार के लोगों को फेक न्यूज को समझने में मदद कीजिए।
- अगर आपको किसी भी खबर पर संदेह होता है, उसकी प्रामाणिकता पर शक होता है, तो उसको वायरल मत कीजिए।
- फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सप और अन्य सोशल मीडिया के माध्यम से कोई भी पोस्ट आपको मिलती है तो उसको तुरंत फॉरवर्ड मत कीजिए।
- कुछ समय देकर उसको समझें, पढ़े और विश्लेषण करें फिर सही लगे तो आगे बढ़ाएं।
ऑनलाइन फैक्ट चेकिंग सीखना आज के दौर में बहुत जरूरी है। सभी पत्रकारों और न्यूज रूम के लिए यह एक नितांत आवश्यक कदम है। यह किसी भी कहानी के संपादन के लिए आधारभूत आवश्यकता है।
सुरभि मलिक, डायरेक्टर, गूगल न्यूज इनिशिएटिव इंडिया ट्रेनिंग नेटवर्क , इंटरन्यूज
स्रोत को परखें, जानकारी गलत हो सकती है
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- किसी भी पोस्ट को आगे वायरल करने से पहले उसका सोर्स जरूर जांच लें।
- यह पोस्ट आपको कहां से मिली है, वो कितना प्रामाणिक है या फिर वो आगे से वायरल होती आ रही है।
- कोरोना वायरस से संबधित पोस्ट में झूठ और सच का बहुत ख्याल रखें जैसे, कोरोना वायरस से बचाव के तरीके, नुस्खे आदि पर बिना फैक्ट चेक के विश्वास ना करें।
कोरोना वायरस: भ्रम और बचाव-
ऐसे समय में सरकारी और प्रामाणिक वेबसाइट पर ही विश्वास करें जैसे -
- भारत सरकार की वेबसाइट
- WHO की वेबसाइट
- और भारत सरकार की ही गाइडलाइन का अनुसरण करें।
आपकी सहायता के लिए लिंक शेयर कर रहे हैं-
-https://www.mohfw.gov.in/DraftGuidelinesforhomequarantine.pdf
-www.mohfw.gov.in
-https://www.who.int/emergencies/diseases/novel-coronavirus-2019/events-as-they-happen)
(नोट -कोरोना से जुड़ी हुई कोई भी जानकारी आप इन वेबसाइट से प्राप्त करें।)
आप ऐसे जांच सकते हैं जानकारी की सत्यता को
कोरोना वायरस: फैक्ट चेक विशेष
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जानकारी के बारे में आश्वस्त नहीं हैं तो शेयर ना करें
आप ऐसे जांच सकते हैं जानकारी की सत्यता को -
- फिशिंग साइट्स "http" से शुरू होती है और इसमें लॉक का आइकन नहीं होता है। जबकि सुरक्षित वेबसाइट्स "https" से शुरू होती है और लॉक आइकन के साथ होती है। इसका मतलब है कि वेबसाइट सुरक्षित है।
- सबसे पहले URL की जांच करें इस बात को सुनिश्चित करें कि यह असली साइट है।
- वेब एड्रेस को जांच लें।
- उसके लोगो (प्रतीक चिन्ह) का तुलनात्मक अध्ययन करें।
- उससे मिलती जुलती साइट्स को देखें।
- उसका फॉन्ट, बाईलाइन, टैगलाइन और कलर टोन की जांच पड़ताल करें।
- मुख्य तस्वीर का स्क्रीनशॉट लेकर उसको गूगल रिवर्स इमेज टूल में डालकर सर्च करें।
- उसका अबाउट पेज देखें।
- साइट कब और कहां रजिस्टर की गई है, उसको देखें।
- क्या और किसी प्लेटफार्म पर भी ऐसी खबरें उपलब्ध है इसको देख लें।
