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Assam Flood: केंद्र ने असम की बाढ़ को 'गंभीर प्राकृतिक आपदा' घोषित किया, हिमंत बिस्व सरमा बोले- पुनर्वास का 90 फीसदी देगा केंद्र

Sat, 16 Jul 2022 11:20 PM IST
निर्मल कांत न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गुवाहाटी

सार

केंद्र सरकार ने असम में इस साल की बाढ़, संभवत: राज्य के इतिहास में सबसे खराब बाढ़ को गंभीर प्राकृतिक आपदा घेषित किया है। केंद्र सरकार बाढ़ प्रभावितों की मदद के लिए फंड भी मुहैया कराएगी। 
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असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा - फोटो : twitter.com/himantabiswa
केंद्र ने इस साल की असम बाढ़ को 'गंभीर प्राकृतिक आपदा' घोषित किया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने शनिवार को यहां यह बात कही। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार प्रभावित लोगों को हो रही कठिनाइयों को कम करने के लिए धन मुहैया करा रही है। उन्होंने कहा कि केंद्र राहत और पुनर्वास के खर्च का 90 प्रतिशत वहन करेगा।
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केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने दिया मदद का आश्वासन

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असम में बाढ़ से हाहाकार - फोटो : Social media
जलप्रलय में अपनी पाठ्यपुस्तकें खो चुके छात्रों को 1,000 रुपये का एकमुश्त भुगतान प्रदान करने के लिए एक योजना शुरू करने के बाद प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'लोगों की कठिनाइयों को कम करने और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए जो कुछ भी जरूरी है' प्रदान करने का आश्वासन दिया है।
 
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बाढ़ से राज्य की एक तिहाई आबादी प्रभावित

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असम में बाढ़ से हाहाकार - फोटो : Social media
असम में 6 अप्रैल से बाढ़ की दो लहरें देखी गई हैं, दूसरी विनाशकारी रही है, जिससे 90 लाख लोग या राज्य की एक तिहाई आबादी प्रभावित हुई है, जबकि 195 लोग अपनी जान गंवा चुके हैं और 37 लोग अभी भी लापता हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, "हमने इतनी बड़ी बाढ़ नहीं देखी थी। हमारी प्राथमिकता प्रभावित लोगों को राहत शिविरों में पहुंचाना, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करना, चिकित्सा सहायता प्रदान करना और पानी घटने के बाद उन्हें घर लौटने में मदद करना था। यह कार्य चुनौतीपूर्ण था।" 

सरमा ने कहा कि 98,500 से अधिक लोगों को निकाला गया, जबकि 7,42, 250 लोग विस्थापित हुए और उन्होंने राहत शिविरों में शरण ली।

राहत शिविरों में रह रहे छात्रों को एक हजार रुपये प्रदान करने का निर्णय

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बाढ़ से विस्थापित हुए लोग - फोटो : पीटीआई
उन्होंने आगे कहा, "पहली बार, राज्य सरकार ने घर लौटने वालों को 'बर्तन अनुदान' के रूप में प्रति परिवार 3,800 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान करने के लिए एक कदम उठाया है। लगभग 1,89,752 परिवारों की पहचान की गई है और राशि का भुगतान किया गया है। उन सभी 35,000 परिवारों को हस्तांतरित किया गया, जिनके बैंक विवरण अभी संसाधित किए जाने हैं।"

उन्होंने कहा, "राज्य सरकार ने राहत शिविरों में रहने वाले प्रत्येक छात्र को एकमुश्त अनुदान के रूप में 1,000 रुपये प्रदान करने का भी निर्णय लिया है और उनमें से 1,01,537 की पहचान की गई है।" "मुख्यमंत्री राहत कोष से 10.10 करोड़ रुपये की राशि इस उद्देश्य के लिए वितरित की गई है और आज के शुभारंभ के साथ छात्रों को उनके बैंक खातों में राशि प्राप्त होगी।" 
 
