देश में जहां कैश को लेकर मारा मारी चल रही हैं, वहीं कुछ देश ऐसे भी हैं जहां सब कुछ होता है और वो भी कैशलेस। हालांकि, ये पूरी तरह से कैशलेस नहीं हैं, लेकिन कैशलेस होने की दिशा में हैं। इस बात का खुलासा हुआ है मास्टरकार्ड की रिपोर्ट से। आइए हम बताते हैं कौन से हैं वो पांच देश।
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स्वीडन
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Sweden
स्वीडन के बैंकों में डकैती की घटनाएं 2008 में 110 दर्ज हुई थी, जो 2011 तक 16 ही रह गईं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह स्वीडिश बैंकों में कैश की कम मात्रा है। ये दुनिया का अकेला ऐसा देश है, जहां कैश का सर्कुलेशन सबसे कम है। कई एक्सपर्ट्स के मुताबिक, स्वीडन दुनिया का पहला कैशलेस देश बन सकता है।
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अमेरिका
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USA
अमेरिका में पिछले कुछ वर्षों से इलेक्ट्रॉनिक पेमेंट का इस्तेमाल किया जा रहा है। एप्पल से लेकर माइक्रोसॉफ्ट तक तमाम कंपनीज ने वॉलेट सर्विस की सुविधा दे दी है। पेमेंट के लिए इसका तेजी से इस्तेमाल हो रहा है। इसके साथ ही अमेरिका में कुछ शॉप्स में बिल के बदले 100 डॉलर तक भी कैश नहींदे सकते।
ब्रिटेन
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London
ब्रिटेन में वर्ष 2014 में ही बसों में कैश पेमेंट मना हो गया था। बस में सफर के लिए यहां ओएस्टर कार्ड और प्रीपेड टिकट जरूरी है। ब्रिटिश रीटेल कनसोर्टियम के मुताबिक, खरीदारी के लिए कैश का इस्तेमाल साल दर साल घटता जा रहा है। ब्रिटेन कैशलेस देश होने की दिशा में हैं, लेकिन कई तबकों में बंटे होने के चलते दिक्कते अभी हैं।
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ऑस्ट्रेलिया
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Australia
ऑस्ट्रेलिया में ट्रांजेक्शन का तरीका कैशलेस है। यहां करीब चार साल पहले से ही कैब तक का पेमेंट कार्ड से मशीन के जरिए होता आ रहा है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूजीलैंड दोनों ही देश पोस्ट कैश सोसाइटी होने के करीब हैं।
बेल्जियम में भी ऐसा कानून लागू है, जिसके तहत कैश पेमेंट की लिमिट सिर्फ 3000 यूरो ही है। इतना ही नहीं, इस कानून को तोड़ने पर 2 लाख 25 हजार रुपए तक का चार्ज लग सकता है।