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ब्रिक्स समिट: मेहमानों की मेज पर सजेगी जयपुर की कारीगरी, बनाया खास सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर; कैसे हैं डिजाइन?

Sat, 12 Sep 2026 06:38 AM IST
निर्मल कांत आईएएनएस, जयपुर

सार

ब्रिक्स समिट में दुनिया के बड़े नेताओं के स्वागत की तैयारी खास अंदाज में हो रही है। मेहमानों की मेज पर जयपुर की कारीगरी और आधुनिक तकनीक का संगम दिखेगा। 300 कारीगरों ने आखिर क्या-क्या तैयार किया है? पढ़िए रिपोर्ट
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भारत में ममेहमानों का स्वागत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए दुनिया के 20 देशों से मेहमान पहुंच रहे हैं। उनके स्वागत के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। खाने से लेकर उसे परोसने तक, हर चीज में भारतीय संस्कृति और कारीगरी की झलक दिखेगी। इसी खास मेहमाननवाजी के लिए जयपुर के करीब 300 कारीगरों ने सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की है। इनके डिजाइन में पारंपरिक कारीगरी के साथ आधुनिक तकनीक का मेल देखने को मिलेगा।
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जयपुर की शाही कारीगरी - फोटो : आईएएनएस
ब्रिक्स समिट के दौरान जब दुनिया के प्रमुख देशों के प्रतिनिधि दिल्ली में एक साथ बैठेंगे, तो मेज पर परोसा जाने वाला भोजन ही खास नहीं होगा, बल्कि उसे परोसने के लिए इस्तेमाल होने वाला टेबलवेयर भी आकर्षण का केंद्र बनेगा। इस खास मेहमाननवाजी में जयपुर की पारंपरिक कारीगरी और आधुनिक तकनीक का अनूठा मेल दिखाई देगा।
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जयपुर की शाही कारीगरी - फोटो : आईएएनएस
अरुण्स ग्रुप के सीईओ अरुण पाबुवाल और डायरेक्टर अंतरा पाबुवाल ने बताया कि ब्रिक्स समिट में विदेशी और विशेष मेहमानों के लिए खास सिल्वर-प्लेटेड टेबलवेयर और कटलरी तैयार की गई है। इसे तैयार करने में करीब 300 कारीगरों की टीम ने काम किया। इन उत्पादों में पारंपरिक हस्तकला के साथ आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।

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जयपुर की शाही कारीगरी - फोटो : आईएएनएस
अरुण पाबुवाल ने आईएएनएस को बताया कि समिट में परोसे जाने वाले अलग-अलग व्यंजनों के लिए टेबलवेयर का डिजाइन भी अलग रखा गया है। यानी मेहमान के स्वागत में परोसे जाने वाले पेय से लेकर भोजन और अंत में स्वीट डिश तक, हर चरण के लिए विशेष डिजाइन तैयार किए गए हैं। टेबलवेयर का डिजाइन इस बात को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है कि उसमें किस तरह का भोजन परोसा जाएगा। यदि रूसी व्यंजन परोसा जाता है तो उसके अनुरूप डिजाइन होगा, जबकि भारतीय व्यंजनों के लिए भारतीय शैली और सौंदर्य को ध्यान में रखा गया है।
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जयपुर की शाही कारीगरी - फोटो : आईएएनएस
अंतरा पाबुवाल की मानें तो ब्रिक्स के लिए तैयार किए गए उत्पादों को बनाने की पूरी प्रक्रिया में करीब चार से पांच महीने लगे। इसमें डिजाइनिंग, प्रोटोटाइप तैयार करने से लेकर अंतिम उत्पादन तक की प्रक्रिया शामिल रही। उन्होंने बताया कि शुरुआत में कुछ निश्चित उत्पादों की जरूरत बताई गई थी, लेकिन बाद में जरूरत के अनुसार नए आइटम जुड़ते गए। करीब 60 से 70 अलग-अलग तरह के आइटम तक इस प्रोजेक्ट में शामिल किए गए।
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जयपुर की शाही कारीगरी - फोटो : आईएएनएस
उन्होंने कहा कि कई उत्पाद ऐसे भी थे, जिन्हें टीम ने इससे पहले नहीं बनाया था। इनमें एक विशेष 'शॉल ट्रे' भी शामिल है, जिसका इस्तेमाल मेहमानों को शॉल या जरूरत पड़ने पर कंबल जैसी वस्तु प्रस्तुत करने के लिए किया जा सकता है। इस पूरे कलेक्शन में एक बड़ा फिंगर बाउल भी खास है। इसे विशेष जरूरत को ध्यान में रखकर डिजाइन किया गया। सामान्य आकार के फिंगर बाउल की तुलना में इसका आकार बड़ा रखा गया, ताकि मेहमान आराम से इसका इस्तेमाल कर सकें।
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ब्रिक्स समिट मेहमानों के लिए खास भारतीय व्यंजन - फोटो : Ai
उन्होंने बताया कि डिजाइन तैयार करने से पहले आयोजन की जरूरतों और कॉन्सेप्ट को समझा गया। इसके बाद टीम ने अपनी ओर से डिजाइन कॉन्सेप्ट प्रस्तुत किए और पसंद किए गए डिजाइन को प्रोटोटाइप और फिर उत्पादन के चरण तक पहुंचाया।

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ब्रिक्स समिट मेहमानों के लिए खास भारतीय व्यंजन - फोटो : Ai
अरुण पाबुवाल ने आगे बताया कि इतने बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजन के लिए काम करने में सबसे बड़ी चुनौती केवल उत्पाद तैयार करना नहीं, बल्कि हर बार खुद से बेहतर करने की कोशिश रही। करीब तीन महीने से अधिक समय तक डिजाइन और विकास पर लगातार काम किया गया, जबकि पूरे सप्लाई प्रोजेक्ट की अवधि चार से पांच महीने तक रही। पहले किए गए काम से बेहतर और अलग डिजाइन तैयार करना ही सबसे बड़ी चुनौती थी। पारंपरिक कारीगरी को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़कर इस चुनौती को पूरा करने का प्रयास किया गया।
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