चंबा के चलुंज मोड़ पर निजी बस हादसे ने कई परिवारों को गहरा सदमा दिया। पति-पत्नी जगदेव और हरदेई की मौत हो गई, जबकि मां की मौत से चार बेटियां अनजान हैं। घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया, जहां दो के ऑपरेशन हुए और तीन गंभीर घायलों को टांडा रेफर किया गया। ग्रामीणों और रक्तदाताओं ने मदद के लिए आगे आकर इंसानियत की मिसाल पेश की।
दिन : शनिवार, समय : सुबह 7 बजे, स्थान : चलुंज मोड़। निजी बस रोज की तरह 18 सवारियों को लेकर निकली थी। चलुंज मोड़ से कुछ पहले बस का टाई रॉड एंड टूट गया। बस गिरने की आवाज सुनकर लोक मित्र केंद्र संचालक योगराज निवासी घुलेई और अन्य ग्रामीण मौके पर पहुंचे। बस के अंदर और बाहर घायल तड़प रहे थे।
पुलिस और एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंचीं। आसपास के गांवों से परिजन पहुंच गए। मंजर ऐसा था कि हर आंख नम हो गई। अपनों की सलामती की दुआ लेकर पहुंची महिलाएं शव देखते ही चीख उठीं। कई महिलाएं परिजनों और रिश्तेदारों के शव देखकर गश खाकर सड़क पर गिर पड़ीं। वहीं, सुबह 10 बजे, स्थान पंडित जवाहर लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज। बस दुर्घटना में घायल बच्चों को गोद में उठाकर परिजन इधर-उधर दौड़ रहे हैं। मरीजों की सुविधा के लिए रखे रोगी देखभाल कर्मी नजर नहीं आए।
हालांकि, डॉक्टरों ने पहले ही पेशेंट केयर को वहां रहने के निर्देश दिए थे। 10:20 बजे तीसा से एंबुलेंस एक घायल को लेकर मेडिकल कॉलेज पहुंची। 11 बजे दूसरी एंबुलेंस घायलों को लेकर पहुंची। इसमें घायल चार बच्चियां थीं। निजी सुरक्षा कर्मी और तीमारदार उन्हें गोद में उठाकर आपातकालीन कक्ष में ले गए। यहां परिजनों के ही नहीं, अस्पताल कर्मियों और मरीजों की आंखों में भी आंसू निकल गए।
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दुर्घटनाग्रस्त बस।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
साथ जीने-मरने की कसमें निभा गए जगदेव, हरदेई
साथ जीने और मरने की कसमों को निजी बस दुर्घटना में जगदेव और हरदेई ने निभा दिया। दुर्घटना में पति-पत्नी दोनों की मौत हो गई। जगदेव पुत्र धर्म सिंह निवासी गांव बाहला डाकघर देवी कोठी पत्नी हरदेई के साथ बस में सफर कर रहे थे। चलुंज मोड़ पर बस हादसे का शिकार हो गई। सात फेरे लेते समय दोनों ने साथ जीने और मरने की कस्में खाई थीं। जिंदगी की खुशी और गम एक दूसरे के साथ मिलकर बिताए। कभी कभार दोनों के बीच तकरार भी होती तो दोनों आपस में मिलकर उसे सुलझा लेते। उनकी जिंदगी आराम से चल रही थी। शनिवार को दोनों घर से तड़के तैयार होकर निजी बस में सवार होकर चंबा की तरफ निकले लेकिन उन्हें क्या पता था कि कुछ किलोमीटर की दूरी पर काल उनका इंतजार कर रहा था। बस की सीट पर भी दोनों साथ बैठे थे लेकिन जैसे ही बस नीचे लुढ़की तो दोनों बस के साथ लुढ़क गए।
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मेडिकल कॉलेज में निजी सुरक्षा कर्मी घायल बच्ची को गोद में उठाकर ले जाती हुई।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
नानी के घर की राह में छूटा मां का हाथ
बस में चारों बहनें नानी के घर पहुंचने के सपने बुन रही थीं... किसी को नानी से मिलना था, किसी को वहां जाकर मस्ती करनी थी। मां नीलमा देवी भी अपने माता-पिता से मिलने की खुशी में थीं। कुछ ही देर बाद वही सफर ऐसा मोड़ लेगा जहां चार बेटियों का मां से हमेशा के लिए साथ छूट जाएगा, इसका अंदाजा किसी को नहीं था। देवीकोठी निवासी मोती राम की पत्नी नीलमा देवी शनिवार को चार बेटियों 11 वर्षीय काव्या, 10 वर्षीय नेहा, पांच वर्षीय प्रियंका और चार वर्षीय हर्षिता के साथ मायके जा रही थीं। बैरागढ़ से कुछ किलोमीटर आगे चलुंज मोड़ के पास बस हादसे का शिकार हो गई। हादसे के बाद चीख-पुकार मच गई।
दो घायलों की टूटी हड्डी के उसी समय किए गए ऑपरेशन : हड्डी रोग विभाग से संबंधित दो घायलों का उसी समय ऑपरेशन करने का फैसला विशेषज्ञ डॉक्टर मानिक सहगल ने लिया। उन्होंने अर्पित 11 पुत्र जोगिंद्र निवासी देवी कोठी और पानो देवी 41 साल निवासी देवीकोठी को ऑपरेशन के लिए ओटी में भेज दिया। शाम के समय दोनों घायलों का उन्होंने सफल ऑपरेशन कर दिए। दुर्घटना में जो हड्डी टूटी थी, उसे जोड़ दिया।
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निजी सुरक्षा कर्मी घायल बच्ची को गोद में उठाकर अस्पताल के भीतर लेकर जाते हुए।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
