ग्लोबल अस्थमा रिपोर्ट 2018 के अनुसार भारत की 131 करोड़ आबादी में छह फीसदी बच्चे और दो फीसदी वयस्क अस्थमा से ग्रस्त हैं। रिपोर्ट बताती है कि देश में अस्थमा रोगियों की संख्या में 1990 से 2005 के बीच कमी दर्ज की गई है। यह देश में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के कारण हुआ। बावजूद इसके राजस्थान और उत्तर प्रदेश राज्य अभी भी इस बीमारी पर काबू पाने में अन्य राज्यों से पिछड़े हुए हैं। श्वसन तंत्र एवं फेफड़ा रोग विशेषज्ञ डॉ. नदीम अरशद ने विश्व अस्थमा दिवस के उपलक्ष्य में यह बात बताई।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
उन्होंने बताया कि यदि अस्थमा के मरीज को सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं है तो वह भी स्वस्थ मनुष्य की ही तरह है। उसे भी कोरोना से बचाव के लिए मास्क, सोशल डिस्टेंसिंग का कड़ाई से पालन करना चाहिए। समय- समय पर साबुन से हाथ धोएं और समय पर इन्हेलर दवाएं लेते रहें। कोविड संक्रमण का खतरा उन मरीजों को अधिक है जिनका अस्थमा कंट्रोल नहीं है, ऐसे मरीजों को बहुत ही ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत है। यदि ऐसे मरीजों ने लापरवाही की तो कोरोना संक्रमण उनके लिए जानलेवा हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Pixabay
होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रूप कुमार बनर्जी के मुताबिक इस बार कोरोना वायरस का नया स्ट्रेन तेजी से लोगों को चपेट में ले रहा है। पहले से किसी बीमारी से ग्रस्त लोगों के लिए कोरोना ज्यादा खतरनाक है। अस्थमा के मरीज यदि सावधानी नहीं बरतेंगे तो सामान्य मनुष्य के मुकाबले इस वायरस की चपेट में ज्यादा तेजी से आ सकते हैं।
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Coronavirus
- फोटो : istock
डॉ. रूप कुमार बताते हैं कि सूखी खांसी और सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण कोरोना और अस्थमा दोनों बीमारियों में आम हैं। कोरोना और अस्थमा दोनों फेफड़ों को ही नुकसान पहुंचाते हैं। ऐसे में अगर किसी व्यक्ति के फेफड़ों में अस्थमा बढ़ा होने के कारण सूजन है तो उसमें कोविड के गंभीर लक्षण भी हो सकते हैं। जरूरी है कि अस्थमा रोगी अपनी बीमारी पर नियंत्रण रखें और स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं।
यह सावधानी बरतें अस्थमा मरीज
मास्क लगाकर रहें। सांस लेने में दिक्कत होने के कारण यदि मास्क नहीं लगाते हैं तो घर के बाहर न निकलें, लोगों से भौतिक संपर्क कम से कम करें। घर से बाहर निकलना जरूरी हो तो मास्क या हल्के सूती कपड़े की तह लगाकर मुंह और नाक ढकें। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें। किसी से मिलने के बाद या किसी वस्तु को छूने के बाद हाथ या तो साबुन से धोएं या सैनिटाइज करें। समय पर दवाएं और इन्हेलर लेते रहें।