उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक महीने के यातायात माह में यातायात पुलिस ने ऐसा कुछ भी नहीं किया जिससे शहरवासियों को जाम से निजात मिल सके। सोमवार हो या रविवार, ऐसा कोई दिन नहीं बीत रहा जब जाम से जूझे बिना सड़क पर चला जा सके। एक माह में लोगों के चालान काटकर विभाग ने अपना खजाना भरा और चंद स्कूलों में जागरुकता का पाठ पढ़ाकर इतिश्री कर ली गई।
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जाम से जुझते शहरवासी।
- फोटो : अमर उजाला।
यह हाल तब है जब एसएसपी से लेकर डीआईजी तक यातायात पुलिस को कई बार जाम के हालात सुधारने के निर्देश दे चुके हैं। जानकारी के मुताबिक, जनवरी से सितंबर तक यातायात पुलिस ने शहरवासियों से चार करोड़ रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला। यानी पुलिस यातायात सुधारने के नाम पर लोगों की जेब तो ढीली करा ले रही है लेकिन इसका कोई फायदा लोगों को नहीं मिल रहा है।
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ट्रैफिक जाम।
- फोटो : अमर उजाला।
रोजाना ही लोगों को जाम से जूझना पड़ता है। मिनटों का सफर घंटों में पूरा करने के लिए लोग विवश हैं। अब लोगों ने शायद इसकी आदत भी डाल ली है। जुर्माना लगता है तो भर देते हैं और पुलिस चंद जगहों पर खड़ी होकर अपनी ड्यूटी पूरी कर लेती है। पुलिस के रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 2020 में एक जनवरी से 29 नवंबर तक करीब साढ़े चार करोड़ रुपये जुर्माना जमा कराया गया। अकेले यातायात माह नवंबर में 29 तारीख तक कुल 24 लाख 81 हजार 850 रुपये का जुर्माना हुआ तो अक्टूबर में 32 लाख 06 हजार 200 रुपये का शमन शुल्क लोगों से वसूला गया।
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गोरखपुर में जाम से जुझते शहरवासी।
- फोटो : अमर उजाला।
एक जनवरी से 30 सितंबर तक कुल कार्रवाई
कुल चालान 1,96,352
निस्तारित चालान 39,012
जमा शमन शुल्क 4,79,26,700
कोर्ट भेजे गए चालान 80,369
पेडिंग चालान की तादाद 65,113
पेडिंग शमन शुल्क 20,83,31,200
गोरखपुर में जाम से जुझते शहरवासी।
- फोटो : अमर उजाला।
यातायात माह में एक नवंबर से 29 नवंबर तक हुई कार्रवाई
कुल चालान 15,773
शमन किए वाहन 1,880
शमन शुल्क 2481850
डीआईजी राजेश डी मोदक ने बताया कि यातायात सुधारने के लिए पुलिस को भी निर्देशित किया गया है। एसपी ट्रैफिक खुद मॉनीटरिंग करेंगे। नियम तोड़ने वालों से जुर्माना वसूला जा रहा है।