गोरखपुर जिले के झंगहा क्षेत्र की नई बाजार चौकी फूकने वाले दबंगों ने पुलिसवालों को भी चौकी में ही घेर कर फूकने की कोशिश की थी। उन्होंने पुलिसवालों के सामान लूट लिए। उनको दौड़ाकर पीटा, मुकदमे में पकड़ी गई गाड़ियों को जला दिया। गुरुवार की देर रात नई बाजार चौकी प्रभारी अभय पांडेय ने झंगहा थाने में तहरीर दी। उसमें लिखा है कि उन्हें सूचना मिली थी कि जिला पंचायत के वार्ड नंबर 60 और 61 के प्रत्याशी रवि निषाद व कोदई निषाद की शह पर सैकड़ों की संख्या में ब्लॉक मुख्यालय के सामने लोग विरोध-प्रदर्शन कर रहे थे। भीड़ के हाथों में लाठी, डंडा और मिट्टी के तेल के गैलन थे।
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गोरखपुर में ग्रामीणों का हंगामा।
- फोटो : अमर उजाला।
अभय पांडेय के मुताबिक वह कुछ पुलिस कर्मियों के साथ वहां पहुंचे तो भीड़ में से सुनाई पड़ा कि ‘रवि भैया और कोदई भैया ने कहा है कि कुछ बचना नहीं चाहिए’ भीड़ उग्र थी। भीड़, चौकी पर पहुंची और पुलिसवालों को घेर कर चौकी में आग लगा दी। पुलिसकर्मी किसी प्रकार जान बचाकर भागे।
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हमलानवरों ने पुलिस चौकी पर खड़ी बाइकों व पीएसी की गाड़ी में आग लगा दी।
- फोटो : अमर उजाला।
आगजनी में यह हुआ नुकसान
उपद्रवियों ने चौकी के अंदर माल मुक़दमाती वाहन, पुलिसकर्मियों के छह व्यक्तिगत वाहन, शासकीय रजिस्टर, फर्नीचर, बीट बुक, डुप्लीकेट विवेचना, केस डायरी के अलावा पुलिस के कपड़े, बिस्तर आदि को भी फूंक दिया। पुलिस के निजी आवास में घुसकर घड़ी, अंगूठी, चेन, टंगी वर्दी से रुपये आदि लूट लिए। उपद्रवियों ने सीओ चौरीचौरा के वाहन, झंगहा थाना के सरकारी वाहन, पीआरवी 334 गाड़ी में तोड़फोड़ की और पीएसी के वाहन को भी फूंक दिया।
इन धाराओं में हुआ मुकदमा, यह हो सकती है सजा
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गोरखपुर में ग्रामीणों का हंगामा।
- फोटो : अमर उजाला।
इन धाराओं में हुआ मुकदमा, यह हो सकती है सजा
धारा 147, 148,148: गिरोहबंद होकर बलवा करना (सजा दो से तीन साल और जुर्माना)
धारा 332: लोकसेवक के काम में बाधा डालना (सजा दो से तीन साल और जुर्माना या दोनों)
धारा 307: हत्या की कोशिश (सजा दस साल व आर्थिक जुर्माना या दोनों)
धारा 436: आगजनी करना (सजा आजीवन कारावास या दस साल की सजा व जुुर्माना)
धारा 427: संपत्ति को नुकसान पहुंचाना (सजा दो साल या जुर्माना या दोनों)
धारा 151: शांतिभंग करना, डॉक्टरी के आधार पर इसके साथ धारा बढ़ाई जाती है।
धारा152: लोकसेक दंगा रोकने की कोशिश करें तब उसपर हमला करना (सजा तीन साल या आर्थिक दंड या दोनों)
धारा153: सामाजिक सौहार्द बिगाड़ना सजा एक अवधि तक हो सकती है।
धारा186: लोकसेवक के काम में बाधा डालना सजा तीन महीने या पांच सौ जुर्माना या दोनों।
धारा189: लोकसेवक को धमकी देना (सजा दो साल या जुर्माना या दोनों)
धारा120 बी: आपराधिक साजिश (दीर्घतम अवधि के आठवें भाग के कारावास या आर्थिक जुर्माना या दोनों)
धारा 395: डकैती (सजा आजीवन कारावास)
धारा 188: लॉकडाउन उल्लंघन।
आपराधिक कानून 7: अपराध के अनुसार सजा होती है।
सार्वजनिक संपत्ति नुकसान अधिनियम की धारा 3 व 4 : दस साल तक की सजा हो सकती है।
आपदा प्रबंधन की धारा 51: दो साल तक की सजा हो सकती है।
गोरखपुर में ग्रामीणों का हंगामा।
- फोटो : अमर उजाला।
बलवा भड़कने के लिए पुलिस और प्रशासन है जिम्मेदार
झंगहा क्षेत्र की नई बाजार चौकी फूंकने के मामले में आस-पास के इलाके के लोगों की सहानुभूति बलवाइयों के साथ है। उनका कहना है कि आरोपियों के साथ सरेआम ज्यादती हुई। अब यह प्रमाणित भी हो चुका कि मतगणना में अंधेर की इंतहा हुई थी, पीड़ितों ने अपना हक मांगने के लिए सुबह से ही लोकतांत्रिक तरीके अख्तियार किए। वरिष्ठ अधिकारियों से शिकायत की। धरना-प्रदर्शन किया, लेकिन किसी भी जिम्मेदार के कान पर जूं नहीं रेंगी। सब कान में तेल डाले बैठे रहे। यदि वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने उनकी शिकायत पर ध्यान देकर वह सब पहले कर लिया होता जो उन्होंने चौकी को फूंकने के बाद किया तो हालत कतई न बिगड़ते। उनका आरोप है कि इस बलवे को उकसाने के लिए जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ भी मुकदमा होना चाहिए। वो कहते हैं कि किसी को भी कानून हाथ में लेने का हक नहीं, मगर इसके लिए मजबूर करने वालों के खिलाफ भी तो कार्रवाई बनती है। पुलिस कार्रवाई की जद में आए लोगों के साथ तो दोहरा अन्याय हुआ, पहले उन्हें प्रशासनिक मिलीभगत से हरा दिया गया और अब उन पर गंभीर मुकदमे लाद दिए गए।