सीडीओ इंद्रजीत सिंह।
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कुछ ऐसी भी लड़ाई होती है, जहां हार भी जीत होती
चौथे प्रयास में संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) की परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले आईएएस व सीडीओ इंद्रजीत सिंह को कारगिल में शहीद लखनऊ के परमवीर चक्र विजेता मनोज पांडेय की एक बात प्रेरित करती है। वह यह कि कुछ ऐसी लड़ाई होती है, जहां हार भी जीत होती है। वह कहते हैं कि पढ़ाई कभी बेकार नहीं जाती है। सफलता-असफलता अपनी जगह, मगर जब भी हम किसी प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करते हैं, तो हमारा ज्ञान बढ़ता है। हम बहुत कुछ सीखते हैं, जो हर सेक्टर में काम आता है। जालंधर यूनिवर्सिटी के टॉपर इंद्रजीत सिंह जब वर्ष 2012 में मैसूर में पीएफ कमिश्नर पद पर तैनात हुए तभी ठान लिया था कि सफर यहीं नहीं रुकेगा। इंद्रजीत ने कभी नहीं सोचा था कि वह आईएएस बनेंगे। उनके परिवार के ज्यादातर सदस्य सेना में हैं। पिता एयरफोर्स से रिटायर हुए, जबकि बहन एयरफोर्स में हैं। भाई भी आर्मी में हैं। तीन बार परीक्षा दी, लेकिन सफलता चौथे प्रयास में मिल सकी। जब सेलेक्शन नहीं हुआ, तो निराशा को पनपने नहीं दिया। यही ताकत रही। आईएएस इंद्रजीत सिंह कहते हैं कि जिंदगी की यात्रा बहुत खूबसूरत है। हर दिन कुछ नया पाने की चाह है, तो बस बेहतर से बेहतर करने का संकल्प होना चाहिए। शिक्षक रहते हुए यदि, आप पढ़ते हैं तो बेहतर शिक्षक बनेंगे। डॉक्टर रहते हुए पढ़ते हैं, तो बेहतर डॉक्टर बनेंगे। बिना तनाव के पढ़ाई में सिर्फ सर्वश्रेष्ठ करने का संकल्प लें। सफलता कदम चूमेगी।