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Budget 2022: पाक-चीन की नजदीकियों के बीच देश के रक्षा बजट पर नजर, क्या सेना के लिए होंगे बड़े एलान?

Sun, 30 Jan 2022 12:30 PM IST
सुभाष कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पाक-चीन गठजोड़ के बीच इस साल के रक्षा बजट में बड़े एलान हो सकते हैं। अमर उजाला आपको बता रहा है कि क्या है देश के रक्षा क्षेत्र की जरूरतें और कितना हो सकता है इस बार देश का रक्षा बजट?
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Budget 2022 - फोटो : Amar Ujala
केंद्र सरकार एक फरवरी 2022 को देश की संसद में इस साल का बजट पेश करेगी। इसे लेकर अलग-अलग सेक्टरों के विशेषज्ञों ने कयास लगाने शुरू भी कर दिए हैं। सभी को उम्मीद है कि इस बार उनके सेक्टर के लिए केंद्र सरकार बड़े एलान करेगी। ऐसी उम्मीदें रखना लाजमी भी है, क्योंकि आने वाले एक साल तक उनके लिए सभी विकास कार्य इसी बजट की राशि से होंगे। इन सब के बीच रक्षा बजट भी एक ऐसा विषय है, जिस पर देशवासियों की निगाहें टिकी हुई हैं। पाक-चीन के बीच बढ़ता गठजोड़ भारत के लिए खतरे का संकेत है। इसी वजह से इस साल के रक्षा बजट में बड़े एलान हो सकते हैं। अमर उजाला आपको बता रहा है कि क्या है देश के रक्षा क्षेत्र की जरूरतें और इस बार कितना हो सकता है देश का रक्षा बजट?
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MIG-21 - फोटो : Social Media

क्या हैं रक्षा क्षेत्र की वर्तमान जरूरतें?

21वीं सदी में रक्षा क्षेत्र की जरूरतें भी आधुनिक हो गई हैं। भारतीय थल सेना, वायु सेना और नौसेना सभी की अपनी जरूरतें हैं। तीनों सेनाओं की मशीनरी बड़े स्तर पर पुरानी पड़ चुकी हैं। सेना की ज्यादातर बंदूकें, तोप अब भी 90 के दशक वाली ही हैं। नौसेना की पनडुब्बियां पुरानी हो चुकी हैं तो वायुसेना के मिग-21 जैसे विमान फ्लाइंग कॉफिन बन चुके हैं। इन सभी बदलाव के लिए अच्छे-खासे बजट की आवश्यकता है। ऐसे में सेना भी रक्षा बजट से काफी उम्मीदें लगाए बैठी है।
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भविष्य की जरूरत - फोटो : pti

भविष्य में बड़ी खरीद की मांग

सेना के तीनों अंगों को नए विमानों, पनडुब्बियों और हथियारों की जरूरत है। वायुसेना को 114 विमानों की एमआरएफए डील और भविष्य के 5वीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को अपने बेड़े में शामिल कराना है। इसके अलावा सेना को बड़ी संख्या में मालवाहक विमानों की भी आवश्यकता है। नौसेना को हाल ही में निर्मित स्वदेसी युद्धपोत आईएनएस विक्रांत के लिए नए लड़ाकू विमान और हेलीकॉप्टरों की जरूरत है। हिंद महासागर में चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण अब बड़ी सैन्य खरीदारी की जरूरत है। हाल ही में सरकार ने कई रक्षा सौदों पर मुहर लगाई है, लेकिन दुनिया की चौथी सबसे ताकतवर सेना के लिए इतने इंतजाम अब भी नाकाफी हैं।

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भारत के मुकाबले चीन - फोटो : iStock

क्या कहते हैं पुराने आंकड़े?

भारत की सैन्य शक्ति दुनिया में चौथे स्थान पर है और हमारा रक्षा बजट अमेरिका और चीन के बाद दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा रक्षा बजट है। बीते साल 2021-2022 के लिए सरकार ने रक्षा बजट 4.78 लाख करोड़ रुपये का रखा था। इससे पहले साल 2020-2021 में यह बजट 4.71 लाख करोड़ रुपये का था। चीन से सीमा पर बढ़ रहे तनाव के मद्देनजर विशेषज्ञों ने बीते साल अच्छे खासे रक्षा बजट का अंदाजा लगाया था। हालांकि, इसमें 1.4 फीसदी की मामूली बढ़ोतरी ही की गई। इस दौरान चीन ने अपने बजट में 6.8 फीसदी का भारी इजाफा किया। चीन का सैन्य बजट भारत के मुकाबले करीब चार गुना ज्यादा है।

साल दर साल सैन्य बजट में बढ़ोतरी की रफ्तार धीमी पड़ी

साल कुल बजट (रुपये में)
2015 2 लाख 47 हजार करोड़
2016  3 लाख 41 हजार करोड़
2017 3 लाख 60 हजार करोड़
2018 4 लाख 4 हजार करोड़
2019  4 लाख 31 हजार करोड़
2020  4 लाख 71 हजार करोड़
2021 4 लाख 78 हजार करोड़


 
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रक्षा मंत्रालय - फोटो : Social Media

दुनिया के मुकाबले कहां हैं हम?

