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कांग्रेस नेता के बेटे की हत्या का मामला: चार माह पहले गोली लगने के बाद बच गया था जानू, इस बार ली जान

Sun, 17 Apr 2022 01:58 AM IST
भूपेंद्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, यमुनानगर (हरियाणा)

सार

10 मार्च 2020 को होली के दिन सिटी सेंटर के सामने जानू के बड़े भाई रमन वाल्मीकि और उसके साथियों के साथ मनोज उर्फ शैंटी, सचिन पंडित, सुमित राणा व अन्य का झगड़ा हो गया था।
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जानू की मौत के बाद विलाप करते परिजन। मृतक जानू का फाइल फोटो। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
हरियाणा के यमुनानगर में चार माह पहले भी जानू पर जानलेवा हमला हुआ था, लेकिन गोली लगने के बाद भी उसकी जान बच गई थी। इसके बाद उसे पुलिस सुरक्षा भी दी गई, लेकिन इस बार हत्यारोपियों ने फुल प्रूफ प्लान बनाया था। यही कारण है कि वारदात को उस समय अंजाम दिया गया जब सुरक्षाकर्मी उसके साथ नहीं था। यही नहीं गोली लगने के बाद बदमाशों ने पास जाकर जानू के सिर में गोली मारी, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गई। 
 
मृतक जानू वाल्मीकि के पिता राजेंद्र वाल्मीकि कांग्रेसी के पूर्व पार्षद और अखिल भारतीय वाल्मीकि महासभा के महासचिव हैं, जबकि जानू फाइनेंस का काम करता था। बताया जा रहा है कि जानू के परिवार से हत्यारोपी मनोज उर्फ शैंटी, सचिन पंडित और सुमित राणा का विवाद तीन साल पुराना है। दरअसल 10 मार्च 2020 को होली के दिन सिटी सेंटर के सामने जानू के बड़े भाई रमन वाल्मीकि और उसके साथियों के साथ मनोज उर्फ शैंटी, सचिन पंडित, सुमित राणा व अन्य का झगड़ा हो गया था।
 
झगड़े में इनके दोस्त पीयूष को गोली लगी थी, जबकि सचिन पंडित भी बुरी तरह घायल हो गया था। तब पुलिस ने रमन वाल्मीकि समेत अन्य पर हत्या के प्रयास का केस दर्ज किया था। इसके बाद रमन वाल्मीकि ने आत्म समर्पण किया था। आत्म समर्पण करने के तीन दिन बाद  25 अप्रैल 2020 को रमन वाल्मीकि की जिला जेल में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। तब भी परिजनों ने शहर में जाम लगाया था।
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जानू की हत्या के बाद मौके पर जांच करती पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी।
इसके बाद भी विवाद थमा नहीं और फिर 30 दिसंबर 2021 को दोस्त के साथ दशमेश कॉलोनी जा रहे जानू पर खालसा कॉलेज के पास फायरिंग की गई थी। इस दौरान जानू के पेट में गोली लगी थी। सीसीटीवी फुटेज में तब भी दो बदमाश बाइक पर भागते हुए दिखाई दे रहे थे। परिजनों ने तब भी सचिन पंडित और मनोज पर जानलेवा हमला करने के आरोप लगाए थे, लेकिन उस दौरान जानू की जान बच गई थी। इस घटना के बाद जानू को पुलिस सुरक्षा प्रदान की गई थी।
 
तब से उसके साथ एक पुलिस कर्मी तैनात रहता था, लेकिन शुक्रवार की रात पुलिस कर्मी ड्यूटी खत्म कर अपने घर चला गया था। इसके बाद बिना पुलिस कर्मी के जानू अपने दोस्तों के साथ शादी समारोह में शामिल होने गया था। माना जा रहा है कि आरोपियों को पूरी जानकारी थी कि जानू शादी समारोह में गया है और उसके साथ सुरक्षाकर्मी नहीं है।
 