- इनफार्मेशन हाइजीन के लिए सबसे महत्वपूर्ण कदम है जागरूकता और सावधानी।
- कोरोना वायरस महामारी के चलते सोशल मीडिया पर फेक न्यूज की बाढ़ आ गई है। ऐसे में बहुत जरूरी है थोड़ी सी सतर्कता और समझदारी बरतने की, जो आपको फर्जी खबरों से बचा सकती है।
'फर्जी खबरों का सबसे विचलित करने वाला हिस्सा यह होता है कि यह लोकतंत्र और इसके संसाधनों पर अविश्वास करती है और हिंसा, घृणा फैलाने का काम करती हैं। भारत में, सोशल मीडिया द्वारा प्रसारित फेक न्यूज नफरत और गलत सूचनाओं का एक प्रमुख चैनल बन गया है। यह चुनौती पैदा कर रहा है।
-सय्यद नजाकत, फाउंडर एंड एडिटर- इन- चीफ, डाटालीडस्
बिना जांच पड़ताल के किसी भी खबर को आगे शेयर ना करें
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हर तथ्य को खुद जांचें
- बिना जांच पड़ताल के किसी भी खबर को आगे शेयर ना करें।
- आप किस को जानते हैं इसलिए उसने सही लिखा होगा यह सोचकर बिलकुल शेयर ना करें।
- सिर्फ इसलिए शेयर ना करें क्योंकि आपको लगता है वो सही है, इससे आप भी उस खबर को वायरल करके नुकसान के भागीदारी बन रहे हैं।
जो फैक्ट्स पोस्ट में दिए गए हैं उनको क्रॉस चेक जरूर करें
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हर तथ्य को अलग-अलग भी जांचें
- वायरल पोस्ट के सभी तथ्यों को अलग-अलग जांचे।
- जो फैक्ट्स पोस्ट में दिए गए हैं उनको क्रॉस चेक जरूर करें।
- अगर किसी विषय से जुड़े तथ्य हैं तो उसके एक्सपर्ट से जरूर जानकारी लें जैसे मेडिकल पोस्ट में मेडिकल एक्सपर्ट की राय।
- सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर तमाम ऐसी जानकारियां होती हैं जिनमे आधा सच आधा झूठ शामिल होता है, ऐसी स्थिति में ज्यादा सतर्क रहें।
जो पोस्ट आप तक आ रही है उसकी हेडलाइन क्या है?
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भावुक पोस्ट के प्रति सचेत रहें
- किसी पोस्ट को पढ़कर आपको गुस्सा आ रहा है, परेशानी महसूस हो रही है या फिर वो आपको उकसा रहा है, इस बात को नोट करें।
- जो पोस्ट आप तक आ रही है उसकी हेडलाइन क्या है?
- हेडलाइन के मतलब को समझें, और वो आर्टिकल क्या बोलना चाहता है उसकी गहराई में जाकर उसको डिकोड करने का प्रयास करें।
- सनसनीखेज और उकसाने वाली हेडलाइन के प्रति सचेत रहें।
- जहां से खबर आई है, उस मुख्य स्रोत को देख लें।
- संबंधित व्यक्ति से सीधे संपर्क करें।
- फेक न्यूज रूप रंग में सच्ची खबर जैसी ही दिखती है मगर उसका मकसद, उसकी भाषा शैली उसका सच भी बता देती है।
सोच समझकर ही खबर की जांच पड़ताल करके आगे बढ़ाएं
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पक्षपात और पूर्वाग्रह के बारे में सोचें
आप जब भी किसी खबर को शेयर करते हैं तो दो बातें आपके मस्तिष्क में होती हैं
- पहली - आप उसको इसलिए शेयर कर रहे हैं क्योंकि आपको लगता है वो सच है?
