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सीएम योगी के पूर्वाश्रम के पिता के नाम का दुरुपयोग कर अमनमणि ने बनवाए थे पास, ऐसे हुआ खुलासा

Tue, 05 May 2020 09:31 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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सीएम योगी के साथ अमन मणि त्रिपाठी। फाइल - फोटो : अमर उजाला।
लॉकडाउन में उत्तराखंड के पहाड़ों पर फौज-फाटे के साथ घूमने के लिए महराजगंज की नौतनवां सीट से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के पूर्वाश्रम के पिता के नाम का दुरुपयोग किया। मौखिक ही नहीं इस संबंध में उन्होंने उत्तराखंड सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ओमप्रकाश से देहरादून के अपर जिलाधिकारी के नाम बदरीनाथ/केदारनाथ जाने के लिए पत्र भी जारी करवा लिया। इसके आधार पर अपर जिलाधिकारी देहरादून ने भी अनुमति पत्र जारी कर दिया। यह दोनों पत्र सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं।
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सीएम योगी के पिता आनंद सिंह बिष्ट। (फाइल) - फोटो : अमर उजाला।
उल्लेखनीय है कि लॉकडाउन की वजह से मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पूर्वाश्रम के पिता के अंतिम संस्कार नहीं गए। इसके उलट निर्दलीय विधायक ने उनके नाम पर लॉकडाउन का उल्लंघन किया। उत्तराखंड सरकार उनपर मेहरबान क्यों रही, यह बड़ा सवाल है। किसके कहने एसीएस ओमप्रकाश ने पत्र जारी किया, यह बड़ा सवाल भी उत्तराखंड की फिजाओं में तैर रहा है। 
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amanmani tripathi - फोटो : ANI file photo
इस बाबत एसीएस ओमप्रकाश से उनका पक्ष जानने की कोशिश की गई,मगर उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। नौतनवां से विधायक अमनमणि त्रिपाठी के नाम पर उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव ओम प्रकाश ने जो पास जारी किया था, वह  सात मई तक वैध है। इसके मुताबिक विधायक अपने 10 दोस्तों के साथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के स्वर्गीय पिता के पितृ कार्य से दो मई को देहरादून से श्रीनगर जाएंगे। तीन गाड़ियों से जाने की अनुमति दी गई।

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kedarnath dham - फोटो : amar ujala
तीन मई को श्रीनगर से बदरीनाथ, पांच मई कोबदरीनाथ से केदारनाथ और सात मई को केदारनाथ से बदरीनाथ आएंगे। बदरीनाथ जी के तो अभी कपाट भी नहीं खुले हैं। हालांकि वे वहां पहुंचते इससे पहले ही, यात्रा के रास्ते में ही कुछ ईमानदार अफसरों के चलते अमनमणि को न केवल लौटना पड़ा,बल्कि विधायक सहित गोरखपुर और महराजगंज के कई लोगों के खिलाफ महामारी अधिनियम, लॉकडाउन के उल्लंघन का केस दर्ज हो गया। इस सिलसिले में विधायक अमनमणि से मोबाइल फोन पर बात करने की कोशिश की गई, लेकिन फोन उठा नहीं।
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बहनों के साथ अमनमणि त्रिपाठी
विधायक के साथ इन्हें मिली थी देहरादून से बदरीनाथ, केदारनाथ जाने की अनुमति
जय प्रकाश तिवारी, हुंमायूपुर दक्षिणी गोरखपुर के मायाशंकर सिंह, विकासनगर गोरखनाथ के मनीष कुमार सिंह, सूबा बाजार खोराबार के संजय कुमार सिंह, बिछिया कॉलोनी शाहपुर गोरखपुर के रितेश यादव, बैकुंठपुर महराजगंज के उमेश चौबे, ओम प्रकाश यादव, अजय यादव (गनर), सियारामपुर गुलरिहा के ओम प्रकाश पासवान (गनर) और विनय सिंह।

 
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Aman mani tripathi - फोटो : अमर उजाला।
पहले भी कराई मुख्यमंत्री की किरकिरी
महराजगंज की नौतनवां सीट से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी ने पहले भी मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की किरकिरी कराई थी। वह श्रम विभाग की ओर से गोरखपुर विश्वविद्यालय में आयोजित एक कार्यक्रम में मुख्यमंत्री के मंच पर पहुंच गए थे। इसपर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर भी चला था। निर्दलीय विधायक गोरखनाथ मंदिर भी गए थे। जब मीडिया ने भाजपा में शामिल होने की अटकलों पर सवाल पूछा तो इच्छा भी जताई थी। भाजपा के एक विधायक ने भी कहा था कि कोई भाजपा में आना चाहता है तो स्वागत किया जाएगा। हालांकि बाद में मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों में अमनमणि की उपस्थिति नहीं दिखी।
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अमन मणि त्रिपाठी। फाइल - फोटो : अमर उजाला।
बदलती रही है राजनीतिक आस्था
नौतनवां से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी की राजनीतिक आस्था बदलती रही है। लोकसभा चुनाव आए तो सपा से करीबी की चर्चा खूब रही। यह भी चर्चा रही कि अमनमणि की बहन महराजगंज से सपा की प्रत्याशी होंगी। हालांकि ऐसा नहीं हुआ। सपा ने पुराने कार्यकर्ता को टिकट दिया था। बाद में विधायक ने कांग्रेस से खुद को जोड़ने की कोशिश की। संतकबीरनगर में कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका वाड्रा से मिलने भी अमनमणि त्रिपाठी पहुंचे थे। वह मंच के पास तक पहुंच गए थे लेकिन मंच पर चढ़ने के दौरान एसपीजी ने रोक दिया था। भाजपा ने नजदीकी जगहजाहिर हो चुकी है।
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amanmani tripathi and sara singh
विरासत में मिली है राजनीति
निर्दलीय विधायक अमनमणि को राजनीति विरासत में मिली है। पहले महराजगंज की नौतनवां सीट से विधायक के पिता अमरमणि त्रिपाठी चुने जाते थे। वह 1989 और 1996 में कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जीते थे। 2002 में बसपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे। 2007 का चुनाव सपा से लड़े और जीतकर विधानसभा पहुंच गए। बाद में कवयित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या में अमरमणि त्रिपाठी और उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी फंस गईं। दोनों मंडलीय कारागार में आजीवन उम्रकैद की सजा काट रहे हैं। तबीयत खराब होने पर कई बार बीआरडी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया। एम्स की दवाएं भी चल रही हैं। पिता के जेल जाने के बाद अमनमणि ने 2012 का विधानसभा चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2017 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं। 

पत्नी की हत्या के आरोपों  से घिरने के बाद चर्चा में आए
नौतनवां से निर्दलीय विधायक अमनमणि त्रिपाठी अपनी पत्नी सारा सिंह की हत्या के आरोपों से घिरने के बाद चर्चा में आए। इस मामले की जांच सीबीआई ने की और चार्जशीट दाखिल की। अब सीबीआई कोर्ट मेें ट्रायल चल रहा है।
 
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