चट्टानों के नीचे दबी बड़ी-बड़ी मशीनें।
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पहाड़ से गिरे पत्थर इतने बड़े थे कि लगभग 10 बड़ी-बड़ी मशीनें और डंपर उनके नीचे पूरी तरह दब गए। उनमें सवार श्रमिक भी उसी के अंदर दब गए। घटना के बाद भारी पुलिस बल बचाव कार्य के लिए डाडम के खनन क्षेत्र में पहुंचा। इस बारे में जैसे ही प्रशासनिक अधिकारियों को सूचना मिली तो उपायुक्त, पुलिस अधीक्षक, तहसीलदार, एसडीएम, नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी भी डाडम के लिए रवाना हो गए। हादसा होने के कारण तो अभी तक स्पष्ट नहीं हो सके हैं, मगर अवैध माइनिंग को ही इसका कारण माना जा रहा है। भाजपा सांसद धर्मबीर सिंह ने भी इस मामले को अवैध माइनिंग से जोड़ते हुए उच्च स्तरीय जांच करवाए जाने की बात कही है। सांसद का कहना है कि क्षेत्र में खनन माफिया हावी है और यहां किसी को आने की अनुमति नहीं दी जाती। बदमाशों को तैनात कर गुंडागर्दी को छिपाया जाता है। वहीं वहां काम करने वाले श्रमिक इस बारे में कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल बचाव कार्य पर प्रशासन का ध्यान केंद्रित है। उसके बाद मामले की जांच की जाएगी और पहाड़ खिसकने के कारणों का पता लगाया जाएगा।
सिविल सर्जन रघुबीर शांडिल्य के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग की टीमें एंबुलेंस के साथ मौके पर पहुंची। इस संबंध में ठेकेदार वेदपाल तंवर ने बताया कि हादसा बड़ा दर्दनाक हुआ है। जहां पोपलैंड आदि मशीनरी लगी हुई थी। उसके दोनों ओर वन विभाग का क्षेत्र है, जहां से पहाड़ खिसका है। बचाव कार्य में पूरा अमला लगा हुआ है। इस दौरान तोशाम के एसडीएम मनीष कुमार फौगाट, डीएसपी मनोज कुमार, नगराधीश हरबीर सिंह, भाजपा जिला प्रधान शंकर धूपड़, जिला महामंत्री बृजपाल, तहसीलदार रविंद्र मलिक, नायब तहसीलदार अशोक कुमार, रविंद्र मंढोली, निजी सचिव जेपी दुबे आदि मौजूद रहे।
एसपी और डीसी ने डाला डेरा
देर रात तक उपायुक्त रिपुदमन सिंह और पुलिस अधीक्षक अजीत सिंह शेखावत डाडम में ही साइट पर रहकर बचाव कार्यों का निरीक्षण करने में जुटे रहे। अधिकारियों के बैठने के लिए वहां तंबू लगा दिया गया, जहां से वह पूरी निगरानी बनाए हुए थे। उपायुक्त ने वहां मौजूद श्रमिकों से भी हादसे के बारे में पूछताछ की और फर्म से श्रमिकों का रिकॉर्ड भी मांगा है। देर रात तक राहत कार्य जारी रहा।