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सुपरमून का दीदार: 60 घंटे बाद लाल रंग की रोशनी बिखेरेंगे चंदा मामा, 14 गुना बड़ा और 30 गुना ज्यादा चमकीला दिखेगा चांद

Mon, 24 May 2021 10:26 AM IST
vivek shukla विवेक सिंह, गोरखपुर।
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सुपरमून 2021। - फोटो : अमर उजाला।
अंतरिक्ष और आकाश-तारों की दुनिया में रूचि रखने वाले शौकीनों को 60 घंटे बाद घटित होने वाली खगोलीय घटना का गवाह बनने का सुनहरा मौका है। जब वो 26 मई को चंद्रग्रहण के साथ सुपर ब्लड मून की खगोलीय घटना का दीदार कर सकेंगे। गोरखपुर में उपच्छाया चंद्रगहण की शुरूआत दोपहर 2:17 मिनट से शुरू होकर 7:19 मिनट तक रहेगी। इसी दौरान सुपर ब्लड मून की घटना को शाम 6:49 मिनट पर देखा जा सकेगा। 35 मिनट तक इसे देखा जा सकेगा। हालांकि भारत से सुपरमून आंशिक रूप से नजर आएगा।

वीर बहादुर सिंह नक्षत्रशाला के खगोलविद अमर पाल सिंह ने बताया कि अमेरिका, आस्ट्रेलिया समेत अन्य देशों से पूर्ण चंद्रगहण का लुत्फ उठाया जा सकेगा। भारत में उपच्छाया चंद्रग्रहण नजर आएगा। जहां धरती की उपछाया हल्की की चंद्रमा पर पड़ती है। पिछला सुपर ब्लड मून और चंद्रग्रहण की घटना 21 जनवरी 2019 को घटित हुई थी। अगली बार इसका लुत्फ 16 मई 2022 को उठाया जा सकेगा। 
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सुपरमून 2021। - फोटो : अमर उजाला।
खगोलविद ने बताया कि चंद्रग्रहण के दौरान पृथ्वी की छाया की वजह से धरती से चांद काला दिखाई देता है। चंद्रग्रहण के दौरान कुछ सेकेंड के लिए चांद पूरी तरह लाल भी दिखाई देगा। यह स्थिति तब आती है जब सूर्य की रोशनी छितराकर चांद तक पहुंचती है। परावर्तन के नियम के अनुसार हमें कोई भी वस्तु उस रंग की दिखती है जिससे प्रकाश की किरणें टकरा कर हमारी आंखों तक पहुंचती है। चूंकि सबसे लंबी तरंग दैर्ध्य (वेवलेंथ) लाल रंग की होती है और सूर्य से सबसे पहले वो ही चांद तक पहुंचती है जिससे चंद्रमा लाल दिखता है। इसे ही ब्लड मून कहते हैं। इस दौराान चंद्रमा तकरीबन 30 फीसदी अधिक चमकीला नजर आता है और लगभग 14 प्रतिशत अपने सामान्य आकार से बड़ा दिखाई देता है। परंतु वास्तव में चंद्रमा का आकार बड़ा नहीं होता है, बल्कि पृथ्वी से इसकी निकटता के कारण ऐसा प्रतीत होता है। क्योंकि इस घटना में चंद्रमा और पृथ्वी की दूरी सबसे कम हो जाती है।

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सुपरमून 2021। - फोटो : अमर उजाला।
क्या होता है सुपरमून
सुपरमून पृथ्वी से दिखाई देने वाला चंद्रमा का एक बड़ा आकार है। दरअसल चंद्रमा की पृथ्वी के चक्कर काटने की कक्षा अंडाकार है। इस वजह से कई बार यह पृथ्वी के काफी पास तक आ जाता है, जिससे हमें उसका आकार सामान्य से बड़ा दिखाई देता है। यदि पूर्णिमा तिथि के दिन ऐसा हो तो इसे सुपरमून के नाम से जाना जाता है।

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सुपरमून 2021। - फोटो : अमर उजाला।
कब लगता है सुपरमून
सुपरमून का संबंध पूर्णिमा तिथि से है। यानि जिस दिन पूर्णिमा तिथि हो और चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकटतम बिंदू पर हो तो इस स्थिति में ही सुपरमून लगेगा।
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सुपरमून 2021। - फोटो : अमर उजाला।
खगोल विज्ञान में सुपरमून
खगोल विज्ञान के अनुसार चंद्रमा पृथ्वी का प्राकृतिक उपग्रह है। चंद्रमा का ऑर्बिट (कक्षा) अंडाकार होने की वजह से चंद्रमा और पृथ्वी के सबसे दूर बिंदू को एपोजी जबकि सबसे नजदीक बिंदु को पेरीजी के नाम से जाना जाता है। इस स्थिति में सुपरमून तब होगा जब चंद्रमा पेरीजी पर पहुंचता है। जबकि एपोजी पर यह माइक्रोमून कहलाता है। दूर वाली स्थिति को अपोगी  कहते हैं।
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