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Chamba Incident: बस पर गिरे पत्थर ने छीन लिया बुजुर्ग माता-पिता का सहारा, सुरक्षा इंतजामों पर उठे सवाल

Mon, 06 Jul 2026 11:54 AM IST
Ankesh Dogra अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

भरमौर राष्ट्रीय राजमार्ग पर बस पर पत्थर गिरने से 22 वर्षीय साहिल की मौत हो गई। वह अपने माता-पिता की इकलौती संतान था। परिजनों का आरोप है कि समय पर अस्पताल नहीं पहुंच पाने से उसकी जान नहीं बच सकी। हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने बारिश के दौरान भूस्खलन प्रभावित स्थानों पर स्थायी सुरक्षा उपाय करने और मणिमहेश यात्रा से पहले मार्ग को सुरक्षित बनाने की मांग उठाई है। पढ़ें पूरी खबर...
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चंबा हादसा। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
भरमौर राष्ट्रीय उच्च मार्ग पर बस पर पत्थर गिरने से एक परिवार का इकलौता चिराग बुझ गया। साहिल 22 पुत्र नाथो राम निवासी गांव घरेड़ डाकघर गोली अपने माता-पिता की इकलौती संतान थी। पिता लोक निर्माण विभाग से कुछ समय पहले ही सेवानिवृत्त हुए थे। पिता को रीढ़ की हड्डी में दर्द की समस्या है। उन्हें डॉक्टरों ने आराम करने का परामर्श दिया है। माता-पिता का लाडला हमेशा अपने ताया के बेटे के साथ ही रहता था। जिस बेटे का माता-पिता ने 22 वर्षों तक पालन-पोषण किया, अब वह इस दुनिया में नहीं रहा। माता-पिता को जैसे ही यह खबर मिली तो दोनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। उन्हें इस पर भरोसा नहीं हो रहा था कि अब उनका बेटा कभी वापस घर नहीं लौटेगा। पिता बेटे से बात करने के लिए उसके फोन नंबर पर फोन करने लगे लेकिन बेटे से बात नहीं हो पाई। गांव के अन्य लोग भी उनके घर पर पहुंच गए। जैसे ही बेटे का शव घर पहुंचा तो रोने की आवाज से पूरा गांव गूंज उठा। परिवार वालों के साथ गांव के अन्य लोग भी अपनी आंखों से आंसू बहने से नहीं रोक पाए।
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टैक्सी चालक मदद करने से मना न करता तो शायद जिंदा होता साहिल

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- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
मेडिकल कॉलेज चंबा के बाहर परिजनों की आंखों में सिर्फ आंसू नहीं, बल्कि एक सवाल भी था। उनका कहना था कि समय पर अस्पताल पहुंच जाते तो शायद साहिल की जान बच सकती थी। परिवार का आरोप है कि एक टैक्सी चालक ने सवारियों का हवाला देकर मदद से इन्कार कर दिया। इसी देरी ने उनकी उम्मीदें तोड़ दीं। टैक्सी चालक ने मानवता दिखाई होती को शायद साहिल आज हमारे बीच होता। इस बात का उन्हें पूरी जिंदगी मलाल रहेगा।

यह बात मेडिकल कॉलेज में रोते हुए साहिल के चचेरे भाई विशाल ने कही। उन्होंने बताया कि बस पर पत्थर गिरने से घायल साहिल को गोद में उठाकर वह आधा घंटा सड़क पर खड़े रहे। वहां एक टैक्सी पहुंची। उन्होंने टैक्सी वाले से मदद मांगी और घायल साहिल को अस्पताल ले जाने की बात कही। टैक्सी चालक ने जवाब दिया कि उसके साथ सवारियां हैं, वह नहीं जा सकता। चालक से बहुत मिन्नतें कीं लेकिन वह नहीं माना। उसके जाने के बाद आधे घंटे के बाद एक कार पहुंची। इसमें साहिल को मेडिकल कॉलेज पहुंचाया लेकिन डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। अस्पताल में परिजनों को रो-रो कर बुरा हाल था। वहां मौजूद अन्य लोगों ने उन्हें संभाला।
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चंबा मेडिकल कॉलेज के बाहर बस हादसे में जान गवां चुके युवक की मौत के बाद विलाप करते परिजन। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
बत्ती दी हट्टी के पास भी पहाड़ी से गिरते हैं पत्थर
बारिश के दौरान भरमौर एनएच पर सफर करना खतरनाक हो गया है। गैहरा के पास बत्ती दी हट्टी नामक स्थान पर किसी भी समय भूस्खलन या पत्थर गिरने लगते हैं। सड़क पर गड्ढों की भरमार भी अधिक है। शनिवार रात को हुई बारिश के बाद रविवार को बत्ती दी हट्टी के पास बस पर पत्थर गिरने से एक युवक की मौत हो गई। बरसात का मौसम शुरू हो चुका है। ऐसे में बारिश के दौरान इस मार्ग पर यात्रा करने से लोग डर रहे हैं। एनएच प्राधिकरण सुरक्षा के लिए वहां कोई भी पुख्ता इंतजाम नहीं कर पा रहा है।

मणिमहेश यात्रा सितंबर माह में शुरू हो जाएगा। उस दौरान भी बारिश होने की संभावना अधिक रहती है। ऐसे में श्रद्धालु भी यात्रा पर जाने या न जाने की असमंजस में फंसे हैं। स्थानीय लोगों में हरीश कुमार, प्रहलाद, सुरेंद्र, जय किशन, मनोज कुमार, केवल, सुरेंद्र, हंसराज और सूरज ने बताया कि जिन स्थानों में पत्थर गिरते रहते हैं या भूस्खलन होता रहता है, वहां सीमेंट की स्प्रे होनी चाहिए। एनएचपीसी सीएसआर के तहत इस कार्य के लिए धन की व्यवस्था कर सकती है। उन्होंने सरकार व प्रशासन से मांग की है कि मणिमहेश यात्रा को ध्यान में रखते हुए ऐसे सभी स्थानों पर लोगों की सुरक्षा के लिए पुख्ता प्रबंध किए जाएं। एनएच के अधिशासी अभियंता जोगिंद्र शर्मा ने बताया कि दुर्घटना संभावित स्थानों को ठीक करवाया जा रहा है।
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