कारगिल विजय दिवस: दाएं रिटायर्ड सूबेदार ओम प्रकाश मिश्रा, बहू और छोटा बेटा। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला।
धुआं और धूल के गुब्बार के बीच किस गोली पर आप का नाम लिखा है यह कोई नहीं जानता मगर भारतीय सैनिक अपनी छाती को फौलाद मानकर आगे बढ़ते थे। घायल साथियों को देखकर बस एक बात जेहन में आती थी, अब इनका बदला भी हमें लेना है। इससे जोश और उत्साह दोगुना हो जाता था। मां भारती के जयघोष के साथ लोग आगे बढ़ते रहे और पाकिस्तानी सैनिकों को कारगिल से खदेड़ दिया।