मां को तलाश रही हैं चारों बहनें, सच से हैं अनजान : हादसे के बाद बच्चियों को पहले तीसा अस्पताल ले जाया गया। वहां से मेडिकल कॉलेज चंबा रेफर कर दिया गया। चारों बच्चियां उपचाराधीन हैं। उनके साथ रिश्तेदार मौजूद हैं। जिन बच्चियों के लिए मां ही सबसे बड़ा सहारा थीं, उन्हें अभी यह भी नहीं पता कि हादसे ने उनसे मां का साथ हमेशा के लिए छीन लिया है। इलाज के बीच उनके मन में शायद यही सवाल होगा कि मां कहां हैं और कब उनके पास आएंगी।
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घायलों को इलाज के लिए ले जाते हुए।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इंसानियत... हादसे के बाद मदद के लिए दौड़े ग्रामीण
बस हादसे के बाद मंजर भले ही दर्दनाक था लेकिन इस मुश्किल घड़ी में स्थानीय लोगों ने इंसानियत की मिसाल कायम कर दी। हादसे की सूचना मिलते ही ग्रामीण बिना देर किए घटनास्थल पर पहुंचे और राहत एवं बचाव कार्य में जुट गए। दुर्घटनाग्रस्त बस को हटवाकर ग्रामीणों ने उसमें फंसे घायलों को बाहर निकाला और उन्हें उपचार के लिए तीसा अस्पताल पहुंचाया। हादसे की सूचना मिलते ही विधायक हंसराज ने दिल्ली से अपने सोशल मीडिया प्लेटफार्म के माध्यम से लोगों से घायलों की मदद के लिए आगे आने का आह्वान किया। इसके बाद घटना स्थल पर ग्रामीणों की भीड़ पहुंच गई।
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निजी बस के साथ खड़े चालक-परिचालक (फाइल फोटो)।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
सख्ती..अस्पताल जाने से रोके वीडियो बनाने वाले
कुछ समाजसेवी एनजीओ के पदाधिकारी बस दुर्घटना की सूचना मिलने पर मेडिकल कॉलेज पहुंच गए। निजी सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें अस्पताल के भीतर नहीं जाने दिया। ये समाज सेवी घायलों की मदद करने नहीं, बल्कि मोबाइल से वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल करने के लिए पहुंचे थे। इससे पहले भी वह ऐसा कर चुके हैं, इसलिए मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने सुरक्षा कर्मियों को सख्त निर्देश दिए थे कि ऐसे जो भी लोग मोबाइल से वीडियो बनाने के लिए अस्पताल में घुसते हैं, उन्हें रोका जाए।
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चलूंज मोड़ के पास सड़क के बीचाेंबीच पड़ी बस।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
जीवन दान... घायलों के लिए खून देने पहुंचे दानी
दुर्घटना के घायलों के लिए जब ब्लड बैंक में बी और ओ पॉजिटिव खून की कमी हो गई तो कई रक्तदानी वहां खून देने के लिए पहुंच गए। इसमें महिलाएं और पुरुष शामिल रहे। इसके चलते घायलों के इलाज में खून की समस्या सामने नहीं आई। जैसे ही लोगों को पता लगा कि घायलों को खून की जरूरत पड़ सकती है। तो वह पहले ही अस्पताल पहुंच गए थे। शनिवार को शाम के समय एनएचएआई के 1033 टो फ्री नंबर पर मदद के लिए फोन आया। सात मिनट में एंबुलेंस मरीज के पास पहुंच गई।
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बस हादसे के बाद सहायता के लिए पहुंचे ग्रामीण।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
प्राथमिक उपचार के बाद टांडा भेजे तीन घायल
एक मरीज के फेफड़े में चोट आई है। उसे प्राथमिक उपचार के बाद टांडा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया गया। सभी मरीजों के एक्सरे और अल्ट्रासाउंड करवाए गए। 70 वर्षीय धर्मू देवी, 35 वर्षीय विजय कुमार और 32 साल की सुष्मिता को गंभीर चोटें आने के कारण रेफर कर दिया गया। प्राचार्य डॉ. पंकज गुप्ता, चिकित्सा अधीक्षक, विधायक नीरज नैय्यर अस्पताल में मौजूद रहे।
स्टाफ को इलाज के संबंध में दिशा निर्देश देते हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. मानिक सहगल।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
संसद में गूंजेगा बदहाल सड़कों का मुद्दा : राजीव
जिले की बदहाल सड़कों और लगातार बढ़ रहे हादसों का मुद्दा अब संसद में उठेगा। लोकसभा सांसद डॉ. राजीव भारद्वाज ने कहा कि वे जिले की सड़कों की स्थिति और सड़क सुरक्षा से जुड़े मामलों को संसद में प्रमुखता से उठाएंगे। कहा कि पहाड़ी क्षेत्रों में समतल इलाकों की तर्ज पर फोरलेन बनाने के लिए बड़े पैमाने पर पहाड़ों की कटिंग की जा जाती है। दुर्घटनाओं का खतरा भी बढ़ रहा भारद्वाज ने चांजू क्षेत्र में हुए सड़क हादसे पर गहरी संवेदना व्यक्त की।