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रिंग ऑफ फायर: 37 सेकेंड तक चंद्रमा के कब्जे में रहा सूरज, दोपहर में ही दिखा शाम जैसा नजारा

Mon, 22 Jun 2020 08:27 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
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Solar Eclipse - फोटो : अमर उजाला।
साल के सबसे बड़े दिन छल्लेदार सूर्यग्रहण की खगोलीय घटना का गवाह रविवार को शहरवासियों को बनने का सौभाग्य मिला। गोरखपुर में 37 सेकेंड तक अपने चरम पर रहने के दौरान चंद्रमा ने सूर्य के 85 फीसदी हिस्से को ढक कर रखा, जिस वजह से दोपहर में ही शाम जैसा नजारा दिखाई दिया।
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Solar Eclipse - फोटो : अमर उजाला।
खगोल विज्ञान में रूचि रखने वाले लोगों ने वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला में लगाए गए दो अत्याधुनिक टेलीस्कोप, सोलर चश्मा की मदद से सूर्यग्रहण का दीदार किया। सुबह मौसम साफ होने के बाद 10 बजे से लोगों के नक्षत्रशाला पर पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था। जो दोपहर दो बजे तक बदस्तूर जारी रहा। लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए दुलर्भ खगोलीय घटना का लुत्फ उठाया।
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solar eclipse 2020 - फोटो : अमर उजाला।
वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के क्षेत्रीय वैज्ञानिक अधिकारी महादेव पांडेय ने बताया कि सुबह 10:32 मिनट से ही चंद्रमा की छाया सूर्य के ऊपर पड़नी शुरू हुई। जो दोपहर 12:19 बजकर 14 सेकेंड  से 12:19:51 बजे तक सूर्यग्रहण अपने चरम पर नजर आया। जिसके बाद से चंद्रमा की छाया सूर्य से हटनी शुरू हुई। 2:04 मिनट पर सूर्यग्रहण खत्म हुआ। उन्होंने बताया कि पिछले बार 26 दिसंबर 2019 को सूर्यग्रहण लगा था। 14 दिसंबर 2020 को अगला सूर्य ग्रहण लगेगा। मगर इसे भारत से नहीं देखा जा सकेगा। यहां 25 अक्तूबर 2022 को लगने वाला वलयाकार सूर्यग्रहण होगा।

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solar eclipse 2020 - फोटो : अमर उजाला।
साल का सबसे लंबा रहा दिन
खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अन्य दिनों में पृथ्वी की प्रक्रिया सामान्य होती है। धरती सूर्य का चक्कर लगाने के लिए अपने अक्ष पर भी घूमती है। वह अपने अक्ष पर 23.44 डिग्री झुकी हुई है। इसकी वजह से सूरज की रोशनी धरती पर हमेशा एक जैसी नहीं पड़ती और दिन-रात की अवधि में अंतर आता है। 21 जून को सूर्य उत्तरी गोलार्ध से चलकर कर्क रेखा में आ जाता है। इसी कारण सूर्य की किरणें ज्यादा समय तक धरती पर पड़ती हैं। दोपहर को सूर्य काफी ऊंचाई पर आ जाता है, उस समय एक ऐसा वक्त भी आता है कर्क रेखा के पास रहने वाले लोग अपनी परछाई तक को नहीं देख पाते हैं।
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क्या बोले शहरवासी

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Solar Eclipse - फोटो : अमर उजाला।
नौ साल बाद पूरा हुआ फिर सपना
खगोलीय घटना को लाइव देखने की जिज्ञासा मन में रहती है। एक दिन पहले का मौसम देखकर ये नहीं लग रहा था कि इसे देखने का मौका मिलेगा। खुशनसीब हूं की नौ साल बाद ये सूर्यग्रहण देखने का सपना पूरा हुआ। -अनामिका मिश्रा, तारामंडल

किताबों में पढ़ा है, लाइव देखने की लालसा ले आई
दसवीं की स्टूडेंट हूं किताबों में अक्सर सूर्यग्रहण के बारे में पढ़ने का मौका मिला है। मगर लाइव देखने की लालसा नक्षत्रशाला तक लेकर आई है। वैज्ञानिक अधिकारी ने ग्रहण से जुड़ी हर जिज्ञासा को शांत किया।- प्रसिद्धि टिबड़ेवाल, दाऊदपुर

दो घंटे तक उठाया लुत्फ
दो घंटे से लगातार वलयाकार सूर्यग्रहण को देखने का लुत्फ उठा रही हूं। चंद्रमा के सूर्य को ढकने और फिर वापस लौटने की प्रक्रिया को देखकर मजा आ गया। दोपहर में ही शाम जैसी फीलिंग आ रही थी।- प्रीति गुप्ता, रुस्तमपुर

आजीवन रहेगा याद
ग्रीष्म संक्रात और सूर्यग्रहण के बारे में अखबार से जानकारी हुई। छोटी बहन को लेकर यहां इस दुर्लभ खगोलीय घटना के गवाह बनने पहुंची हूं। इसे लाइव देखना सुखद रहा। आजीवन ये एक याद बनकर साथ रहेगा।- वंदना गुप्ता, रुस्तमपुर
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