औरों के लिए भले ही आईएनएस विक्रांत केवल युद्धपोत भर हो, लेकिन हरियाणा के हिसार के सेक्टर-14 निवासी बुजुर्ग दीनानाथ गुप्ता के लिए तो यह एक जीवंत योद्धा (सैनिक) है। जिसे लेने के लिए वह वर्ष 1961 में शादी के छह महीने बाद ही इंग्लैंड रवाना हो गए और एक साल बाद लौटे थे।
अब जब उसका पहला स्वदेशी और उन्नत वर्जन देश में ही तैयार हुआ है तो दीनानाथ व पत्नी सरला इसे नजदीक से देखना चाहते हैं। उम्मीद थी कि सरकार या नौसेना की तरफ से बुलावा आएगा, लेकिन ऐसा नहीं होने पर भी कोई मलाल नहीं है। जल्दी ही बेटे-बहू के साथ अपने खर्च से इस जहाज को देखने कोच्चि जाने की तैयारी है।
देश की आजादी के महज पांच साल बाद ही भारतीय नौ सेना ने अपनी समुद्री सीमा की रक्षा के लिए इंग्लैंड से युद्धपोत आईएनएस हरक्युलिस का सौदा किया। इस जहाज को भारत लाने के लिए जो दल इंग्लैंड भेजा गया, उसे वहां इसके संचालन के तरीके से लेकर मरम्मत तक का प्रशिक्षण भी लेना था। उस टीम में हिसार के सेक्टर-14 निवासी दीनानाथ गुप्ता भी थे। दीनानाथ रडार तकनीक के विशेषज्ञ थे। आईएनएस हरक्युलिस का भारत पहुंचने के बाद नाम बदलकर आईएनएस विक्रांत कर दिया गया था।