फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

भागवत कथा से रामकोला को मिली पहचान, इस वजह से यह गांव पूरे देश में हुआ था प्रसिद्ध

Wed, 25 Nov 2020 09:35 AM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, कुशीनगर।
विज्ञापन
1 of 7
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में एक रामकोला मंदिर है। रामकोला गांव से लेकर रामकोला धाम तक की कहानी बड़ी दिलचस्प है। सबसे प्रसिद्ध यहां की भागवत कथा रही, जो प्रदेश के लोगों के लिए रामकोला की पहचान बनी है। रामकोला देश का पहला गांव था, जहां गुलामी के दौर में दो चीनी मिलें लगी थीं। वहीं अनुसुइया मंदिर बनने के बाद रामकोला को रामकोला धाम के नाम से जाना जाने लगा। आगे की स्लाइड्स में देखें तस्वीरें...
 
विज्ञापन

2 of 7
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
ये है रामकोला की कहानी
जब देश गुलाम था, उस समय रामकोला गांव था। रामकोला को टाउन एरिया का दर्जा 1958 में मिला। बताया जाता है कि जब प्रदेश में जमींदारी प्रथा थी, उस समय रामकोला के जमींदारों की जमींदारी दूर तक थी। कुछ सौ वर्ष पहले यहां के जमींदारों ने एक बार रामकोला में भागवत कथा का आयोजन किया था। उसमें यहीं बगल के गांव मांडेराय के पुरोहित ने भागवत कथा शुरू की।

 
विज्ञापन

3 of 7
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
बताते हैं कि जब कथा शुरू हुई तो शुरुआत के समय कुछ लोग सुनने नहीं आ पाए थे। देर से पहुंचे लोगों ने फिर से भागवत कथा कहने के लिए पंडित से कहा। पंडित ने दोबारा कथा शुरू की। इसी प्रकार जो भी देर से आता था, वह कथा दोबारा शुरू से कहने के लिए बाध्य करता था। इस कारण आठ दिनों में समाप्त होने वाली भागवत कथा की महीनों बीत जाने के बाद भी केवल शुरुआत ही होती रही।

 

4 of 7
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
जमींदारों के इस रवैये से आजिज आकर पंडित भाग गए और जब उन्हें ढूंढा जाने लगा तो वे एक पेड़ पर चढ़कर कूद गए। इसी कारण उनकी मौत हो गई। उसके बाद यहां के जमींदारों ने उनके परिवार को दान में 700 एकड़ जमीन मांडेराय में दे दी। जहां अब भी उनकी बस्ती है। इस प्रकार रामकोला की भागवत कथा कभी समाप्त न होने वाली कथा हो गई।

 
विज्ञापन

5 of 7
sugar Mill Kushinagar - फोटो : अमर उजाला।
एक गांव में बनी दो चीनी मिले
इसके बाद रामकोला गांव में 1930-31 में केदार नाथ खेतान ने खेतान चीनी मिल की स्थापना की। उसके एक साल बाद दी रामकोला शुगर मिल कंपनी के नाम की दूसरी चीनी मिल 1932 बाल मुकुंद शाह साहनी ने स्थापित की। उस समय यह देश का पहला गांव था, जहां एक गांव में दो चीनी मिलें लगी थीं। इन दो कार्यों की वजह से रामकोला की पहचान देश और प्रदेश में रही।
 
विज्ञापन

6 of 7
sugar Mill Kushinagar - फोटो : अमर उजाला।
1992 में बकाए गन्ना मूल्य को लेकर किसान नेता राधेश्याम सिंह की अगुवाई में गन्ना आंदोलन शुरू किया गया। आंदोलन के तेइसवें दिन हुई फायरिंग के बाद राधेश्याम सिंह के साथ 75 किसानों पर मुकदमे दर्ज किए गए। इसके कारण इन लोगों को महीनों जेल में रहना पड़ा। रामकोला एक बार फिर सुर्खियों में आ गया। देश और प्रदेश के नेता रामकोला पहुंचने लगे। रामकोला गन्ना आंदोलन के लिए भी जाना जाने लगा।
विज्ञापन
विज्ञापन

7 of 7
Ramkola Mandir - फोटो : अमर उजाला।
वहीं रामकोला के ही निवासी एक व्यक्ति ने अनुसुइया जाकर अपनी तपस्या के दम पर इसी नाम पर मंदिर बनवाया। बाद में उन्हें परमहंस की उपाधि मिली। उन्हीं के शिष्यों ने रामकोला में अनुसुइया मंदिर का निर्माण करवाया। इस मंदिर की भव्यता देख यहां देश और प्रदेश के श्रद्धालु आने लगे। प्रत्येक वर्ष गुरु पूर्णिमा के दिन यहां भंडारे का आयोजन किया जाता है। इसी के कारण रामकोला को रामकोला धाम के नाम से जाना जाने लगा।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें