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दुनियाभर में पहुंच चुकी है गोरखपुर की ये खास पुस्तक, जानिए कब शुरू हुआ था इसका प्रकाशन

Tue, 02 Mar 2021 02:34 PM IST
vivek shukla अविनाश श्रीवास्तव, गोरखपुर।
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गोरखपुर गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।
गोरखपुर गीता प्रेस से प्रकाशित श्रीमद्भागवत गीता के बाद सबसे अधिक मांग किसी पुस्तक की है, तो वह है हनुमान चालीसा। गीता प्रेस से अब तक प्रकाशित 9.53 करोड़ से अधिक हनुमान चालीसा दुनिया भर में पहुंच चुकी है। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...

 
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हनुमान चालीसा। - फोटो : अमर उजाला।
गीता प्रेस में वर्ष 1923 से धार्मिक पुस्तकों का प्रकाशन हो रहा है। साल 1955 में पहली बार गीता प्रेस से हनुमान चालीसा का प्रकाशन शुरू हुआ। इसके बाद से हनुमान चालीसा गीता प्रेस से प्रकाशित होने वाली प्रमुख दो पुस्तकों में शुमार है। वर्तमान में हर साल 25 से 30 लाख हनुमान चालीसा की प्रतियों का प्रकाशन किया जा रहा है।

 
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गोरखपुर की पहचान गीता प्रेस। - फोटो : अमर उजाला।
10 भाषाओं में प्रकाशित होती है हनुमान चालीसा
गीता प्रेस से हनुमान चालीसा का प्रकाशन चार साइज में होता है। वहीं, इसकी कीमत क्रमश: दो, तीन, छह और 15 रुपये है। यहां से 10 भाषाओं में हनुमान चालीसा प्रकाशित होती है। इनमें हिंदी, अंग्रेजी, उड़िया, गुजराती, तेलगू, बांग्ला, कन्नड़, असमिया, तमिल एवं नेपाली शामिल है।

 

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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
हनुमान चालीसा विभिन्न भाषाओं में...
हिंदी         7,40,00000
उड़िया         57,55,000
गुजराती       80,15,000
तेलुगु           39,30,000
बांग्ला          14,55,000
कन्नड़            9,00000
अंग्रेजी            5,00000
असमिया         3,75000
तमिल             3,05,000
नेपाली              35,000


 
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गीता प्रेस गोरखपुर। - फोटो : अमर उजाला।
गीता प्रेस उत्पाद प्रबंधक लालमणि तिवारी ने कहा कि साल 1955 से गीता प्रेस से हनुमान चालीसा का प्रकाशन किया जा रहा है। इस पुस्तक की मांग पूरी दुनिया में है। यहां से प्रकाशित होनेवाली सर्वाधिक मांग वाली पुस्तकों में हनुमान चालीसा का दूसरा स्थान है।
 
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