खुदादादपुर और अन्य गांवों में शनिवार को भड़की हिंसा के मामले में सरायमीर और निजामाबाद थानों में नौ मुकदमों में 1100 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इन पर मारपीट, लूटपाट, आगजनी, सड़क जाम करने, धार्मिक उन्माद फैलाने और हिंसा करने का आरोप है। हालांकि मंगलवार को उपद्रव वाले क्षेत्रो में स्थिति नियंत्रण में रही और कोई नई घटना नहीं हुई। अर्धसैनिक बल मुख्य सड़कों के अलावा गांवों में अंदर भी गश्त कर रहे हैं। इस बीच तमाम लोग पुलिस कार्रवाई के भय से गांव छोड़कर चले गए हैं। उधर, लापरवाही के आरोप में निजामाबाद के थानाध्यक्ष विवेक यादव को लाइन हाजिर कर दिया गया है। जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने दावा किया है कि स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
निजामाबाद क्षेत्र में पिछले चौबीस घंटे से शांति है। पुलिस ने सोमवार की रात विभिन्न गांवों में छापेमारी कर उपद्रवियों की तलाश की। क्षेत्र की स्थिति पर नजर रखने के लिए लखनऊ से आए उच्चाधिकारी जिले में डेरा डाले हुए हैं।13, 14 और 15 मई को हुए उपद्रव में क्षेत्र के लोगों को हुए नुकसान के अलावा राहगीर भी चपेट में आए थे। सोमवार को विभिन्न थानों में दर्ज मुकदमों में जौनपुर के अलावा जनपद के अलग-अलग इलाकों के लोगों ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि वह अपने काम से संबंधित थाना क्षेत्र से जा रहे थे, उपद्रवियों ने पकड़कर न केवल उन्हें पीटा बल्कि उनके साथ लूटपाट भी की गई। नेवादा में दो लोगों को धमकाने की शिकायत मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंच गई। मंगलवार की दोपहर आईजी वाराणसी जोन एसके भगत, एसटीएफ के आईजी रामकुमार, डीएम और एसपी ने फरिंहा पुलिस चौकी पर डेढ़ घंटे तक बैठक कर पूरे घटनाक्रम पर मंथन किया। इसके बाद अधिकारी निजामाबाद थाने पर गए। जिलाधिकारी सुहास एल वाई ने कहा कि हालात काबू में है। अधिकारियों की टीम गांवों में भेजकर उपद्रव के बाद लोगों में पैदा हुए भय को दूर करने का प्रयास किया जा रहा है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
जिले के निजामाबाद थाना क्षेत्र के खुदादादपुर गांव निवासी मुसाफिर और दानिश के बीच हुए विवाद में पुलिस की निष्क्रियता के चलते घटना ने हिंसक रुप अख्तियार कर लिया। इसका परिणाम हुआ कि इस घटना की जद में गांव के साथ पूरा क्षेत्र आ गया। साथ ही प्रशासन तो हलाकान नजर आया, लेकिन आसपास के गांव का हर व्यक्ति दहशत में है। फरिहां से करीब तीन किमी दूर खुदादादपुर ही नहीं आठ किमी दूर मौजूद सरायमीर बाजार पुलिस छावनी में तब्दील हो गया।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
मंगलवार को खुदादापुर गांव पहुंचने पर पता चला कि 3 मई को दानिश और मुसाफिर के बीच मारपीट की जो घटना हुई, उसमें मुसाफिर ने रिपोर्ट दर्ज कराई। लेकिन इस लंबे अंतराल में पुलिस कोई कार्रवाई नहीं की। लेकिन शुक्रवार को जिस दिन हिंसा भड़की, उस दिन मुसाफिर पल्सर बाइक पर दो साथियों के साथ खुदादादपुर गांव पहुंचा, वहां उसका सामना विरोधी दानिश से हुआ। दानिश डर गया और भागकर थोड़ी दूर स्थित वालीबाल ग्राउंड पर पहुंच गया। जहां गांव के कुछ युवक पहले से मौजूद थे। दानिश ने मुसाफिर के साथ बाहरी लोगों की मौजूदगी बताया। अभी लोग कुछ समझ पाते की मुसाफिर एक दरोगा और अपने साथियों के साथ वहां पहुंच भी गया। ग्रामीणों की मानें तो पुलिस की मौजूदगी में मुसाफिर और दानिश के बीच विवाद शुरू हुआ नौबत मारपीट की आ गई। जो बाद में इतनी बढ़ गई कि आरएएफ, एसटीएफ के जवानों समेत भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।
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- फोटो : ब्यूरो/अमर उजाला, आजमगढ़
जिले में फरिहां से लेकर सरायमीर के बीच का हिस्सा आम की बाग के लिए काफी मशहूर है। खुदादादपुर गांव के चंद सिरफिरों की वजह से उपजी हिंसा का परिणाम रहा कि शनिवार की शाम एक बड़ी भीड़ बदले की भावना से गांव के पूर्वी छोर से होकर धावा बोल दी। इस दौरान रास्ते में जो भी मिला वह उस भीड़ की भेंट चढ़ा। इसमें हाल ही में लगाए गए आम के बाग को भी आक्रोशित भीड़ ने रौद दिया। बाग खुदादादपुर गांव निवासी तौफिक की थी। वहां मौजूद उसकी म़डई भी जला दी गई। शुक्रवार की घटना के बाद दूसरे दिन शनिवार को खुदादादपुर गांव निवासी सहनुल्लाह की बेटी की कुलसुम की शादी थी। बारात महम्मदपुर से आई थी। तभी झगड़े के बाद एक बड़ी भीड़ गांव पर चढ़ गई। इस दौरान शादी की रस्म कुछ देर के लिए ठप पड़ गई। गांव में आने वाले रिश्तेदार घटना से भयभीत हो गए।
खुदादादपुर, वनगांव क्षेत्र में हुई हिंसक घटनाओं से इलाके के लोग दहशत में हैं। बाहर निकलने से परहेज कर रहे लोग अपने घरों में सिमटे हुए हैं। स्कूल बंद हैं लेकिन महिलाएं खेलने के लिए बच्चों को बाहर नहीं भेज रही हैं। दोनों समुदायों के लोग घर में भी कैद रहने जैसा महसूस कर रहे हैं। सभी चाहते हैं कि माहौल पूरी तरह से शांत हो ताकि वे सहज जिंदगी जी सकें। फरिहां से लेकर सरायमीर तक का इलाका संगीनों के साये में हैं। दिन में भी सड़कों पर सन्नाटा है। सड़क पर आने जाने वालों को छोड़ दें तो आम लोगों की चहलकदमी नहीं दिखाई दे रही है। नजर आ रहे हैं तो सिर्फ पुलिसकर्मी, पीएसी और अर्धसैनिक बलों के सुरक्षाकर्मी। दिन में चक्रमण रात में पुलिस और सुरक्षा बल की गश्त से पूरा इलाका छावनी में तब्दील है। दहशतजदा लोग घरों में सिमटे हुए हैं। डर दोनों समुदायों में है। कमजोर दलित वर्ग के पीड़ित इस बात को लेकर भयभीत हैं कि कहीं उनके घरों में फिर तोड़फोड़ और अगलगी की घटना न हो तो दूसरी तरफ दूसरे पक्ष के लोग भी इसी आशंका से सहमे हुए हैं।