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Ajit Doval : युवाओं को अग्निपथ योजना समझाने के लिए अजीत डोभाल को क्यों उतरना पड़ा, जानिए क्या हैं इसके मायने?

Tue, 21 Jun 2022 05:39 PM IST
हिमांशु मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अग्निपथ योजना का देशभर में विरोध जारी है। तीनों सेना के प्रमुख, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से लेकर देश के कई बड़े दिग्गज अग्निपथ योजना के समर्थन में बयान दे चुके हैं। युवाओं को इसके फायदे गिनाकर शांत करने की कोशिश जारी है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मंगलवार को सामने आए। 
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अजीत डोभाल - फोटो : अमर उजाला
अग्निपथ योजना का देशभर में विरोध जारी है। तीनों सेना के प्रमुख, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह से लेकर देश के कई बड़े दिग्गज अग्निपथ योजना के समर्थन में बयान दे चुके हैं। युवाओं को इसके फायदे गिनाकर शांत करने की कोशिश जारी है। इसी कड़ी में केंद्र सरकार की तरफ से राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल मंगलवार को सामने आए। 

ऐसे में आइए जानते हैं कि आखिर अजीत डोभाल को क्यों अग्निपथ योजना के समर्थन में उतरना पड़ा? इसके मायने क्या हैं? इसके साथ ही अजीत डोभाल के बारे में भी सबकुछ जानते हैं...
 
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अजीत डोभाल - फोटो : पीटीआई
पहले जानिए अजीत डोभाल ने क्या कहा? 
एक न्यूज एजेंसी को दिए इंटरव्यू में एनएसए अजीत डोभाल ने कहा, 'बदलते समय के साथ सेना में बदलाव जरूरी है। इसे एक नजरिए से देखने की जरूरत है। अग्निपथ अपने आप में एक स्टैंडअलोन योजना नहीं है। 2014 में जब पीएम मोदी सत्ता में आए, तो उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में से एक भारत को सुरक्षित और मजबूत बनाना था।'

उन्होंने आगे कहा, 'जो हम कल कर रहे थे अगर वही भविष्य में भी करते रहे तो हम सुरक्षित रहेंगे ये जरूरी नहीं। यदि हमें कल की तैयारी करनी है तो हमें परिवर्तित होना पड़ेगा। ये आवश्यक इसलिए था क्योंकि भारत में, भारत के चारों तरफ माहौल बदल रहा है।'
 
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एनएसए अजीत डोभाल - फोटो : पीटीआई
अब जानिए अजीत डोभाल के बारे में सबकुछ
अजीत डोभाल का जन्म 1945 को पौड़ी गढ़वाल में हुआ था। उनकी पढ़ाई अजमेर मिलिट्री स्कूल में हुई। केरल के 1968 बैच के IPS अफसर डोभाल अपनी नियुक्ति के चार साल बाद 1972 में ही इंटेलीजेंस ब्यूरो (IB) से जुड़ गए थे। वह ज्यादातर समय खुफिया विभाग में रहे। 2005 में आईबी की डायरेक्टर पोस्ट से डोभाल रिटायर हुए।  

अजीत डोभाल भारत के इकलौते ऐसे पुलिस अधिकारी हैं जिन्हें कीर्ति चक्र और शांतिकाल में मिलने वाले गैलेंट्री अवॉर्ड से नवाजा गया है। डोभाल ने पठानकोट ऑपरेशन को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। डोभाल कई सिक्योरिटी कैंपेन का हिस्सा रहे हैं। इसी के चलते उन्होंने जासूसी की दुनिया में कई कीर्तिमान स्थापित किए हैं। 
 

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अजीत डोभाल - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान में मुस्लिम बनकर रहे, सर्जिकल स्ट्राइक को हेड किया
अजीत डोभाल मल्टी एजेंसी सेंटर और ज्वाइंट इंटेलिजेंस टास्क फोर्स के चीफ भी रह चुके हैं। डोभाल को जासूसी का लगभग 37 साल का अनुभव है। वह 31 मई 2014 को देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बने। 

आपको जानकर हैरानी होगी कि खुफिया एजेंसी रॉ के अंडर कवर एजेंट के तौर पर डोभाल सात साल पाकिस्तान के लाहौर में एक पाकिस्तानी मुस्लिम बन कर रहे थे। जून 1984 में अमृतसर के स्वर्ण मंदिर पर हुए आतंकी हमले के काउंटर ऑपरेशन ब्लू स्टार में जीत के नायक बने। अजीत डोभाल रिक्शा वाला बनकर मंदिर के अंदर गए और आतंकियों की जानकारी सेना को दी, जिसके आधार पर ऑपरेशन में भारतीय सेना को सफलता मिली।

1999 में कंधार प्लेन हाईजैक के दौरान ऑपरेशन ब्लैक थंडर में अजीत डोभाल आतंकियों से निगोसिएशन करने वाले मुख्य अधिकारी थे। जम्मू-कश्मीर में घुसपैठियों और शांति के पक्षधर लोगों के बीच काम करते हुए कई आतंकियों को सरेंडर कराया। 
अजीत डोभाल 33 साल तक नॉर्थ-ईस्ट, जम्मू-कश्मीर और पंजाब में खुफिया जासूस भी रहे। 2015 में मणिपुर में आर्मी के काफिले पर हमले के बाद म्यांमार की सीमा में घुसकर उग्रवादियों के खात्मे के लिए सर्जिकल स्ट्राइक ऑपरेशन हुआ। डोभाल इस ऑपरेशन के हेड प्लानर थे।
 
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अग्निपथ योजना - फोटो : अमर उजाला
अग्निपथ का विरोध कर रहे युवाओं के लिए अजीत डोभाल को क्यों उतारे? 
यह जानने के लिए हमने रक्षा मामलों के जानकार कैप्टन अरविंद सिंह (रिटायर्ड) से बातचीत की। उन्होंने कहा, ‘एनएसए अजीत डोभाल को भारत का जेम्स बांड भी कहा जाता है। उनकी लोकप्रियता युवाओं में काफी अधिक है। डोभाल को लाखों युवा अपना प्रेरणाश्रोत मानते हैं। डोभाल के जासूसी और देश के लिए किए गए कामों की चर्चा युवाओं में खूब होती है। ऐसे में उनकी कही गई बातों का युवाओं पर काफी असर पड़ता है। यही कारण है कि सरकार ने इस मामले में अजीत डोभाल को भी मैदान में उतार दिया।'
 
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अजीत डोभाल - फोटो : अमर उजाला
इसके क्या मायने हैं? 
सेना से रिटायर्ड कैप्टन अरविंद सिंह बताते हैं कि अग्निपथ योजना को लेकर अजीत डोभाल के मोर्चा संभालने का मकसद साफ है कि सरकार कहीं से भी इस मामले में पीछे नहीं हटने वाली है। सरकार इसके जरिए युवाओं को यह भी संदेश देना चाहती है कि अगर किसी को नेताओं की बातों पर भरोसा नहीं है तो वह देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख और अजीत डोभाल जैसे बड़े प्रशासनिक अफसर की बातों को समझें। यह योजना देश के लिए काफी जरूरी है। 

कैप्टन सिंह आगे कहते हैं, 'डोभाल ने अपने इंटरव्यू में युवाओं की कई शंकाओं का समाधान भी किया है। जिसमें इंफेंट्री, आर्टिलरी, रेजिमेंट से जुड़े सवाल थे। एनएसए ने यह साफ कर दिया है कि सेना के स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं होने जा रहा है। इससे युवाओं के साथ-साथ देश की सेना को काफी फायदा मिलेगा।'
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