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अयोध्या का विवादित ढांचा: 6 दिसंबर 1992 का दिन और...वह छह घंटे

Thu, 06 Dec 2018 12:24 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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अयोध्या मंदिर विवाद
साल 1992 के बाद लगभग हर लोकसभा चुनाव का अहम मुद्दा रहा है विवादित ढांचा और अयोध्या का राम मंदिर। 1989 के अंत में सुलगी राम मुद्दे की चिंगारी 1992 छह दिसंबर को बाबरी मस्जिद को ढहाने के बाद से आज तक जल रही है। इस घटना को करीब 26 साल हो चुके हैं लेकिन मुद्दा जस का तस है। हर छह दिसंबर को अयोध्या ही नहीं पूरे देश में एक अलग सा उन्माद देखने को मिलता है।
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Babri Masjid demolition
अयोध्या में 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद के विवादित ढांचे को लाखों की संख्या में पहुंचे कारसेवकों ने गिरा दिया था। इसके बाद पूरा देश सांप्रदायिक हिंसा की आग में जलने लगा था। कारसेवकों की भीड़ के आगे केंद्र सरकार और राज्य सरकार लाचार दिखी। 16वीं सदी की बाबरी मस्जिद को इस दिन जय श्रीराम के उद्घोष के साथ ढहा दिया था।
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Babri Masjid demolition
6 दिसंबर 1992 को देशभर से लाखों की संख्या में पहुंचे कारसेवकों ने पूरी मस्जिद कुछ घंटों में तोड़ दी। उस समय कारसेवकों का नारा था- एक धक्का और दो बाबरी मस्जिद तोड़ दो।

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बाबरी मस्जिद - फोटो : amar ujala
प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो उस दिन कोई ऐसा नहीं था जिसने 'जयश्रीराम' का उद्घोष न किया हो, यहां तक की घटना स्थल पर मौजूद पुलिसकर्मी भी वहां नारे लगा रहे थे। धीरे-धीरे देशभर के कारसेवकों का हुजूम अयोध्या में बढ़ रहा था, भीड़ हिंसक हो रही थी। दोपहर होते-होते भीड़ हिंसक होने लगी और मस्जिद की सुरक्षा के लिए मौजूद पुलिस और कार्यकर्ताओं में झड़प तेज हो गई। मामला इतना बढ़ गया कि पुलिसकर्मी भी इधर-उधर निकल गए। जयघोष के साथ मस्जिद पर लोग चढ़ गए और छैनी-हथौड़ी लेकर मस्जिद तोड़ने में जुट गए।
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Babri Masjid demolition
भीड़ उन्मादी हो चुकी थी। विश्व हिंदू परिषद के नेता अशोक सिंघल, कारसेवकों के साथ वहां मौजूद थे, थोड़ी ही देर में बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी भी जुड़े, इसके बाद वहां लालकृष्ण आडवाणी भी पहुंच गए। 
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Babri Masjid demolition
लालकृष्ण आडवाणी राममंदिर आंदोलन का सबसे बड़ा चेहरा थे। इसी मुद्दे की बुनियाद पर 1989 के लोकसभा चुनाव में 9 साल पुरानी बीजेपी 2 सीटों से बढ़कर 85 पर पहुंच गई थी। इसके बाद भी यह मुद्दा गरम रहा और बीजेपी ने सियासत की बुलंदियों को छुआ। इससे पहले आडवाणी सितंबर 1990 में सोमनाथ से रथ लेकर मंदिर के लिए जनजागरण करने निकल पड़े थे। 
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Babri Masjid demolition
लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, अशोक सिंघल के बीच तेजी से उभरती हुई उमा भारती भी मौजूद थीं। उमा ने अपनी पहचान छुपाने के लिए पूरा बाल तक मुड़वा लिया था। भीड़ इतनी हिंसक हो चुकी थी कि किसी के नियंत्रण में नहीं रह पा रही थी। उस दौरान बाबरी विध्वंस के बाद हुए दंगों में 1200 लोग मारे गए थे। विवादित ढांचे को ढहाने के लिए न सिर्फ कार्यकर्ता बल्कि इमारत ढहाने वाले पेशेवर भी शामिल हुए थे।

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Babri Masjid demolition
बाबरी मस्जिद का विवादित ढांचा ढहाने और राम मंदिर बनाने के पीछे कुछ संगठनों की मांग है कि जब बाबर का शासन था तब उसने मंदिरों को तोड़ कर मस्जिद का निर्माण कराया था। अब कुछ हिंदुओं का मानना है कि विवादित जगह पर हिंदू के देवता श्रीराम का जन्म हुआ था। जिस मस्जिद को ढहा गया था उसका निर्माण 16वीं सदी में किया गया था।

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Babri Masjid demolition
बाबरी मस्जिद विध्वंस की जांच करने वाले जस्टिस लिब्रहान आयोग ने तफ्तीश के बाद 2009 में अपनी रिपोर्ट पेश की जिसमें बताया गया कि मस्जिद को एक गहरी साजिश के तहत गिराया गया था। इस मामले में लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती सहित कई लोगों के खिलाफ आपराधिक साजिश का मुकदमा दर्ज किया गया। 26 साल से इस मामले में दो मुकदमे चल रहे हैं, पहला साजिश रचने का और दूसरा जमीन के मालिकाना हक का।
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बाबरी मस्जिद - फोटो : amar ujala
फिलहाल मस्जिद वाले स्थान पर राम का मंदिर टेंट में बनाया गया है वहां भगवान राम की मूर्ति स्थापित है।  सुबह शाम वहां पूजा, आरती की जाती है। फिलहाल जमीन विवाद सुप्रीम कोर्ट में है। लंबी सुनवाई के बाद इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने 2010 में विवादित जमीन को तीन हिस्सों में बांटने का फैसला सुनाया। इसमें एक हिस्सा रामलला को, जिसका प्रतिनिधित्व हिंदू महासभा कर रही है, दूसरा हिस्सा निर्मोही अखाड़ा और तीसरा हिस्सा सुन्नी वक्फ बोर्ड को सौंपने की बात कही गई। तीनों पक्ष पूरी जमीन पर अपना हक जता रहे हैं और अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है।
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