शिक्षक दिवस 2020(फाइल फोटो)
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अमर उजाला से बातचीत में श्वेता ने बताया कि विद्यालय पर उन्हें वर्ष 2010 में तैनाती मिली। शुरुआत में बच्चों से बेहतर संवाद स्थापित करने के लिए उन्होंने बच्चों से ही भोजपुरी सीखी। उसके बाद कक्षा में पढ़ाई के लिए वे अक्सर स्थानीय भाषा का इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने स्कूल की दीवारों और पठन कक्ष पर खुद ही पेंट और ब्रश का इस्तेमाल कर फलों के चित्र, सुविचार, कविताएं और स्लोगन लिखे हैं। इनके अलावा वो पढ़ाने के दौरान टीएलएम, आईसीटी, पपेट आर्ट, क्राफ्ट का भी इस्तेमाल कर रही हैं।