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विश्व वन्य जीव दिवस : दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का संरक्षक है ये गांव, अंडों को बचाने के लिए उठाया बड़ा कदम

Wed, 03 Mar 2021 02:22 PM IST
निवेदिता वर्मा अश्वनी कुमार, हिसार (हरियाणा)
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फतेहाबाद के काजलहेड़ी में दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का संरक्षण किया जा रहा है। - फोटो : अमर उजाला
आज विश्व वन्य जीव दिवस है। हरियाणा के फतेहाबाद का एक गांव दुर्लभ प्रजाति के कछुओं का सरंक्षक बना हुआ है। फतेहाबाद के गांव काजलहेड़ी में सॉफ्ट शैल टर्टल प्रजाति के 400 से ज्यादा कछुए हैं। यह प्रजाति दुर्लभ प्रजातियों में शामिल है। गांव के जिस तालाब में इनका वास है, वहां एक टापू का निर्माण किया जा रहा है। कछुओं और उनके अंडों को तालाब के बीच टापू बनाकर बचाने और संरक्षित करने में वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग जुटा हुआ है। काजलहेड़ी में यह टापू एक हफ्ते में बनकर तैयार हो जाएगा। इसके अलावा तालाब के चारों ओर तारबंदी भी करवाने की तैयारी है। टापू बनाने का काम अंतिम चरणों पर चल रहा है। एक सप्ताह के अंदर काम पूरा कर दिया जाएगा। उसके बाद कछुओं के बच्चे और उनके अंडों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा सकेगा। दूसरी ओर सिरसा, फतेहाबाद, हिसार, सिवानी और भिवानी के गांवों में जीव जंतुओं के पीने के पानी के लिए 12 पक्के तालाब बनाए जा चुके हैं।
 
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काजलहेड़ी के तालाब में दुर्लभ प्रजाति के कछुए। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसलिए तालाब के बीच टापू बनाने का लिया फैसला 
दरअसल यहां कछुए तालाब से बाहर आकर मिट्टी में अंडे देते हैं, मगर काजलहेड़ी गांव में बने तालाब के पास काफी बंदर और अन्य जीव हैं, जो कछुओं के बच्चों और उनके अंडों को काफी नुकसान पहुंचाते हैं। इस नुकसान को बचाने के लिए विभाग की ओर से टापू बनाने का फैसला लिया गया है। 
 
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काजलहेड़ी गांव - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
इसके अलावा न्यूक्लियर पावर प्लांट गोरखपुर की ओर से तालाब के चारों और तारबंदी करवाई जाएगी। साथ ही चेतना केंद्र भी बनाया जाएगा। इस चेतना केंद्र में लगी डिस्प्ले से लोगों को यहां की जानकारी मिल सकेगी। इसको लेकर टेंडर भी लगाया जा चुका है। 
 

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काजलहेड़ी गांव में बन रहा टापू। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
काजलहेड़ी के तालाब में टापू बनाने का काम लगभग पूरा हो चुका है। एक सप्ताह के अंदर काम को पूरा कर दिया जाएगा। टापू तैयार होने के बाद कछुओं के संरक्षण और अंडों को पूरी तरह से बचाया जा सकेगा। - वेद प्रकाश, डिविजनल वाइल्ड लाइफ ऑफिसर, वन एवं वन्य जीव संरक्षण विभाग, हिसार।
 
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सॉफ्टशैल टर्टल - फोटो : फाइल फोटो
इस प्रजाति के कछुओं को सॉफ्ट शैल इसलिए कहा जाता है क्योंकि इनकी पीठ की हड्डी एकदम लचीली दिखती है। इस प्रजाति में दुनिया के कुछ सबसे बड़े मीठे पानी में रहने वाले कछुए शामिल हैं।  
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