भारत का रक्षा बजट दुनिया में तीसरा सबसे बड़ा बजट तो है, लेकिन अगर हम बजट के फीसदी को जीडीपी के हिसाब से आंके तो यह कहानी कुछ और ही बयां करती है। देश के रक्षा बजट का बड़ा हिस्सा सैनिकों की पेंशन और वेतन में ही चला जाता है। इसके बाद बची रकम से सेना की सभी जरूरतें पूरी नहीं हो पाती हैं। बीते साल भारत का रक्षा बजट जीडीपी का 2.21 फीसदी रहा था। चीन का भी बजट जीडीपी के दो फीसदी से कम तो है, लेकिन उसकी जीडीपी भारत के मुकाबले चार गुना ज्यादा बड़ी है। वहीं, अमेरिका का रक्षा बजट जीडीपी के 3.7 प्रतिशत के करीब है। जीडीपी के हिसाब से रक्षा पर खर्च करने के मामले में ओमान और इस्राइल जैसे देश हमसे कहीं आगे हैं।

क्या होता है रेवेन्यू एक्सपेंडेचर और कैपिटल एक्सपेंडेचर?

सेना को मिलने वाले बजट में करीब तीन हिस्से होते हैं। पेंशन-वेतन, पुराने हथियारों का रखरखाव और नए हथियार-उपकरणों की खरीद। रेवेन्यू एक्सपेंडेचर के अंतर्गत पेंशन-वेतन और पुराने हथियारों का रखरखाव आता है। वहीं, कैपिटल एक्सपेंडेचर के अंतर्गत नए हथियार और उपकरणों की खरीद आती है। 
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defense budget 2022 - फोटो : Social Media

प्रमुख देशों के रक्षा बजट

देश रक्षा बजट
अमेरिका 740 अरब डॉलर
चीन 209 अरब डॉलर
भारत 71 अरब डॉलर
रूस 49 अरब डॉलर
पाकिस्तान 9 अरब डॉलर
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Indian Defence Budget 2022 - फोटो : Amar Ujala

क्यों जरूरत है बड़े रक्षा बजट की?

पुरानी कहावत है कि जब आपके पास ताकत हो तो सभी आपके दोस्त होते हैं और कोई भी आपको छेड़ने की गुस्ताखी नहीं करता, लेकिन अगर आप कमजोर हो गए तो हर कोई आप पर हमले की कोशिश करता है। भारत ने कभी अपनी शक्तियों का गलत इस्तेमाल नहीं किया, लेकिन शायद ही दुनिया में ऐसा कोई देश हो, जिसकी सामरिक चुनौतियां भारत की तरह जटिल हों। एक ओर चीन की बढ़ती आक्रामकता तो दूसरी ओर अपने अस्तित्व में आने के ठीक बाद से ही भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों में लगा हुआ पाकिस्तान, दोनों ही भारत के खिलाफ अपनी स्थिति मजबूत बनाने की कोशिश में लगे हुए हैं। 1962 का युद्ध गवाह है कि भारत की कमजोर सैन्य शक्ति देखकर चीन ने हमारे बड़े भू-भाग (अक्साई चीन) पर कब्जा कर लिया था। इस युद्ध के ठीक बाद भारत को कमजोर मानकर पाकिस्तान ने भी 1965 में हमला किया। हालांकि, उसे मुंह की खानी पड़ी।

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China-Pakistan - फोटो : Social Media

चीन-पाकिस्तान भारत के खिलाफ आ रहे साथ

हाल ही में चीन और पाकिस्तान भारत के खिलाफ अपने खतरनाक मंसूबों को पूरा करने के लिए साथ आ रहे हैं। चीन ने भारत की पूर्वी सीमा के करीब बड़े स्तर पर सैन्य और आधुनिक हथियारों की तैनाती कर रखी है। वहीं, पश्चिमी सीमा पर पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर समेत पंजाब आदि राज्यों में आतंक को बढ़ावा देकर भारत को नुकसान पहुंचाने की कोशिशों में लगा हुआ है। चीन ने भारत के खिलाफ पाकिस्तान को बड़े स्तर पर सैन्य मदद भी मुहैया कराई है। इसके अलावा चीन भारत के चारों तरफ घेरा बनाने की कोशिशों में लगा हुआ है। इसका तोड़ कूटनीति और  बड़ा सैन्य बजट ही हो सकता है। 
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Indian Defence Budget 2022 - फोटो : PTI

क्या हो सकता है इस साल का बजट?

चीन और पाकिस्तान के दोहरे खतरे को देखते हुए भारत की जरूरत है कि रक्षा बजट में बड़ी बढ़ोतरी की जाए। अगर पुराने आंकड़ों को देखें तो इसके आसार कम ही नजर आते हैं। चीनी सेना के आक्रामक होते रवैये के बाद भी बीते वर्ष रक्षा बजट में मामूली बढ़ोतरी ही हुई थी। कोरोना महामारी के प्रकोप ने भी देश की अर्थव्यवस्था को काफी नुकसान पहुंचाया है। देश की अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट तो रही है, लेकिन इसमें अब भी कुछ समय लगेगा। इन सभी का प्रभाव इस साल के बजट पर भी देखने को मिल सकता है। हालांकि, सेना की वर्तमान जरूरत को देखते हुए साल 2022 के बजट में रक्षा क्षेत्र के लिए पांच लाख करोड़ से अधिक के बजट की उम्मीद है।  
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