- दूसरी - या फिर इसलिए क्योंकि आप उससे सहमत हैं।
मगर खबर या सूचना को देखकर ये समझने का प्रयास करें इसमें किसी पक्ष की पैरवी तो नहीं या इसमें संतुलन है। ज्यादातर पोस्ट इसलिए शेयर की जाती हैं कि वो हमारी सोच और पहले से स्थापित मान्यताओं पर आधारित होती है या फिर उनका समर्थन करती है। मगर कोई भी खबर तब सच होती है जब उसमें तथ्य होते हैं और वो प्रामाणिक होती है। राय, अफवाह और सच के अंतर को समझना चाहिए और फिर कोई भी पोस्ट वायरल करनी चाहिए। पक्षपात रहित सोचना चाहिए और इसको समझकर ही खबर की जांच पड़ताल करके आगे बढ़ाएं।
'जब भी कोई वायरल पोस्ट देखें तो सबसे पहले आप प्रतिक्रियाएं देखें। अगर वो नाटकीय या विवादित लगती हैं, तो उन्हें जांचने की जरूरत है। ऐसे में सबसे पहले उस बात या विषय को खोजने की जरूरत है, चाहे उसके लिए आप सर्च इंजन(गूगल) का सहारा लें या फिर सोशल मीडिया का। वहीं अगर आपके सूत्र ऐसे हैं, जिनके बारे में अधिक नहीं जानते हैं तो भी आपको सावधान रहने की जरूरत है।'
'वहीं आपको उन सोर्स से भी सावधान रहने की जरूरत है, जो किसी खास एजेंडा के लिए काम करते हैं। अच्छे फैक्ट चेकर्स की खासियत यही होती है कि उनकी पूरी प्रक्रिया पारदर्शी होती है और सबूत के साथ होती है।'
-इवान स्वीनी ,इंटरनेशनल फैक्ट चेकर और फेसबुक ट्रेनर
सोशल मीडिया पर ये तस्वीर और वीडियो कब वायरल हुआ?
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खुद से करें ये सवाल
जब भी कोई तस्वीर वायरल होकर सामने आती है तो सबसे पहले कुछ साधारण से सवाल खुद से कीजिए।
- सोशल मीडिया पर ये तस्वीर और वीडियो कब वायरल हुआ?
- किसके द्वारा आपको भेजा गया?
- यह तस्वीर कब की है, और कहां पर ली गई है?
- तस्वीर किसके द्वारा ली गई है, उसका सोर्स क्या है ?
- तस्वीर को करीब से देखने पर क्या खास बातें आपको दिखाई देती हैं?
'कोरोना वायरस की खबरों को लेकर सतर्क रहना चाहिए और प्रामाणिक तंत्र पर ही विश्वास करना चाहिए, सोच समझकर, जांच- पड़ताल करके ही खबर शेयर करनी चाहिए।'
अर्चना कुमारी, गूगल फैक्ट चेकर और असिस्टेंट प्रोफेसर, पत्रकारिता विभाग, सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ जम्मू
तस्वीर का सत्यापन
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तस्वीर भी खोलती है पोल
तस्वीर का सत्यापन -
गूगल रिवर्स इमेज रिसर्च टूल का प्रयोग करें।
जिस तस्वीर की सत्यता को जानना है उसका प्रयोग करके सर्च करें।
इस सर्च को दो तरह से किया जा सकता है।
पहला, सर्च करने के लिए इमेज फाइलों का उपयोग करें और लिंक्स को ध्यान से पढ़ें।
दूसरा, सर्च करने के लिए ऑनलाइन से इमेज यूआरएल का उपयोग करें, या फिर सीधे ही तस्वीर को क्रॉप करके उस तस्वीर को अपलोड करें।
तस्वीर को सर्च करने पर बहुत सारे लिंक्स खुल जाएंगे, उनको एक-एक करके देखें।
प्रामाणिक वेबसाइट्स को ही आधार बनाएं।
इनफॉर्मेशन बहुत प्रकार की होती हैं, और इसमें से सही खबर को पहचानना बहुत जरूरी है। जब कोई ऐसी खबर आती है जो घृणा पैदा करती है उसको शेयर या फॉरवर्ड करते समय थोड़ा रुकना चाहिए, सोचना चाहिए और जानना चाहिए इसका मकसद क्या है और इसका असर क्या हो सकता है?
