तीन कृषि कानूनों को रद्द कराने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसानों ने अब लंबी जंग की तैयारी शुरू कर दी है। आगे गर्मी के मौसम और बारिश से बचने के लिए किसानों ने पक्के तंबू और लोहे के फ्रेम बनाकर घर बनाने शुरू कर दिए हैं। यह घर और तंबू बहादुरगढ़ बाईपास पर कई स्थानों पर बनाए जा रहे हैं।
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नपाई का काम करते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बहादुरगढ़ बाईपास पर सर्विस लेन के साथ लगती खेतों की जमीन पर पंजाब के बठिंडा के जलाल गांव के रूपिंदर और प्रेम ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। अब पक्के तंबू बनाए जा रहे हैं। उन्होंने यहां पर 26 बाय 26 की जगह पर तंबू बनाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसमें ईंटों का फर्श बनाया जाएगा। साथ ही चारों तरफ दो से ढाई फुट की दीवारें बनाई जाएंगी ताकि बारिश का पानी तंबू में न घुस सके।
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लोहे के फ्रेम
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
ईंटें आ गई हैं और नपाई-तुलाई का काम शुरू कर दिया गया है। एक दिन में यह काम पूरा हो जाएगा। इस तंबू में करीब 35-40 लोग रहेंगे। यदि पक्के तंबू बनाने की और जरूरत पड़ती है तो वह भी बनाएं जाएंगे। वे यहां से वापस तभी जाएंगे, जब उनकी मांगें केंद्र सरकार मान लेगी।
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बहादुरगढ़ में किसानों ने पक्के तंबू बनाने शुरू कर दिए हैं।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
तीन हजार लीटर की टंकी और जनरेटर भी साथ लाएं हैं
बहादुरगढ़ बाईपास पर नजफगढ़ रोड के फ्लाईओवर के नजदीक जिला संगरूर के संगतपुरा गांव के किसानों ने भी लोहे का फ्रेम बनाकर पक्का घर बनाना शुरू कर दिया है। पास के खेतों से खुद पराली लेकर आए और उसे तंबू के ऊपर लगाना शुरू कर दिया। यहां पर 15 बाय 70 का घर बनाया जा रहा है। मिस्त्री गुरदीप खान कार्य को पूरा करने में जुटे हुए हैं।
सड़क से कीचड़ साफ करते किसान।
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
संगतपुरा निवासी सतगुरु सिंह ने बताया कि फिलहाल उनके गांव के 35 लोग यहां पर पहुंचे हैं। उनके रहने-खाने की व्यवस्था कर दी गई है। बारिश के मौसम में भी किसी तरह की परेशानी न हो, उसके लिए घर बनाया जा रहा है। यहां पर पानी की तीन हजार लीटर की टंकी रखी गई है। बिजली की समस्या न हो, उसके लिए वे एक जनरेटर भी गांव से साथ लेकर आए हैं।