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23 से 30 जुलाई तक ग्राउंड में रहेंगे मंत्री और सचिव

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असम में बाढ़ - फोटो : PTI
इसके अलावा, शिक्षा विभाग उन छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तक प्रदान करेगा, जिनकी किताबें बाढ़ में खो गई हैं। राज्य सरकार ने इस साल बाढ़ में मारे गए लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रुपये का मुआवजा भी प्रदान किया है। क्षतिग्रस्त मकानों का चल रहा आकलन 20 जुलाई तक चलेगा। जिसके बाद संबंधित मंत्रियों और सचिवों द्वारा सत्यापन किया जाएगा जो 20 से 30 जुलाई तक मैदान पर रहेंगे।
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बाढ़ में पूरी तरह बह गए 25,670 घर

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असम में बाढ़ - फोटो : PTI
उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, 3,03,930 घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनमें 25,670 पूरी तरह से और 2,78,260 आंशिक रूप से शामिल हैं, जिसमें कछार जिले में सबसे अधिक 1,75,618 क्षतिग्रस्त घर हैं। सरमा ने कहा कि मुआवजा 16 अगस्त तक दिए जाने की उम्मीद है और इसके लिए 400 करोड़ रुपये की राशि वितरित की जाएगी। उन्होंने कहा, "हम उन लोगों को मुआवजा प्रदान करने के लिए एक नई श्रेणी शामिल करने का भी प्रयास कर रहे हैं जिनके घर पूरी तरह से बह गए हैं, जो मुख्यमंत्री राहत कोष से दिया जाएगा।"
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क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के लिए 1000 करोड़ रुपये की आवश्यकता

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असम में बाढ़ - फोटो : PTI
उन्होंने आगे कहा, "तटबंधों, सड़कों, पुलों, स्कूलों, सरकारी भवनों और आंगनबाडी केंद्रों जैसे क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे का आकलन और पुनर्निर्माण अगस्त में किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए अनुमानित 1,000 करोड़ रुपये की आवश्यकता हो सकती है जिसे हमें सितंबर तक मंजूरी मिलने की उम्मीद है।"

सरमा ने कहा, "स्थिति चुनौतीपूर्ण है लेकिन हमने संगठित तरीके से इससे निपटा है। हमने किसी बिचौलिए को शामिल नहीं किया है लेकिन राशि सीधे लाभार्थियों को हस्तांतरित की जा रही है।"

राज्य सरकार को प्राप्त हो रहा आवश्यक धन : सरमा

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असम में बाढ़ - फोटो : पीटीआई
यह पूछे जाने पर कि क्या बाढ़ को 'राष्ट्रीय समस्या' घोषित किया जाना चाहिए, मुख्यमंत्री ने कहा कि कुछ सामाजिक संगठनों ने ऐसी मांग रखी है, लेकिन केंद्र पहले ही असम की बाढ़ को "गंभीर प्राकृतिक आपदा" घोषित कर चुका है और राज्य सरकार को इससे निपटने के लिए आवश्यक धन प्राप्त हो रहा है।
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सांकेतिक फोटो - फोटो : iStock
जापानी इंसेफेलाइटिस से चार और मौतें
असम में शनिवार को जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) से चार और लोगों की मौत हो गई। इसके साथ ही इस महीने इस बीमारी से जान गंवाने वालों की संख्या बढ़कर 27 हो गयी। राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग के मुताबिक, राज्य में आज नौ नए मामले दर्ज किए गए, जिससे इस महीने इस बीमारी से पीड़ित होने वालों की कुल संख्या 169 हो गई। आयोग के मुताबिक, सभी चार मौतें जोरहाट जिले में हुई हैं। गोलाघाट जिले से तीन, शिवसागर और सोनितपुर से दो-दो और गोलपाड़ा और कोकराझार जिलों से एक-एक मामले सामने आया।
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