-प्रतीक सिन्हा, ऑल्ट न्यूज फाउंडर
वीडियो का सत्यापन
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वीडियो का सत्यापन कैसे करें
- अगर कोई फेक वीडियो आपके सामने आती है, तो उसका सत्यापन ऐसे करें -
- सबसे पहले इनविड टूल डाउनलोड करें।
- फिर वीडियो से एक तस्वीर लें, उसकी रिवर्स इमेज सर्च करें।
- रिवर्स इमेज सर्च टूल का इस्तेमाल।
- स्मार्ट की-वर्ड का चयन।
- मजबूत अवलोकन क्षमता के द्वारा।
- सबसे महत्वपूर्ण पुराने समय का पत्रकारिता कौशल (ओल्ड स्कूल जर्नलिज्म)।
तस्वीर या वीडियो में यह संकेत बताते हैं सच
कोरोना वायरस: फैक्ट चेक विशेष
- फोटो : ग्राफिक्स आर्टिस्ट ईशान जैन, अमर उजाला
- इमारत: टोपोग्राफी (भौगोलिक स्थिति): सैटेलाइट मैप या गूगल अर्थ का उपयोग किया जा सकता है।
- चिह्न: झण्डे, लोगो, बैज आदि किसी भी क्षेत्र की पहचान करने में सहायता करते हैं। इनसे पता चल सकता है कि तस्वीर या वीडियो कहां से संबंधित हैं।
- नंबर प्लेट: वाहन रजिस्ट्रेशन प्लेट्स भौगोलिक स्थान की तुरंत पहचान करने में बहुत मदद कर सकती हैं। नंबर प्लेट के द्वारा उस स्थान का पता लगाया जा सकता है।
- मौसम: तस्वीर में दिखाई दे रहे मौसम पर जरूर ध्यान देना चाहिए।
- कमेंट्स: इस बात की संभावनाएं बहुत होती हैं कि सोशल मीडिया पर कोई ना कोई ऐसा व्यक्ति जरूर होगा, जो आपको असली तस्वीर तक पहुंचा सकता है।
- वस्त्रों के माध्यम से: वस्त्रों के माध्यम से संस्कृति और भौगोलिक स्थान की पहचान की जा सकती है।
- साइन बोर्ड: साइन पोस्ट, बैनरों और बिलबोर्डों पर लिखा टेक्स्ट भी हमारी मदद कर सकता है। इनसे जगह के बारे में जानकारी मिल सकती है।
कोरोना वायरस को लेकर बहुत वीडियो और तस्वीर गलत जानकारियों के साथ वायरल हो रही है उनमें आप खुद यह तकनीक इस्तेमाल करें।
आप भी रोक सकते हैं फेक न्यूज को वायरल होने से, कीजिए 'इनफार्मेशन हाईजीन'
कोरोना वायरस: फैक्ट चेक विशेष
- फोटो : ग्राफिक्स आर्टिस्ट ईशान जैन, अमर उजाला
2 अप्रैल को पूरी दुनिया में इंटरनेशनल फैक्ट चेक दिवस मनाया जाता है, जिसका लक्ष्य है फेक न्यूज को हराना। सोशल मीडिया पर फेक न्यूज खूब वायरल हो रही है। आज कोरोना वायरस के चलते फैक्ट चेक की जरूरत बहुत ज्यादा है। हमें केवल कोरोना वायरस के संक्रमण से ही नहीं इससे जुड़ी हर फेक न्यूज और भ्रामक जानकारियों से भी लड़ना है। खबरों को भी झूठे तथ्यों के संक्रमण से बचाना है।
कोरोना वायरस और फेक न्यूज से सावधानी ही बचाव है।