राज्य सरकार इन पदों को भरने के लिए तीन बार आवेदन आमंत्रित कर चुकी है। दो बार आवेदन खारिज किए जा चुके हैं। नियुक्ति प्रक्रिया अभी तक पूरी नहीं हुई है। सुनवाई नहीं होने से कई मामलों में जवाबदेही तय नहीं हो पा रही है। विभागों के जन सूचना अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी लंबित है। आरटीआई कानून के तहत यदि किसी नागरिक को निर्धारित समयसीमा में सूचना नहीं मिलती, तो वह पहले विभाग के प्रथम अपीलीय प्राधिकारी के पास अपील करता है। वहां से राहत नहीं मिलने पर मामला राज्य सूचना आयोग पहुंचता है। आयोग द्वितीय अपीलों और शिकायतों की सुनवाई करता है। यह सूचना उपलब्ध कराने के आदेश जारी कर सकता है। सूचना देने में लापरवाही करने वाले जन सूचना अधिकारियों पर आर्थिक दंड भी लगा सकता है।
सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 15 के तहत प्रत्येक राज्य में एक राज्य सूचना आयोग का गठन किया जाता है। आयोग में एक राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और अधिकतम 10 राज्य सूचना आयुक्त नियुक्त किए जा सकते हैं। इनकी नियुक्ति राज्यपाल की संस्तुति पर गठित चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है। चयन समिति में मुख्यमंत्री अध्यक्ष होते हैं। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और मुख्यमंत्री की ओर से नामित एक कैबिनेट मंत्री इसके सदस्य होते हैं। राज्य सरकार सूचना आयोग के मुख्यालय को कांगड़ा स्थानांतरित कर रही है। इसे स्थानांतरित करने की प्रक्रिया चली हुई है। नए आयुक्तों की नियुक्ति तक संभवतया मुख्यालय शिफ्ट कर दिया जाएगा।
सचिव प्रशासनिक सुधार ए. शाइनामोल ने बताया कि राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और राज्य सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए जल्द ही चयन समिति का गठन किया जाएगा। समिति के गठन के बाद प्राप्त आवेदनों पर निर्णय लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि राज्य सूचना आयोग में दोनों पदों पर नियुक्तियां शीघ्र कर दी जाएंगी।