बरसाने के हर घर में लट्ठ तैयार किए जा रहे हैं। इन्हीं से लट्ठमार होली जो खेली जानी है। महिलाएं बाकायदा लट्ठ चलाने का अभ्यास कर रही हैं। वहीं बरसाने से बमुश्किल नौ किलोमीटर दूर बसे नंदगांव में ढाल तैयार की जाएंगी। तेल की मालिश करके इसे चमकाया जाएगा।
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कई जगह तो बुजुर्ग इस काम में जुट भी गए हैं। हालांकि लोगों का कहना है कि महाशिवरात्रि के बाद सभी जगह तैयारियां तेज हो जाती हैं।बरसाने की लट्ठमार होली की देश ही नहीं विदेशों तक धूम रहती है।
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ब्रज के इस महोत्सव की एक पखवाड़े पहले से ही तैयारियां शुरू हो जाती हैं। बरसाना में छह मार्च को लट्ठमार होली का भव्य आयोजन होगा। रंग और गुलाल के ऐसे गुबार छाएंगे कि आसमान भी होली के रंग में रंगा नजर आए।
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बता दें कि लट्ठमार होली में बरसाना की गोपी स्वरूप महिलाएं लट्ठ लेकर नंदगांव के कृष्ण स्वरूप ग्वालों के साथ होली खेलती हैं। इसमें प्रेम पगीं लाठियों से नंदगांव से आई हुरियारों की टोली पर प्रहार किया जाता है। हुरियारे ढाल की मदद से लाठियों से खुद का बचाव करते हैं। इसी बीच रंग भी उड़ाया जाता है। ऐसे में बरसाना के घर-घर में लट्ठ तैयार किए जा रहे हैं।
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जमुना देवी ने बताया कि वह करीब 50 साल से लगातार होली खेलती आ रही हैं। इस साल के लिए भी तैयारियां हो रही हैं। लठ को तेल लगाकर तैयार करेंगे।
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शीला देवी का कहना है कि यह एक भाव का त्योहार है। बरसाना की महिलाएं सखी भाव में होली खेलती हैं। वह पिछले 19 साल से होली खेल रही हैं। मुन्नी देवी का कहना है कि लट्ठ चलाने का रिहर्सल किया जाता है। भीड़ में लट्ठ चलाना कोई आसान नहीं है। यह भी ध्यान रखा जाता है कि किसी को कोई नुकसान न हो।
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नंदगांव में बरसाना के लट्ठ से बचने के लिए ढाल तैयार की जाएंगी। नंदगांव निवासी ब्रजेंद्र शास्त्री का कहना है कि ढाल को आकर्षक ढंग से तैयार किया जाता है। तेल लगाकर चमकाया जाएगा। जब लट्ठमार होली में बरसाना की महिलाएं लट्ठ चलाती हैं तो इसी ढाल से वो लोग अपना बचाव करते हैं।
उमेश गोस्वामी का कहना है कि नंदगांव से बड़ी संख्या में लोग बरसाना में होली खेलने के लिए जाते हैं। सभी अपनी अपनी ढाल लेकर पहुंचते हैं। दीपक कुमार का कहना है कि ढाल आर्डर पर तैयार कराई जाती है। चमड़े से बनाई जाती है। ढाल का प्रयोग करना भी सीखना पड़ता है।