यही कारण है कि प्लानिंग के तहत घात लगाकर आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया और जैसे ही जानू शादी समारोह से बाहर निकला तो उस पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी गई। आधी रात हुई गोलियों की गड़गड़ाहट से जगाधरी दहल गया। गोलियों की आवाज सुनकर शादी समारोह से लोग घटनास्थल पर पहुंचे तो वहां जानू खून से लथपथ पड़ा मिला। वहीं उसके दोस्त भी गोलीबारी में जख्मी हो गए। 
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जानू की हत्या के बाद शहर के भगत सिंह चौक पर जाम लगाते लोग व मौके पर तैनात पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संस्कार करने से मना कर शहर के बीच लगाया जाम 
जानू की हत्या का पता चलते ही सैकड़ों की संख्या में वाल्मीकि समाज और शहर के लोग अस्पताल पहुंचे, जिससे अस्पताल में तनाव का माहौल बन गया। इस संबंध में सूचना पर शहर थाना प्रभारी सुखबीर सिंह, गांधी नगर थाना प्रभारी भूपेंद्र राणा, शहर जगाधरी थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। इस दौरान परिजनों ने पोस्टमार्टम के बाद अंतिम संस्कार करने से मना कर दिया और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग को लेकर 11 बजे भगत सिंह चौक पर जाम लगा दिया। इससे रेलवे रोड, जगाधरी वर्कशॉप रोड पर वाहनों की कतार लग गई।


सड़क पर लगा जाम
 
पुलिस ने मधु चौक, महाराणा प्रताप चौक से वाहनों का डायवर्ट किया। इस दौरान परिजनों की पुलिस के साथ तीखी बहस भी हुई। परिजन हत्यारोपियों की गिरफ्तारी नहीं होने तक शव का अंतिम संस्कार नहीं करने की बात कह रहे थे।डीएसपी आशीष चौधरी ने परिजनों को आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी करने का आश्वासन दिया, इस पर करीब एक बजे परिजनों ने जाम खोल दिया। इसके बाद परिजन चूना भट्टी स्थित शमशान घाट में पहुंचे। यहां मृतक के बेटे ने पिता को मुखाग्नि दी।

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मृतक के पिता राजेंद्र वाल्मीकि का ढांढस बंधाते विधायक घनश्यास दास अरोड़ा। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
विधायक व मेयर ने बंधाया ढांढस  
जानू की हत्या का पता चलते ही मृतक की पत्नी व अन्य परिजन कई बार बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। परिजनों को रो-रोकर बुरा हाल था। पिता राजेंद्र वाल्मीकि सदमे में थे। इस दौरान विधायक घनश्याम दास अरोड़ा, मेयर मदन चौहान, पार्षद सुरेंद्र शर्मा व समाज के अन्य लोगों ने मृतक के पिता व अन्य परिजनों का ढांढस बंधाया। 
 
भाई के प्रति था गहरा प्रेम, बाजू पर बनवाया था चित्र 
जानू का अपने बड़े भाई रमन वाल्मीकि के प्रति गहरा प्रेम था। परिजनों के अनुसार साल 2020 में हुई रमन की मौत के बाद जानू उसकी फोटो को हमेशा अपने साथ रखता था। उसने उसकी एक फोटो अपनी बाजू पर भी बनवाई हुई थी। परिजनों ने मांग की है कि पुलिस हत्यारोपियों को जल्द गिरफ्तार करे। यदि आरोपियों को जल्द गिरफ्तार नहीं किया गया तो वे बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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जानू की हत्या के बाद मौके से खोल बरामद करती पुलिस। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस टीमें गठित, डीसी ने लगाया धारा-144
जानू हत्याकांड के बाद पुलिस की ओर से आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए जहां टीमें गठित कर दी गई हैं, वहीं प्रशासन ने शांति व्यवस्था के मद्देनजर धारा-144 लागू कर दिया है। डीसी पार्थ गुप्ता के अनुसार कानून व्यवस्था को देखते हुए उक्त कदम उठाया गया है।
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